राष्ट्रीय टीम में चयन की गारंटी नहीं रणजी

नई दिल्ली (भाषा), मंगलवार, 3 नवंबर 2009( 21:26 IST )
रणजी ट्रॉफी के जरिये राष्ट्रीय टीम में शामिल होने के लिए अपना दावा पेश करने की कोशिश करने वाले क्रिकेटरों को यह जानकर थोड़ा निराशा होगी कि चयनकर्ताओं ने भारतीय टीम का चयन करते समय पिछले साल इस राष्ट्रीय क्रिकेट चैंपियनशिप के बजाय इंडियन प्रीमियर लीग के प्रदर्शन को तवज्जो दी।
रणजी ट्रॉफी का नया सत्र आज से शुरू हो गया जिसके जरिये एस श्रीसंत, चेतेश्वर पुजारा, एस. बद्रीनाथ, इरफान पठान, यूसुफ पठान, आरपी सिंह, रोहित शर्मा, रोबिन उथप्पा, पीयूष चावला, प्रज्ञान ओझा, पार्थिव पटेल, लक्ष्मीपति बालाजी, वसीम जाफर, आकाश चोपड़ा जैसे अनुभवी खिलाड़ी तथा कई नए क्रिकेटर चयनकर्ताओं को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे।
लेकिन यदि चयनकर्ता रणजी ट्राफी के प्रदर्शन को ही मानदंड मानकर चलते तो शायद अमोल मजूमदार आज तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने से महरूम नहीं रहते। मजूमदार रणजी ट्रॉफी में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बनने से कुछ रन दूर हैं।
यदि रणजी ट्रॉफी के पिछले साल के प्रदर्शन पर ही गौर किया जाए तो जाफर, पुजारा, अभिनव मुकुंद, तन्मय श्रीवास्तव, पार्थिव पटेल, मोहनीश परमार, बालाजी, सिद्वार्थ त्रिवेदी आदि ने रणजी और विजय हजारे ट्रॉफी एकदिवसीय टूर्नामेंट में अच्छा खेल दिखाया था लेकिन इनमें से किसी को पिछले एक साल में राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली।
रणजी ट्रॉफी में मुंबई के कप्तान जाफर ने पिछले साल दस मैच में सर्वाधिक 1260 रन बनाकर वापसी का मजबूत दावा पेश किया था जबकि सौराष्ट्र के मध्यक्रम के बल्लेबाज पुजारा ने तिहरे शतकों की झड़ी लगाकर तहलका मचा दिया था लेकिन घरेलू सत्र समाप्त होते ही वह गुमनामी के अंधेरे में खो गए।
पुजारा ने रणजी ट्रॉफी के नौ मैच में 82.36 की औसत से 906 रन बनाए, जिसमें चार शतक शामिल हैं। आईपीएल में कोलकाता नाइटराइडर्स के कोच जॉन बुकानन उनके इस प्रदर्शन से अधिक प्रभावित नहीं दिखे और पहले दो सत्र में इस उदीयमान क्रिकेटर को कोई मौका नहीं दिया गया।
तमिलनाडु के अभिनव मुकुंद भी पिछले सत्र में तिहरा शतक जड़ने वाले बल्लेबाजों में शामिल थे। उनके साथी सलामी बल्लेबाज मुरली विजय को मौका मिल गया लेकिन मुकुंद को अब भी मौके का इंतजार है।
दिल्ली के आकाश चोपड़ा को तो अब समभ में नहीं आ रहा है कि उन्हें घरेलू क्रिकेट में कैसा प्रदर्शन करना है। पिछले दो सत्र से रनों का अंबार लगाने वाले चोपड़ा ने रणजी और विजय हजारे दोनों में 60 से अधिक औसत से रन बनाये लेकिन यह चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने के लिए पर्याप्त नहीं था।
गुजरात के पार्थिव पटेल ने तो विकेट के आगे और विकेट के पीछे दोनों भूमिकाओं में प्रभावशाली प्रदर्शन किया और आईपीएल में भी कुछ अच्छी पारियाँ खेली। उन्हीं की तरह तन्मय श्रीवास्तव, केदार जाधव, सन्नी सोहाल, शितांशु कोटक, डीबी रवि तेजा आदि के बल्ले का कमाल भी घरेलू रिकॉर्ड से आगे नहीं बढ़ पाया।
पीयूष चावला ने गेंद और बल्ले दोनों से अच्छा प्रदर्शन किया। दिल्ली के योगेश नागर भी अच्छी स्पिन के साथ बढ़िया बल्लेबाज की। गुजरात के स्पिनर मोहनीश परमार (पिछले रणजी सत्र में 42 विकेट), ने अपने प्रदर्शन से कई पूर्व क्रिकेटरों को कायल बनाया लेकिन वह भी बालाजी (36 विकेट) और सिद्धार्थ त्रिवेदी (34 विकेट) की तरह चयनकर्ताओं को प्रभावित नहीं कर पाए।