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टेस्ट में रेफरल प्रणाली की सिफारिश
आईसीसी की क्रिकेट समिति ने टेस्ट मैचों में रेफरल प्रणाली और पगबाधा के फैसले के लिए हाक आई तकनीक को लागू करने की सिफारिश की है।

आईसीसी ने समिति की दो दिन की बैठक के बाद बयान में कहा कि हर टीम के लिए प्रत्येक पारी में अधिक से अधिक तीन बार फैसले को (तीसरे अंपायर के लिए) रेफर करने की सीमा होनी चाहिए।

बयान में कहा गया है कि इसके लिए प्रक्रिया इस तरह से होनी चाहिए। मैदानी अंपायर अपना फैसला दे। प्रभावित बल्लेबाज या क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम का कप्तान अंपायर को फैसले की समीक्षा करने के लिए कहे। मैदानी अंपायर और तीसरे अंपायर उस पर सलाह-मशविरा करें। मैदानी अंपायर अपना अंतिम फैसला दे।

पगबाधा फैसलों के लिए हाक आई को लागू करने के बारे में समिति ने सिफारिश की है कि गेंद के वास्तविक पथ का पता लगाने के लिए तीसरे अंपायर को इस तकनीक का उपयोग करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

बयान के अनुसार तीसरा अंपायर हाक आई तकनीक का उपयोग कर सकता है। इसका उपयोग केवल गेंद के बल्लेबाज पर लगने तक की उसकी वास्तविक राह का पता लगाने के लिए ही किया जाना चाहिए।

नए प्रस्तावों को मुख्य कार्यकारियों की समिति (सीईसी) में मंजूरी मिलने के बाद एक टेस्ट श्रृंखला में इन्हें ट्रायल के तौर पर आजमाया जाएगा। इस पर अंतिम फैसला आईसीसी बोर्ड करेगा जिसकी 29 जून को यहाँ बैठक होगी।

क्रिकेट समिति ने ट्वेंटी-20 के उदय पर भी गौर किया और खेल के तीनों प्रारूपों में उचित संतुलन बनाने की जरूरत पर बल दिया। बयान के अनुसार समिति ने सहमति जताई कि खेल के तीनों प्रारूपों में संतुलन बनाने की जरूरत है जिससे तीनों स्वरूपों का बढ़ना जारी रहे।

इसके मुताबिक इसने टेस्ट क्रिकेट को खेल का शीर्ष प्रारूप बताया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध भागीदारों (खिलाड़ियों, अंपायरों, रैफरी आदि) की जरूरत बताई।

बयान के अनुसार सभी टीमों के बीच वनडे ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट मैचों की संख्या के लिए न्यूनतम जरूरत को स्वीकृति देते हुए समिति ने शीर्ष श्रृंखलाओं को बचाने की बात पर जोर दिया।

समिति ने मौजूदा खेल परिस्थितियों में बदलाव का सुझाव दिया और कहा- आईसीसी विश्व ट्वेंटी-20 और आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी के मैचों में 'बॉल आउट' की जगह प्रत्येक टीम के लिए एक एक ओवर का 'प्ले ऑफ' हो।

अन्य सुझावों में समिति ने कहा कि चोटों, बीमारी और अन्य स्वीकार्य कारणों को देखने के बाद ही स्थानापन्न क्षेत्ररक्षकों को मैदान पर बुलाया जाए।
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