गौतम गंभीर (68), महेन्द्रसिंह धोनी (67) और सुरेश रैना (54) के अर्धशतकों की मदद से भारत ने श्रीलंका को 6 विकेट से हराकर एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में फाइनल खेलने का हक प्राप्त कर लिया है।
भारत ने जीत के लिए 309 रनों का लक्ष्य 19 गेंद शेष रहते 4 विकेट खोकर ही अर्जित कर डाला। श्रीलंका की टूर्नामेंट में यह पहली हार है। वह पहले ही इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुँच चुका था, लिहाजा इस हार से उसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
भारत की सलामी जोड़ी गौतम गंभीर और वीरेन्द्र सहवाग ने मजबूत शुरुआत देते हुए पहले विकेट के लिए 11.4 ओवर में 92 रन जोड़े। इससे फायदा यह हुआ कि आने वाले बल्लेबाजों पर कोई दबाव नहीं था। सहवाग 42 रन बनाकर पैवेलियन लौटे।
सुरेश रैना और महेन्द्रसिंह धोनी ने कमजोर गेंदों पर दर्शनीय स्ट्रोक खेले और भारतीय स्कोर बोर्ड को गतिमान रखा। गंभीर जब 68 रनों के स्कोर पर थे, तब मुरलीधरन ने उन्हें पगबाधा आउट कर दिया। गंभीर ने अपनी पारी में 11 चौके लगाए।
सुरेश रैना दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से 54 रनों पर सीमा रेखा से सनथ जयसूर्या के सटीक थ्रो पर दूसरा रन चुराने के प्रयास में तीसरे अंपायर द्वारा रन आउट घोषित हुए। भारत का चौथा विकेट कप्तान धोनी के रूप में गिरा। धोनी 67 रनों पर मुरलीधरन की गेंद पर बोल्ड हो गए। तब भारत का स्कोर 38 ओवर में 253 रन था।
बाद में युवराज सिंह और रोहित शर्मा क्रमश: 36 और 22 रन पर नाबाद रहकर भारत को 46.5 ओवर में जीत दिलाने में सफल रहे। श्रीलंका की तरफ से मुथैया मुरलीधरन ने 44 रन देकर 2 विकेट प्राप्त किए।
इससे पूर्व पाकिस्तान के खिलाफ हार से 'करो या मरो' की स्थिति में पहुँचा भारत अपनी पूरी जी-जान लगाने के बावजूद श्रीलंका को आठ विकेट पर 308 रन बनाने से नहीं रोक पाया।
चामरा कापुगेदारा (75), कप्तान महेला जयवर्धने (50) और चामरा सिल्वा (50) के अर्धशतकों के बावजूद भारतीय गेंदबाजों ने बल्लेबाजी के लिए अनुकूल पिच पर श्रीलंकाई बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने अधिकतर समय पारी को नियंत्रण में रखा, लेकिन तीन विकेट पर 217 रन पर पहुँचने के बाद नियमित अंतराल में विकेट गँवाए। अंतिम दस ओवर में उसने 74 रन जोड़े, लेकिन इस बीच उसके चार विकेट गिर चुके थे।
श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने फॉर्म में चल रहे कुमार संगकारा का विकेट चौथे ओवर में ही उस समय गँवा दिया जब स्कोर केवल सात रन था। संगकारा ने ईशांत शर्मा की गेंद पर विकेटकीपर महेंद्रसिंह धोनी को कैच दिया।
सनथ जयसूर्या ने हालाँकि अपना स्वाभाविक खेल दिखाया। जब वह चार रन पर थे तब युवराजसिंह ने मिड ऑफ पर उनका मुश्किल कैच छोड़ा। बाएँ हाथ के इस बल्लेबाज ने ईशांत की गेंद पर धोनी को कैच थमाने से पहले 37 गेंद पर 43 रन बनाए। उनकी पारी में आठ चौके शामिल थे।
अपने करियर का 47वाँ अर्धशतक जमाने वाले जयवर्धने और कापुगेदारा ने तीसरे विकेट के लिए 89 गेंद पर 78 रन जोड़कर श्रीलंका को अच्छी स्थिति में पहुँचाया। इन दोनों ने ढीली गेंदों को सीमा रेखा पार भेजा और किसी तरह का जोखिम नहीं उठाया।
जयवर्धने अर्धशतक पूरा करने के एक गेंद बाद ही आउट हो गए। उन्होंने प्रज्ञान ओझा की गेंद सीमा रेखा पार पहुँचाना चाही, लेकिन वह लांग ऑफ पर खड़े गौतम गंभीर के हाथों में चली गई।
कापुगेदारा ने सिल्वा के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 66 गेंद पर 48 रन की भागीदारी की। इन दोनों युवा खिलाड़ियों ने पूरी आजादी के साथ बल्लेबाजी और विशेषकर ओझा को निशाने पर रखा।
कापुगेदारा ने 55 गेंद पर अपने करियर का पाँचवाँ अर्द्धशतक पूरा किया, जिसमें छह चौके शामिल हैं। श्रीलंका का स्कोर 38वें ओवर में जब तीन विकेट पर 217 रन था, तब प्रवीण कुमार ने उन्हें पगबाधा आउट किया।
इसके पाँच ओवर बाद ही तिलकरत्ने दिलशान (15) ने इरफान पठान की गेंद पुल कर आरपी सिंह को फाइन लेग पर कैच थमाया। सिल्वा 46वें ओवर में अर्धशतक पूरा करने के बाद दूसरा रन लेने के प्रयास में रन आउट हुए।
भारत की तरफ से ईशांत शर्मा ने 55 रन देकर दो विकेट लिए, जबकि इरफान पठान सबसे खर्चीले गेंदबाज साबित हुए। उन्होंने दस ओवर में 80 रन दिए, जिसमें अंतिम ओवर में दिए गए 14 रन भी शामिल थे।
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