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घबराकर नहीं लिया संन्यासःकुंबले
-दिल्लनवीन शर्मा

जब भारतीय कप्तान अनिल कुंबले दिल्ली टेस्ट के लिए आए थे तब उन्होंने संन्यास को लेकर कोई अंतिम मन नहीं बनाया था। तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन अँगुली में लगी चोट के बाद जम्बो ने वह फैसला ले ही लिया जिसकी उधेड़बुन मन में कब से चल रही थी। कुंबले ये स्वीकारते हैं कि एक गेंदबाज के तौर पर वे अपने स्तर को नहीं छू पा रहे थे, लेकिन उन्होंने आलोचनाओं से घबराकर क्रिकेट को बाय-बाय कहने का फैसला नहीं लिया।

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रविवाशामैच के बाद नियमित ब्रीफिंग के लिए आए भारतीय क्रिकेट के इस सफलतम गेंदबाज ने कहा कि इस टेस्ट मैच के दौरान लगी चोट के बाद उनकी अँगुली में 11 टाँके लगे हैं, जो 8 नवंबर को खुलेंगे और यह चौथे और अंतिम टेस्ट का तीसरा दिन होगा। इस स्थिति में बल्लेबाजी और फील्डिंग में सौ प्रतिशत योगदान नहीं दे पाऊँगा।

कुंबले के अनुसार फिटनेस को लेकर संघर्ष चल रहा था। दर्द निवारक दवाएँ लेकर कब तक चल सकता था। आप अपने आपसे लड़ते हैं फिर लगता है कि अब बहुत हुआ। एक दिन तो संन्यास लेना ही था, फिर कोटला से तो बड़ी यादें जुड़ी हैं। यहीं दस विकेट लेने का प्रदर्शन किया था।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं आलोचनाओं से नहीं घबराता। जब 18 साल पहले टेस्ट करियर शुरू किया था तब कहा गया था कि मैं दो टेस्ट नहीं खेल पाऊँगा। कटाक्ष भी किया कि लोग तो लेग स्पिनर के रूप में सवाल उठाते थे।

अचानक लिए फैसले के बारे में कहा कि मैंने शनिवार की रात यह निर्णय ले लिया था। दिन में साथियों को और लंच के बाद चयन समिति के चेअरमैन श्रीकांत को सूचित कर दिया था। अपनी सफलताओं के लिए परिवार, दोस्तों और करोड़ों क्रिकेटप्रेमियों को धन्यवाद देने वाले कुंबले ने कहा कि उन्हें कोई पछतावा नहीं है। इस बात की खुशी है कि मुझे उस खिलाड़ी के रूप में जाना जाएगा, जिसमें संघर्ष का जज्बा था।

ड्रेसिंग रूम में साथियों और एक क्रिकेटर के तौर पर विपक्ष से भी पूरा सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि 1990 में अजहर की कप्तानी में शुरुआत के बाद लंबा सफर तय किया है। देश में ही नहीं विदेश में भी यादगार जीतें दर्ज की हैं। 2004 की ऑस्ट्रेलिया सिरीज, उसके बाद पाकिस्तान, वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन याद रहेगा।

कपिल पाजी, रविभाई, सचिन, राहुल, सौरव और लक्ष्मण जैसे बड़े क्रिकेटरों और धोनी, सहवाग, गंभीर, जहीर और ईशांत जैसे युवाओं के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर किया है। मैच में हार-जीत अलग बात है। नतीजे की तो गारंटी नहीं दी जा सकती, लेकिन खुशी है कि जब तक रहा सौ प्रतिशत देने की कोशिश की।

भारतीय कप्तान ने कहा कि पिछले पाँच-छह महीनों से मैं अच्छा नहीं कर पा रहा था, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ पिछली सिरीज को छोड़कर टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया है। अब यह युवा क्रिकेटरों पर है कि वे बेहतर करने की परंपरा को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि बेशक उन्होंने संन्यास ले लिया है, लेकिन फ्रेंचाइजी से प्रतिबद्धता के कारण आईपीएल में खेलेंगे।

क्या अब नागपुर में होने वाले अंतिम टेस्ट में जाएँगे, इस पर उन्होंने कहा कि जरूर जाऊँगा। वहाँ सौरव का विदाई मैच है और लक्ष्मण अपना सौवाँ टेस्ट खेल रहे हैं। वह सिरीज का अंतिम मैच है। जीत की उम्मीद लिए चियर्स अप करने जरूर जाऊँगा।
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