नई दिल्ली (भाषा), मंगलवार, 3 नवंबर 2009( 18:51 IST )
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वड़ोदरा, नागपुर, दिल्ली और मोहाली में चूकने के बाद सचिन तेंडुलकर अब हैदराबाद के उस उप्पल स्थित राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में 17 हजार रन के जादुई आँकड़े को छूने की कोशिश करेंगे, जिसमें वह अभी तक अपेक्षानुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं।
तेंडुलकर को इस मुकाम पर पहुँचने के लिए केवल सात रन की दरकार है और पूरी संभावना है कि हैदराबाद के दर्शकों को ही वह रन देखने को मिलेगा, जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक नया अध्याय जोड़ेगा। मास्टर ब्लास्टर ने श्रृंखला के चार मैच में अभी तक केवल 90 रन बनाए हैं, जिससे उनके 17 हजार रन के मुकाम पर पहुँचने का इंतजार भी बढ़ गया है।
हैदराबाद की धरती वैसे तेंडुलकर के लिए भाग्यशाली रही है। उन्होंने नवाबों के शहर में ही अपने कैरियर का सर्वाधिक स्कोर 186 रन (बनाम न्यूजीलैंड 1999) बनाया है लेकिन तब मैदान लालबहादुर शास्त्री स्टेडियम था जबकि अब उन्हें उप्पल के राजीव गाँधी स्टेडियम में खेलना है, जिसमें उनके नाम पर दो मैच में केवल 45 रन दर्ज हैं।
तेंडुलकर की निगाह जहाँ 17 हजारी बनने पर होगी वहीं भारतीय टीम को भी इस मैदान पर पहली जीत का इंतजार है। मोहाली मेंऑस्ट्रेलियाकी 24 रन से जीत के बाद दोनों टीमें सात एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला में 2-2 से बराबरी चल रही हैं और अगला मैच जीतने वाली टीम का श्रृंखला के पलड़ा भारी हो जाएगा क्योंकि ऐसी स्थिति में दूसरी टीम को श्रृंखला जीतने के लिए अंतिम दोनों मैचों में जीत दर्ज करनी होगी।
भारत को हालाँकि उप्पल का मैदान रास नहीं आता और उसे यहां खेले दोनों एकदिवसीय मुकाबलों में दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार झेलनी पड़ी। ऐसे में उप्पल की बल्लेबाजों की अनुकूल पिच पर भारत ही नजरें एक बार फिर अपने अनुभवी बल्लेबाजों सचिन तेंडुलकर, वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह और धोनी पर होगी जबकि टीम इंडिया को गौतम गंभीर के भी चोट से उबरकर टीम में वापसी की उम्मीद होगी, जिससे बल्लेबाजी मजबूत हो सके। टीम इंडिया के लिए यहाँ युवराज तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।
फिरोजशाह कोटला की मुश्किल विकेट पर 78 रन की पारी खेलकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले युवराज के लिए उप्पल का मैदान काफी भाग्यशाली रहा है और वह यहाँ दो बार मैदान पर उतरे और दोनों बाद शतक बनाने के बाद ही वापस लौटे।
युवराज ने यहाँ दो मैचों में 112 की बेजोड़ औसत के साथ दो शतकीय पारियों की मदद से 224 रन बटोरे हैं। भारत को हालाँकि दोनों मैचों में शिकस्त झेलनी पड़ी है। सोलह नवंबर 2005 को इस मैदान पर हुए पहले मैच में भारत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ युवराज की 103 रन की पारी बदौलत नौ विकेट पर 249 रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया था लेकिन मेहमान टीम ने जाक कैलिस की 68 और कप्तान ग्रीम स्मिथ की 48 रन की पारी की बदौलत पाँच विकेट खोकर ही 49वें ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच भी लगभग दो साल पहले 10 अक्टूबर 2007 को यहां एकदिवसीय मैच खेला गया और इसमें भी मेजबान टीम के हाथ निराशा ही लगी। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 290 रन का मजबूत स्कोर बनाया, जिसके जवाब में भारतीय टीम युवराज की 115 गेंद में 121 रन आतिशी पारी के बावजूद 243 रन पर ढेर हो गई।
राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की पिच बल्लेबाजी के अनुकूल है लेकिन फिर भी युवराज के अलावा भारत के अन्य बल्लेबाजों को यहां रन बनाने के लिए जूझना पड़ा है। रोचक तथ्य यह है कि युवराज के बाद इस मैदान पर सर्वाधिक रन बनाने वाला कोई भारतीय बल्लेबाज नहीं बल्कि ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह है, जिन्होंने यहाँ दो मैचों में 56 रन बनाए हैं।
भारतीय कप्तान धोनी यहाँ दो मैचों में 50 ही बनाए हैं। इसके अलावा गंभीर के नाम दो मैचों में सात रन है जबकि श्रृंखला में अच्छी शुरूआत के बावजूद बड़ी पारी खेलने में असफल रहे सहवाग ने एक मैच में केवल एक रन बनाया है जो टीम इंडिया के लिए चिंता का सबब हो सकता है।
गेंदबाजी भी यहां टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं क्योंकि टीम के मौजूदा गेंदबाजों में सिर्फ हरभजन को ही अंतरराष्ट्रीय मैचों में यहां खेलने का अनुभव है और उनके नाम भी यहाँ केवल एक विकेट दर्ज है।
दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलियाई टीम भले ही यहाँ अपना एकमात्र मुकाबला जीती हो लेकिन इस जीत में अहम भूमिका निभाने वाले तेज गेंदबाज ब्रेट ली चोट के कारण स्वदेश लौट चुके हैं, जिनकी कमी टीम को काफी खल रही है। ली ने इस मैच में 37 रन देकर तीन विकेट चटकाए थे।
ली के अलावा केवल कप्तान रिकी पोंटिंग और तेज गेंदबाज मिशेल जॉनसन ही यहाँ की पिच से वाकिफ हैं। पोंटिंग ने अपने एकमात्र मैच में यहाँ 25 रन की पारी खेली थी जबकि जॉनसन ने दो विकेट चटकाए।