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अन्य बल्लों से खेलने की अनुमति नहीं
मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) बल्लेबाजों की ताकत पर रोक लगाने के लिए उन्हें परंपरागत रूप से इस्तेमाल होने वाले रबड़ लकड़ी और गोंद के अलावा अन्य बल्लों से खेलने की अनुमति नहीं देगा।

पिछले कुछ दिनों से ग्रेफाइट टाइटेनियम और कार्बन से बने बल्लों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

'हेराल्ड सन' की रिपोर्ट के अनुसार एमसीसी के कानूनी समिति के प्रमुख जॉन स्टीफेनसन को लगता है कि इस बदलाव से बल्लेबाजों को मिलने वाले फायदे सीमित हो जाएँगे, जो बल्ले से सपाट पिच और शॉर्ट पिच पर गेंदबाजों की धज्जियाँ उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

इन बल्लों के हैंडल चार आउंस (110 ग्राम) हल्के हो सकते हैं क्योंकि बल्ले में इस्तेमाल होने वाले ब्लेड की अनुपस्थिति में इनका वजन कम हो जायेगा। इस हल्के हैंडल से बल्ले की तेजी को बढ़ाने में मदद मिलेगी जबकि इससे शक्ति में भी बढ़ोतरी होगी।

वर्ष 2006 में एमसीसी ने इस बात से इनकार कर दिया था कि बल्ले बनाने वाली कूकाबूरा कंपनी ने रिकी पोंटिंग के बल्ले में बदलाव किए थे क्योंकि इसमें ब्लेड के पीछे की तरह ग्रेफाइट लगा हुआ था।
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