भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष शशांक मनोहर, सचिव एन. श्रीनिवासन, उपाध्यक्ष चिरायु अमीन और पूर्व सचिव निरंजन शाह ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें फर्जी दस्तावेज पेश करने के मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया था।
बीसीसीआई के इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया को फँसाने के लिए अदालत में फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। बोर्ड के पूर्व और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के नामित अध्यक्ष शरद पवार इस आदेश के खिलाफ पहले ही उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुके हैं।
याचिकार्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि उनकी अपील के अंतिम निष्पादन तक उच्च न्यायालय के आदेश के अमल पर रोक लगा दी जाए। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने उन्हें सफाई का मौका नहीं देकर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है।
डालमिया पर 1996 में अध्यक्ष पद पर रहते विश्व कप के कोष में हेराफेरी करने का आरोप लगाते हुए उन्हें 2006 में बीसीसीआई से निष्कासित कर दिया गया था।
बीसीसीआई के इस फैसले को डालमिया ने अदालत में चुनौती दी। उन्होंने उच्च न्यायालय में कहा कि बीसीसीआई के अधिकारियों ने झूठा हलफनामा दायर कर अदालत को गुमराह किया लिहाजा उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
डालमिया 1996 की विश्व कप आयोजन समिति के प्रमुख थे। उन पर इस टूर्नामेंट के कोष में 41 करोड़ रुपए की हेराफेरी करने का आरोप लगाया गया। उन्हें बीसीसीआई के जिन नियमों के तहत निष्कासित किया गया, वे उनके निष्कासन के दिन लागू नहीं थे।
बीसीसीआई के सीनियर पदाधिकारी रत्नाकर शेट्टी ने उच्च न्यायालय के आदेश को अब तक चुनौती नहीं दी है। सभी पाँच याचिकाओं पर सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश के जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ पाँच दिसंबर को करेगी। |