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घंटों अकेले अभ्यास करता था सचिन-आमरे
क्रिकेट के बेताज बादशाह सचिन तेंडुलकर के नाम भले ही बल्लेबाजी के अनगिनत रिकॉर्ड दर्ज हो गए हों, लेकिन उनके करीबी मित्र और पूर्व क्रिकेटर प्रवीण आमरे का कहना है कि वे उस दौर के साक्षी रहे हैं, जब बारह बरस की उम्र में मास्टर ब्लास्टर अकेले घंटों मैदान पर अभ्यास करता रहता था।

एक साक्षात्कार में आमरे ने कहा कि लोगों को लगता है कि सचिन बहुत आसानी से इस मुकाम तक पहुँचा है, लेकिन हम जानते हैं कि उसने कितने पापड़ बेले हैं। बारह साल की उम्र में वह एक एक शॉट सीखने के लिए रात होने तक अकेला मैदान पर डटा रहता था, जबकि बाकी सारे लड़के घर लौट जाते थे।

मुंबई के शारदाश्रम विद्या मंदिर में सचिन के साथी रहे आमरे ने कहा कि क्रिकेट के छात्र से मास्टर बनने का सचिन का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है, लेकिन हम बचपन से जानते थे कि एक दिन वह क्रिकेट का महानायक बनेगा। उसका अनुशासन, जुनून और दबाव में अच्छा खेलने की कला बचपन में ही जाहिर हो गई थी।

टेस्ट क्रिकेट में ब्रायन लारा का सर्वाधिक 11953 रन का विश्व रिकॉर्ड तोड़ने से महज 15 रन दूर खड़े सचिन कल से मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शुरू हो रहे दूसरे टेस्ट में यह मुकाम हासिल कर सकते हैं। इस बारे में आमरे ने कहा कि फिलहाल सचिन का ध्यान रिकॉर्ड पर नहीं, बल्कि श्रृंखला पर होगा।

बचपन की यादें ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि आचरेकर सर (तेंडुलकर के बचपन के कोच रमाकांत आचरेकर) का अर्जुन था सचिन। सर उसे हर नाबाद पारी के लिए एक रुपए का सिक्का देते थे और उसका विकेट लेने वाले गेंदबाज को भी एक रुपया मिलता था। सचिन आज भी कहता है कि सर से मिले वह सिक्के उसकी सबसे कीमती धरोहर हैं।

आमरे ने तेंडुलकर के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया, लेकिन जल्दी करियर खत्म होने के कारण वे बाद में मुंबई रणजी टीम के कोच बन गए, जिसके लिए सचिन भी खेलते हैं।

तेंडुलकर की बल्लेबाजी पर गहरी नजर रखने वाले आमरे ने इतने बरस में उनकी शैली में आए बदलावों के बारे में कहा कि दो दशक तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने पर बदलाव आना लाजमी है। उसने अलग-अलग विकेटों के मुताबिक खुद को ढाला है और यही वजह है कि वह दुनियाभर में इतने रन बना सका है।
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