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गावस्कर ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया
आईसीसी की क्रिकेट समिति के अध्यक्ष सुनील गावस्कर ने आज पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। आईसीसी ने चंद सप्ताह पहले उनसे (मीडिया से जुड़े) उनके पेशे और आईसीसी के पद में से एक का चयन करने को कहा था।

भारत के पूर्व कप्तान ने अपने फैसले से आईसीसी को अवगत करा दिया है, जिससे उनके आठ साल के कार्यकाल का अंत हो गया। इस कार्यकाल में न सिर्फ उन्होंने कई नए फैसले लिए, बल्कि अपने बेबाक विचारों के लिए विवादों में भी फँसे।

गावस्कर ने मंगलवार को समाप्त हुई क्रिकेट समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद आईसीसी को अपने फैसले से अवगत करा दिया। आईसीसी के कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड रिचर्डसन ने एक बयान में यह जानकारी दी।

गावस्कर ने जून 2000 में वेस्टइंडीज के क्लाइड वॉलकॉट से यह पद संभाला था। उनका कार्यकाल 2006 में एक साल के लिए बढ़ाया गया और 2007 में वह दोबारा इस पद के लिए चुने गए। उनका कार्यकाल अगले साल खत्म होना था। गावस्कर की जगह कौन लेगा, इस बारे में भी कोई फैसला नहीं किया गया है।

गावस्कर ने कहा कि इतना ज्यादा क्रिकेट होने के कारण वह दोनों पदों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा मैंने आठ साल इस पद पर अपने काम का पूरा लुत्फ उठाया। इस मानद पद के जरिये क्रिकेट की सेवा करके मुझे अपार संतुष्टि हुई है।

गावसकर के मुताबिक आजकल इतना ज्यादा क्रिकेट खेला जा रहा है कि मैं दोनों पदों के साथ न्याय नहीं कर पा रहा हूँ। यही कारण है कि मुझे अपने पद से इस्तीफा देना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा मैंने दो साल पहले भी यह मुद्दा उठाया था और कहा था कि मैं यह जिम्मेदारी नहीं संभाल पाऊँगा, लेकिन उस समय मुझे यह पद संभालने के लिए कहा गया क्योंकि मैं दोबारा चुना गया था।

टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाले पहले क्रिकेटर रहे गावस्कर ने कहा अब हालाँकि यह स्पष्ट है कि मैं दोनों भूमिकाएँ नहीं निभा सकता, लिहाजा मैंने आईसीसी की क्रिकेट समिति का अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला किया है। रिचर्डसन ने कहा कि आईसीसी भविष्य में किसी और रूप में गावस्कर के कौशल का इस्तेमाल करने की कोशिश करेगी।

उन्होंने कहा सुनील जैसे खिलाड़ी से जुड़कर खेल को फायदा ही हुआ है। आईसीसी के साथ उनके लंबे रिश्ते को देखते हुए हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में किसी और रूप में उनकी सेवाएँ ली जा सकेंगी।

उन्होंने कहा सुनील ने आईसीसी की क्रिकेट समिति के अध्यक्ष के रूप में जो काम किया, हम उसके ऋणी हैं। सिर्फ अध्यक्ष पद पर उनके आठ साल ही नहीं, बल्कि इससे पहले इसी समिति के सदस्य के रूप में छह साल के उनके कार्यकाल में उन्होंने अपने अपार अनुभव का इस्तेमाल किया।

आईसीसी के आला अधिकारियों को गावस्कर के कुछ कालम नागवार गुजरे थे, जिसमें उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच विवादित सिडनी टेस्ट के बाद मैच रैफरी माइक प्रॉक्टर को आड़े हाथों लिया था।

गावस्कर ने आरोप लगाया था कि प्रॉक्टर ने हरभजनसिंह और एंड्रयू साइमंड्स के बीच नस्लवादी विवाद के दौरान सचिन तेंडुलकर जैसे खिलाड़ी की बात सुनने की बजाय एक श्वेत खिलाड़ी की बात पर सहमति जताई।

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे आईसीसी के सदस्य देशों को डाइनासोर करार देते हुए आरोप लगाया था कि क्रिकेट में भारत के बढ़ते कद को वे पचा नहीं पा रहे हैं।
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