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भारतीय सरजमीं पर 75 बरस का हुआ टेस्ट क्रिकेट
भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को आज से ठीक 75 बरस पूर्व पहली बार अपनी सरजमीं पर टेस्ट क्रिकेट के दीदार का मौका मिला था, जब बंबई जिमखाना में भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की श्रृंखला का पहला टेस्ट खेला गया।

इस ऐतिहासिक दिन का जश्न मनाने के लिए क्रिकेट बोर्ड ने सभी पूर्व कप्तानों की मौजूदगी में 17 दिसंबर को बंबई जिमखाना में डिनर का आयोजन करने की योजना बनाई थी, लेकिन पिछले महीने मुंबई आतंकी हमलों के बाद इसे रद्द कर दिया गया।

इन दोनों टीमों के बीच 15 से 18 दिसंबर 1933 को हुए इस मैच में इंग्लैंड की अगुआई डगलस जार्डिन कर रहे थे जो बाडीलाइन श्रृंखला में अपनी भूमिका के कारण ऑस्ट्रेलियाई जनता के बीच कुख्यात हो गए थे जबकि भारतीय टीम की कमान सीके नायडू के हाथ में थी।

इंग्लैंड की टीम ने यह मैच नौ विकेट से जीता लेकिन भारतीय टीम के कई खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड बुक में जगह बनाई। लाला अमरनाथ दूसरी पारी में शतक जमाते हुए पदार्पण टेस्ट में शतक बनाने वाले बल्लेबाज बने।

लॉर्ड्स में 1932 में भारत के पहले टेस्ट में इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करने वाले तेज गेंदबाज मोहम्मद निसार ने एक बार फिर मेहमान टीम के बल्लेबाजों को परेशान करते हुए पहली पारी में 90 रन देकर पाँच विकेट चटकाए।

इंग्लैंड ने सिरिल वाल्टर्स के 78 कप्तान जार्डिन के 60 और ब्रायन वेलेंटाइन 136 रन की मदद से पहली पारी में 438 रन बनाए, जिसके जवाब में भारतीय टीम 219 रन पर सिमट गई।

भारत ने दूसरी पारी में अमरनाथ के 118 और कप्तान नायडू के 67 रन की मदद से 258 रन बनाए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों स्टान निकोल्स और एडवर्ड क्लार्क ने मिलकर भारत के आठ बल्लेबाजों को पैवेलियन भेजा।
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