पाकिस्तान में आंतकवादी हमले में अपनी जान बचाकर लौटे विश्व के नंबर एक अंपायर साइमन टफेल ने पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों को जमकर लताड़ लगाते हुए कहा कि उन्होंने मैच अधिकारियों को युद्व जैसी स्थिति में अकेला छोड़ दिया।
पाकिस्तान से स्वदेश लौटने के बाद बेहद नाराज टफेल ने कहा माना 25 सशस्त्र कमांडो हमारे काफिले के साथ थे लेकिन जब हमारी बस दोबारा चली तो कोई नजर नहीं आया और हमें अकेला छोड़ दिया गया था।
संवाददाताओं के प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि मेरे पास कुछ सवालों के जवाब नहीं हैं। मुझे नाराजगी इस बात की है कि हमें अकेला छोड़ दिया गया। मुझे इस बात पर गुस्सा है कि उस तरह की सुरक्षा नहीं दी गई जो खिलाड़ियों को दी जाती है।
ज्यादा हैरानी की बात यह है कि जब हमें सबसे सुरक्षा की जरूरत थी हमें अकेला और बेसहारा छोड़ दिया गया और जब हम मैदान में गए तो हमारी जान बचाने कोई नहीं आया। 38 साल के तीन बार के आईसीसी सर्वश्रेष्ठ अम्पायर टफेल ने 55 टेस्ट मैचों अंपायररिंग की है। उन्होंने कहा कि यह बिलकुल युद्व जैसी स्थिति थी। श्रीलंका की क्रिकेट टीम लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम के लिए जिस बस में जा रही थी, उसके ठीक पीछे आईसीसी अधिकारियों को ले जा रही वैन पर भी आंतवादियों ने हमला किया था और पाकिस्तानी अम्पायर अहसान रजा इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए।
आस्ट्रेलिया के एक अन्य अम्पायर स्टीव डेविस ने भी कहा कि सुरक्षाकर्मियों ने मैच अधिकारियों को मझधार में छोड़ दिया। डेविस ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था कहीं नजर नहीं आ रही थी और हमें अकेला छोड़ दिया गया था। हमें इस बात से काफी निराशा हुई है और काफी नाराजगी भी है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जाने से पहले हमें सुरक्षा को लेकर काफी आश्वासन दिए गए थे लेकिन इसके बावजूद भी ऐसा हो गया। हमें अजीब-सी स्थिति में छोड़ दिया गया और हम बहुत लाचार थे। |