विश्वकप 2011 की मेजबानी दोबारा हासिल करने के मसले पर पाकिस्तान भले ही कानूनी कार्रवाई की कवायद में हो लेकिन आईसीसी ने स्पष्ट किया कि टूर्नामेंट भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर आयोजित करने का सवाल ही नहीं उठता।
पाकिस्तान के हिस्से के 14 मैच बाकी तीन सह मेजबानों को दे दिए गए। इस फैसले के खिलाफ पाकिस्तान ने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। आईसीसी प्रमुख डेविड मोर्गन ने कहा कि भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश में विश्वकप के आयोजन का इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
लंबे चले आ रहे विवाद के कारण विश्वकप दक्षिण एशिया से बाहर आयोजित करने की संभावना के बारे में पूछने पर मोर्गन ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि विश्वकप 2011 भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर आयोजित होगा। पाकिस्तान के पास मेजबानी अधिकार होंगे और उसे फीस भी मिलेगी, लेकिन कोई भी मैच पाकिस्तान में नहीं होगा।
आतंकवादी हमलों के बाद पाकिस्तान से मैचों के आयोजन के अधिकार छीन लिए गए थे। मोर्गन ने पाकिस्तान के हिस्से के मैच तटस्थ स्थान पर आयोजित करने की संभावना से भी इनकार किया। उन्होंने पीसीबी के इस सुझाव को खारिज करते हुए कहा कि ये मैच बाकी तीन मेजबान देशों में ही होंगे।
मोर्गन के अनुसार आईसीसी वाणिज्यिक बोर्ड ने तय किया है कि पाकिस्तान में होने वाले मैच बाकी तीन मेजबानों बांग्लादेश, श्रीलंका और भारत में खेले जाएँगे। यह पूछने पर कि पीसीबी से लंबी कानूनी लड़ाई की दशा में आईसीसी का रुख क्या होगा? मोर्गन ने कहा कि इस समय इस बारे में बात नहीं की जा सकती।
पाकिस्तान आईसीसी के फ्यूचर टूर्स कार्यक्रम (एफटीपी) से भी खुश नहीं है और उसने भारत और ऑस्ट्रेलिया पर उसे हाशिये पर ले जाने का आरोप लगाया है। मोर्गन ने हालाँकि कहा कि बीसीसीआई का इससे कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में द्विपक्षीय श्रृंखलाएँ खेलने से बीसीसीआई को एतराज है। मुझे चिंता इस बात की है कि पाकिस्तान जैसे बेहतरीन क्रिकेट खेलने वाले देश को अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिए।
मोर्गन ने कहा कि आईसीसी इस बात की पूरी कोशिश करेगा कि एफटीपी में पाकिस्तान को क्रिकेट खेलने वाले एक दमदार और प्रभावी देश के रूप में सही जगह मिले। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पाकिस्तान के बिना अधूरा है।
उन्होंने कहा कि हम इस तथ्य को अनदेखा नहीं कर सकते कि पाकिस्तान ने पिछले 20 साल में कुछ बेहतरीन क्रिकेटर दिए हैं और पाकिस्तान के बिना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतना समृद्ध नहीं हो सकता था। |