मोहाली। कभी उन्हें क्रिकेट का खुदा कहा गया तो कभी रनों की मशीन और कभी रिकॉर्डो का बादशाह। क्रिकेट के युगपुरुष सचिन तेंडुलकर इन उपमाओं पर एक बार फिर सौ टंच खरे उतरते हुए ब्रायन लारा को पछाड़कर टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए।
अब उनके नाम 569 अंतरराष्ट्रीय मैच, 28000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन और 81 अंतरराष्ट्रीय शतक हैं। तेंडुलकर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे क्रिकेट टेस्ट के पहले दिन आज पीटर सिंडल की गेंद पर तीन रन लेकर पूर्व कैरेबियाई कप्तान ब्रायन लारा का 11953 रन का रिकॉर्ड तोड़ दिया। लारा ने 131 मैचों में 52.88 की औसत से ये रन बनाए थे जबकि तेंडुलकर का यह 152वाँ टेस्ट है।
शेन वॉर्न जैसे फिरकी के जादूगर और शोएब अख्तर सरीखे रफ्तार के सौदागर के लिए आतंक का पर्याय रहे तेंडुलकर की रनों की भूख 19 बरस के अंतरराष्ट्रीय करियर में कम नहीं हुई है। उन आलोचकों को उन्होंने आज इसकी बानगी भी दे दी जो उम्र का हवाला देकर उनका बोरिया-बिस्तर समेटने की फिराक में थे।
एक दिवसीय क्रिकेट में भी सबसे ज्यादा रन मुंबई के इस मास्टर बल्लेबाज के बल्ले से ही निकले हैं। उन्होंने 417 मैच खेलकर 44.33 की औसत से 16361 रन बनाए हैं, जिसमें 42 शतक शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 81 शतक किसी और बल्लेबाज के नाम नहीं हैं। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 39 सैकड़े जमाए हैं।
टेस्ट क्रिकेट में यह दूसरा अवसर है जबकि कोई भारतीय रनों के शिखर पर काबिज हुआ। इससे पहले सुनील गावस्कर (10122 रन) एक समय टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज थे। उनका रिकॉर्ड बाद में एलन बॉर्डर (11174) ने तोड़ा और फिर लारा उनसे आगे निकले।
तेंडुलकर जैसे ही क्रीज पर उतरे भारत ही नहीं दुनियाभर के क्रिकेटप्रेमियों की निगाहें इस भारतीय सितारे पर टिक गईं और उन्होंने भी अपने प्रशंसकों को इस बार निराश न करके मोहाली के पीसीए स्टेडियम के साथ वह उपलब्धि जोड़ दी जो कोलंबो, गाले और बेंगलुरु के नाम पर नहीं जुड़ पाई थी।
भारत ने जब टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया तो तेंडुलकर की उपलब्धि का साक्षी बनने के लिए हजारों लोग स्टेडियम पहुँच गए, लेकिन उन्हें थोड़ा इंतजार करना पड़ा क्योंकि शुरुआती बल्लेबाजों ने टीम को अच्छी शुरुआत दी। तेंडुलकर ने ठीक एक बजकर 21 मिनट पर क्रीज पर कदम रखा। तब स्टेडियम में चारों तरफ सचिन-सचिन का शोर था और दर्शकों के हाथों में 'हमें 15 रन चाहिए' के बैनर लहरा रहे थे। तेंडुलकर ने ब्रेट ली की गेंद पर फाइन लेग में एक रन लेकर अपना खाता खोला और फिर इसी गेंदबाज पर गली से गेंद निकालकर दो रन लिए।
इस बीच दूसरे छोर पर खड़े वीवीएस लक्ष्मण ने मिशेल जानसन पर दो चौके जमाए लेकिन वे जल्द ही इसी गेंदबाज के शिकार बन गए। तेंडुलकर ने हालाँकि खुद पर इसका दबाव नहीं बनने दिया और सहजता से रन बटोरे। तब सौरव गांगुली उनके साथ थे जिन्होंने 17वीं गेंद में अपना खाता खोला और इस दौरान अधिकतर अपने पास स्ट्राइक रखकर दर्शकों का इंतजार बढ़ा दिया।
तेंडुलकर ने जानसन पर कवर में पारी का पहला चौका जड़ा। इसी ओवर में फाइन लेग में ली ने उनका चौका रोका लेकिन वे मास्टर ब्लास्टर को दो रन लेने से नहीं रोक पाए। तेंडुलकर के इस रिकॉर्ड के साथ इंतजार शब्द का वास्ता यहाँ पर भी बना रहा और उन्हें रनों के एवरेस्ट पर पहुँचने के लिए केवल दो रन की दरकार थी, तभी चाय का विश्राम हो गया।
बीस मिनट का इंतजार हालाँकि बहुत लंबा नहीं खिंचा और तेंडुलकर ने चाय के विश्राम के बाद दो बजकर 32 मिनट पर सिडल की गेंद पर तीन रन लेकर दुनियाभर के क्रिकेटप्रेमियों को आखिर में वह बेमिसाल उपलब्धि देखने का मौका दिया जिसके लिए वे सुबह से ही अपने टीवी सेंटों पर चिपके हुए थे।
इसके साथ पिछले तीन महीने से चला आ रहा इंतजार भी खत्म हो गया। भारतीय टीम तब श्रीलंका दौरे पर गई थी और तेंडुलकर को लारा का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए केवल 172 रन चाहिए थे, लेकिन वे इस श्रृंखला में केवल 95 रन ही बना पाए। उन्होंने कोलंबो में पहले टेस्ट में 27 और 12, गाले में दूसरे टेस्ट में पांच और 31 तथा कोलंबो में तीसरे और अंतिम टेस्ट मैच में छह और 14 रन बनाए।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भी तेंडुलकर की उपलब्धि के लिए सभी तैयारियाँ कर दी गई थीं क्योंकि तब उन्हें इसके लिए 77 रन की जरूरत थी, लेकिन वे पहली पारी में 13 रन बनाने के बाद दूसरी पारी में 49 रन पर आउट हो गए थे। (भाषा) |