-शराफत खान
अब तक भारत में टीम इंडिया की शक्ति उसकी स्पिन गेंदबाजी मानी जाती थी, जो टेस्ट के चौथे और पाँचवें दिन बदलते विकेट का फायदा उठाकर मेहमान टीम को पराजित करती थी, लेकिन चेन्नई में भारत ने अपने बल्लेबाजों के दम पर टेस्ट जीतकर साबित किया कि घरेलू श्रृंखला में भारत अपने स्पिन गेंदबाजों के बगैर भी जीतना जानता है। वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, युवराजसिंह और सचिन तेंडुलकर ने जिम्मेदारी लेकर भारत को जीत दिलाई।
सचिन ने क्रीज पर आते ही पूरी भारतीय पारी को अपने कंधे पर ले लिया। चेन्नई के विकेट पर इंग्लिश गेंदबाज फुटमार्क का इस्तेमाल कर रहे थे और इसी से उन्होंने वीवीएस लक्ष्मण को आउट भी कर लिया था, लेकिन उनका यह हथियार सचिन पर नहीं चला।
अनुभवी सचिन ने मोंटी पनेसर और ग्रीम स्वान के खिलाफ पैडल स्वीप और स्लॉग स्वीप का प्रभावी इस्तेमाल किया और उन्हें दबाव बनाने का कोई मौका नहीं दिया। युवराज ने भी अपने करारे हाथ दिखाए।
सचिन-युवराज के राइट-लेफ्ट कॉम्बिनेशन ने इंग्लैंड के गेंदबाजों को किसी एक लाइन पर कायम नहीं रहने दिया। हालाँकि अंग्रेज गेंदबाज सचिन और युवी को बैकफुट पर ज्यादा खिला रहे थे और वे खेल भी रहे थे, लेकिन दोनों ही बल्लेबाजों ने बैकफुट पर स्ट्रोक्स खेलने में कोई गलती नहीं की। युवी ने बैकफुट पर बेहतरीन कलाई का इस्तेमाल किया, वहीं फ्रंटफुट पर करारे शॉट भी खेले।
केविन पीटरसन भारत को 387 रनों का लक्ष्य देकर जीत के प्रति आश्वस्त रहे होंगे, लेकिन उनके गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों के सामने असहाय रहे। पीटरसन ने भारत की दूसरी पारी के दौरान अपने प्रमुख गेंदबाज जेम्स एंडरसन और स्टीव हार्मिसन से केवल 11 और 10 ओवर ही करवाए। साथ ही उन्होंने बदलाव के तौर पर पॉल कॉलिंगवुड जैसे उपयोगी गेंदबाज का प्रयोग नहीं किया। पीटरसन बतौर कप्तान और बल्लेबाज चेन्नई टेस्ट में अतिसाधारण साबित हुए हैं। |