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कैलिस-डिविलियर्स बने सिरदर्द
भारतीय शेर 76 रन पर ढेर
भारतीय क्रिकेट टीम की विख्यात बल्लेबाजी ने तीन टेस्टों की सिरीज के दूसरे टेस्ट के शुरुआती दिन यहाँ की पहली पारी में दक्षिण अफ्रीका की कहर बरपाती गेंदबाजी के आगे घुटने टेक दिए। भारतीय टीम महज 20 ओवरों में 76 रन पर ही सिमट गई। जवाब में पहले दिखेखत्होनसमदक्षिण अफ्रीका ने 64 ओवर में 4 विकेनुकसान पर 223 रन बना लिए थे।

जैक्स कैलिस 60 औडिविलियर्स 59 बनाकक्रीहैंयह दोनों अफ्रीकी बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। अफ्रीका ने 147 रनों की लीड ले ली है और उसके 6 विकेट आउट होना शेष हैं।

भारत के 76 रनों के जवाब में अफ्रीका की शुरुआत अच्छी रही। कप्तान स्मिो 34 रनोनिजस्कोश्रीसंबोल्दिया। अफ्रीका ने दूसरा विकेट नील मैंकेजी (42) का गँवाया। उन्हें हरभजनसिंह ने राहुल द्रविड़ के हाथों कैच आउट करवाया। तीसरे विकेट के रूप में अमला (13) आउट हुए। इस बार भी गेंदबाज हरभजनसिंह ही थे। अमला का कैच वसीम जाफर ने लपका। अफ्रीका 101 रनों के कुल स्कोर पर तीन विकेट खो चुका था।

भारत के मारूफ ऑफ स्पिनर हरभजनसिंह ने दिन का तीसरा विकेट एश्वेल प्रिंस (2) का लिया। भज्जी ने प्रिंस को पगबाधा आउट लेने में कामयाबी हासिल की। इन चार विकेटों के अलावा भारतीय गेंदबाजों को विकेट से कोई मदद नहीं मिली। हरभजन ने 49 रन देकर तीन विकेट हासिल किए जबकि श्रीसथ को 53 रन देने के बाद केवल 1 विकेट मिला।

शुक्रवार की सुबह भारतीय तेज गेंदबाज विकेट की नमी की फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। यदि वे इसमें कायबाम हो जाते हैं तो उम्मीद की नई किरण नजर आएगी। हालाँकि इससे पहले उन्हें कै‍लिस और डिविलियर्स के विकेट लेने होंगे, जो चौथे विकेट के लिए 106 रनों की अविजित साझेदारी निभा चुके हैं। कैलिस ने अपने 60 रनों में 5 चौके और 1 छक्का लगाया है, डिविलियर्स ने 59 रनों की पारी में 7 बार गेंद को सीमा पार भेजा है।

इससे पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुम्बले का हल्के घसियाले विकेट पर टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला गलत साबित हुआ। दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों ने तेज और स्विंग गेंदबाजी का शानदार नमूना पेश करते हुए धुरंधर बल्लेबाजों से सजी भारतीय टीम को ताश के पत्तों की तरह बिखरने पर मजबूर कर दिया।

भारतीय बल्लेबाज दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों के जाल में ऐसा फँसे कि पूरी टीम लंच से पहले ही 20 ओवर में महज 76 रन बनाकर आउट हो गई। इरफान पठान (नाबाद 21 रन) और महेन्द्रसिंह धोनी (14) को छोड़कर भारत का कोई अन्य बल्लेबाज दहाई के अंक तक नहीं पहुँच सका।

दक्षिण अफ्रीका की तरफ से डेल स्टेन ने पाँच, मखाया एंतिनी ने तीन और मोर्न मोर्कल ने दो बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। भारतीय बल्लेबाज अफ्रीकी गेंदबाजों के सामने बेबस नजर आए और ऐसे अजीबोगरीब शॉट खेलकर आउट हुए मानो कोई स्कूल स्तर की टीम खेल रही हो।

इसके पूर्व वीरेन्द्र सहवाग और वसीम जाफर ने भारतीय पारी की शुरुआत की। जाफर (09) ने दो दर्शनीय स्ट्रोक खेले मगर वह 19 रन के कुल स्कोर पर मखाया एंतिनी की एक खूबसूरत गेंद पर पहली स्लिप में अफ्रीकी कप्तान ग्रीम स्मिथ को कैच थमा बैठे। अगले ही ओवर में चेन्नई टेस्ट के त्रिशतकधारी वीरेन्द्र सहवाग महज छह रन बनाकर डेल स्टेन की गेंद पर बोल्ड हो गए।

बल्लेबाजी पंक्ति में प्रोन्नत करके भेजे गए स्टाइलिश बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण (03) एंतिनी की तेजी से अंदर आती गेंद पर गच्चा खा गए और उसे छोड़ने की कोशिश में वह अपनी गिल्लियाँ उड़वा बैठे। अगली ही गेंद पर सौरव गांगुली भी एक तेज गेंद को अपने विकेटों पर मार बैठे। गांगुली अपना खाता भी नहीं खोल सके।

पिछले मैच के एक अन्य शतकवीर राहुल द्रविड़ ने महेन्द्रसिंह धोनी के साथ पाँचवें विकेट के लिए 23 रन जोड़े मगर द्रविड़ (03) के मजबूत किले को स्टेन की एक खूबसूरत आउटस्विंगर ने भेद दिया। स्टेन ने अपनी स्विंग गेंदबाजी से द्रविड़ को खासा परेशान किया और उनकी एक गेंद आखिरकार उनका ऑफ स्टम्प ले उड़ी।

इसके बाद दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों ने महज तीन रन के अंदर भारत के तीन और विकेट लेकर उसकी हालत पतली कर दी। महेन्द्रसिंह धोनी भी सिर्फ 14 रन बनाकर मोर्न मोर्कल की गेंद पर गैर जिम्मेदाराना शॉट खेलकर आउट हो गए।

भारत ने अपने आठ विकेट सिर्फ 56 रन पर ही खो दिए थे। उस समय आशंका उत्पन्न हो गई थी कि कहीं वह इस बार दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1996-97 में एक पारी में बनाए गए सबसे कम 66 के स्कोर से पहले ही न आउट हो जाए। मगर ऑल राउंडर इरफान पठान ने आरपी सिंह (01) के साथ नौवें विकेट के लिए 20 रन जोड़कर ऐसा नहीं होने दिया।

बीसवें ओवर की आखिरी गेंद पर स्टेन ने अपने पाँचवें विकेट के रूप में एस श्रीसंथ को बोल्ड करके भारतीय पारी को 76 रन पर समेट दिया।

इरफान पठान ने भारत की तरफ से सर्वाधिक 21 रन बनाए, जबकि महेन्द्रसिंह धोनी ने 14 रन का योगदान किया। इन दोनों को छोड़कर भारत का कोई भी बल्लेबाज दहाई का आँकड़ा नहीं छू सका।

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