ब्रायन लारा के सर्वाधिक टेस्ट रनों का विश्व रिकॉर्ड तोड़ने से 15 रन दूर सचिन तेंडुलकर पर भले ही भारी दबाव होने की बात की जा रही हो लेकिन उनके बालसखा और पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली का कहना है कि 'तेंडल्या' कभी रिकॉर्ड के लिए नहीं खेलते और न ही उन पर कोई दबाव है।
कांबली ने मुंबई से दिए इंटरव्यू में कहा कि सचिन क्रिकेट के लिए ही जीते हैं। रिकॉर्ड खुद- ब-खुद बन जाते हैं। वे कभी इसके बारे में नहीं सोचते। वे बचपन से ऐसे ही हैं।
शारदाश्रम विद्या मंदिर में तेंडुलकर के साथ पढ़ने और खेलने वाले कांबली ने भी रमाकांत आचरेकर से ही क्रिकेट का ककहरा सीखा है। उन्होंने सचिन के साथ एक स्कूली मैच में 664 रन की रिकॉर्ड नाबाद साझेदारी करके सुर्खियाँ बटोरी थीं।
कांबली ने बताया कि बचपन में वे सचिन को शतक बनाने पर उनका पसंदीदा 'वड़ा पाव' खिलाते थे और लंबे समय तक यह परंपरा जारी रही। अब तो वे 12000 रन पूरे करने जा रहे हैं। मैं उन्हें 12000 वड़ा पाव नहीं भेज सकता, लेकिन मुंबई आने पर शिवाजी पार्क का वड़ा पाव उन्हें जरूर खिलाऊँगा, जो उन्हें बहुत पसंद है।
लारा के 11953 टेस्ट रन के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने से सचिन सिर्फ 15 रन दूर हैं और उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शुक्रवार से मोहाली में शुरू हो रहे दूसरे टेस्ट में वे यह मुकाम पा लेंगे।
भारत के लिए 17 टेस्ट और 104 एक दिवसीय मैच खेल चुके कांबली ने कहा सचिन चाहते तो पहले टेस्ट में ही रिकॉर्ड बना सकते थे, लेकिन उन्होंने टीम हित को प्राथमिकता देकर मैच बचाया। मुझे पूरा यकीन है कि मोहाली में वे रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि शतक बनाएँगे।
बचपन की यादें ताजा करते हुए उन्होंने बताया कि सचिन और वे छक्के लगाकर कॉलोनी के घरों के शीशे तोड़ दिया करते थे और लोग शिकायत लेकर घर पर आते थे।
उन्होंने कहा कि अब सोचकर हँसी आती है। वैसे बचपन में कभी सोचा नहीं था कि एक दिन दुनिया में सबसे ज्यादा रन सचिन के नाम होंगे। उनमें हालाँकि एक अलग तरह का जुनून और रनों की भूख जरूर थी, जो आज 25 साल बाद भी जस की तस है।
कांबली ने कहा कि कई रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके तेंडुलकर में कतई बदलाव नहीं आया है और वे आज भी उतनी ही गर्मजोशी से मिलते हैं। उन्होंने कहा हम एक-दूसरे से हमेशा संपर्क में रहते हैं। सचिन बहुत व्यस्त हैं, लिहाजा पहले की तरह साथ समय नहीं बिता सकते लेकिन जब भी मिलते हैं, घंटों गप्पे मारते हैं। ये बात और है कि चर्चा का विषय सिर्फ क्रिकेट ही होता है।
संन्यास को लेकर लग रही अटकलों से खफा कांबली ने कहा कि सचिन के भीतर अभी दो-तीन साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बाकी हैं। वे 2011 विश्व कप खेल सकते हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप में होना है। उन्होंने अपने करियर में सब कुछ हासिल किया। मैं चाहता हूँ कि वे विश्व कप जीतकर क्रिकेट को अलविदा कहें। |