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ब्रैडमैन-लारा की बराबरी पर पहुँचे सहवाग
अदभुत, चमत्कारिक और करिश्माई पारी। 'नजफगढ़ के सुल्तान' वीरेन्द्र सहवाग ने आज वह कर दिखाया, जो भारतीय क्रिकेट इतिहास में अभी तक किसी ने नहीं किया था। उन्होंने भारत का पहला तिहरा शतक बनाया था और अब भारत का दूसरा तिहरा शतक भी उन्हीं के नाम दर्ज हो गया।

सहवाग ने टेस्ट इतिहास में दो-दो तिहरे शतक बनाने के सदी के महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन और वेस्टइंडीज के विश्व रिकॉर्डधारी ब्रायन लारा के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। वह दो तिहरे शतक बनाने वाले टेस्ट इतिहास के तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं।

29 वर्षीय सहवाग ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट के तीसरे दिन यहाँ नाबाद 309 रन बना दिए हैं और अपने 309 रन के सर्वश्रेष्ठ स्कोर की बराबरी कर ली है। सहवाग ने 2004 में मुल्तान में पाकिस्तान के खिलाफ 309 रन बनाए थे। उस उपलब्धि के चार साल बाद जाकर सहवाग ने एक बार फिर तिहरा शतक ठोक डाला।

सहवाग इस समय जिस अंदाज में बल्लेबाजी कर रहें हैं, उससे यह उम्मीद भी बनती दिखाई दे रही है कि वह लारा का टेस्ट इतिहास में सर्वाधिक 400 रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी तोड़ सकते हैं। सहवाग की इस अदभुत पारी की बदौलत भारत ने अपनी पहली पारी में दक्षिण अफ्रीका के 540 रन के जवाब में एक विकेट पर 468 रन का मजबूत स्कोर खड़कर लिया है।

विस्फोटक ओपनर ने इसके साथ ही गेंदों का सामना करने के लिहाज से टेस्ट इतिहास में सबसे तेज तिहरा शतक बनाने का रिकॉर्ड भी बना लिया है। सहवाग ने 278 गेंदों में अपने 300 रन पूरे किए और ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू हेडन का 362 गेंदों में 300 रन बनाने का रिकॉर्ड तोड़ डाला। हेडन ने 2003-04 में पर्थ में जिम्बाब्वे के खिलाफ अपनी 380 रन की पारी में यह रिकॉर्ड बनाया था।

भारतीय बल्लेबाज ने 42 चौके और पाँच छक्के उड़ाते हुए अपना तिहरा शतक पूरा किया। वह तेज गेंदबाज मखाया एंतिनी की गेंद पर एक रन लेकर इस दुर्लभ उपलब्धि पर पहुँच गए।

आठ घंटे की अपनी मैराथन पारी के बाद इस कीर्तिमान को हासिल करने पर नजफगढ़ के सुल्तान ने अपने दोनों हाथ विजयी मुद्रा में आसमान की तरफ उठाकर ईश्वर का धन्यवाद किया और उसके बाद अपने जोड़ीदार राहुल द्रविड़ को गले लगा लिया।

उस समय पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज रहा था जबकि मैदान में दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी और ड्रेसिंग रूम में भारतीय खिलाड़ी तालियाँ बजाते हुए इस योद्धा बल्लेबाज का अभिनंदन कर रहे थे। वास्तव में भारतीय क्रिकेट के लिए यह गौरवमयी क्षण था, जो हमेशा के लिए सुनहरी अक्षरों में दर्ज हो गया।

सहवाग ने अपने 55 वें टेस्ट में यह दुर्लभ उपलब्धि हासिल की है। महान बल्लेबाज ब्रैडमैन ने 52 टेस्टों के अपने शानदार करियर में दो तिहरे शतक बनाए थे, जबकि वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान लारा ने 131 टेस्टों में दो तिहरे शतक बनाए थे।

दिल्ली के इस दिग्गज बल्लेबाज ने नवंबर 2001 में ब्लोमफोटेन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना टेस्ट करियर शुरू किया था और अपने पहले ही टेस्ट में उन्होंने शतक बनाया था। सहवाग के करियर का यह 14वाँ शतक है। दिलचस्प बात है कि इन 14 शतकों में उनके दो तिहरे शतक हैं जबकि ब्रैडमैन के 29 शतकों में दो तिहरे शतक और लारा के 34 शतकों में दो तिहरे शतक हैं।

सहवाग को मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर का 'क्लोन' कहा जाता था जबकि सदी के महान बल्लेबाज ब्रेडमैन सचिन में अपनी छवि देखा करते थे। सचिन आज तक एक तिहरा शतक नहीं बना पाए हैं, जबकि उनके क्लोन सहवाग ने दो तिहरे शतक ठोक डाले हैं।

सहवाग ने अपने पिछले टेस्ट में जनवरी में एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी टेस्ट में भारत के लिए 151 रन मैच बचाने वाली पारी खेली थी। उन्होंने जैसे उसी पारी को आगे बढ़ाते हुए दिखाया कि बेहद आक्रामक होने के बावजूद उनमें लंबी पारी खेलने का दम और धैर्य दोनों मौजूद है। वह आक्रमण भी कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर संयम भी दिखा सकते हैं।

उन्होंने सुबह की शुरुआत 52 रन से की थी और पूरे दिन भर में 257 रन ठोक डाले। उन्होंने लंच और चाय के बीच विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए 118 रन बनाए और अपना दूसरा शतक मात्र 78 गेंदों में ही पूरा कर लिया।

एक वर्ष पहले तक सहवाग अपनी लगातार खराब फॉर्म के कारण जैसे गुमनामी में खोते नजर आ रहे थे, लेकिन भारतीय चयनकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलियाई दौरे के लिए टेस्ट टीम में आश्चर्यजनक रूप से उनका चयन कर उन्हें एक आखिरी मौका दे दिया था। ऑस्ट्रेलिया में ओपनिंग में वसीम जाफर की विफलता के कारण सहवाग को ओपनिंग करने का मौका दिया गया और इस विस्फोटक बल्लेबाज ने इस मौके को अपने हाथ से फिसलने नहीं दिया।

एडिलेड में आखिरी टेस्ट में भारत को पराजय भी मिल सकती थी लेकिन सहवाग ने 151 रन की पारी खेलकर न केवल भारत को बचाया बल्कि अपने करियर को भी नया जीवन दे दिया। आज वह अपना दूसरा तिहरा शतक बनाकर अपने करियर के शिखर पर पहुँच गए हैं और भारतीय टेस्ट इतिहास में उन्होंने अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करवा लिया है।
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