भारत के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट में बनाए अपने दूसरे तिहरे शतक को अपने स्वर्गीय पिता को समर्पित किया है।
अपने इस शतक से बेहद खुश और भावुक नजर आ रहे सहवाग ने तीसरे दिन के खेल के बाद संवाददाताओं से कहा कि मेरे पास इस पारी को बयान करने के लिए शब्द नहीं हैं। मेरी यह पारी मुल्तान में खेली गई पारी से कहीं ज्यादा बेहतर है।
तीसरे दिन के खेल के बाद 309 रन बनाकर क्रीज पर डटे हुए सहवाग ने कहा कि टेस्ट टीम में वापसी करने के बाद मैं खुद को साबित करना चाहता था। मेरे लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण मौका था। मैं अपनी इस पारी को अपने परिवार और अपने स्वर्गीय पिता को समर्पित करता हूँ।
सहवाग ने हालाँकि साथ ही कहा कि वह बेशक काफी तेजी से खेल रहे थे लेकिन उन्होंने विकेट पर टिकने के लिए पूरा धैर्य और एकाग्रता दिखाई। सहवाग ने कहा कि धैर्य और एकाग्रता की वजह से ही मैं इस कीर्तिमान तक पहुँच सका।
उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान में मैंने अपना पहला तिहरा शतक बनाया था, तब मुझमें इतनी धैर्य और एकाग्रता नहीं थी, इसलिए मैं अपनी इस पारी को मुल्तान की पारी से बेहतर मानता हूँ। इसके अलावा मुल्तान की परिस्थितियाँ चेन्नई से ज्यादा बेहतर थी।
उन्होंने कहा कि मैं किसी रिकॉर्ड के पीछे नहीं भागता हूँ और केवल अपने देश के लिए खेलना पसंद करता हूँ। मैं सत्र दर सत्र आगे बढ़ता हूँ। उस समय मेरे जेहन में किसी तरह का रिकॉर्ड तोड़ने की कोई बात नहीं होती। मेरे कप्तान ने मुझसे कहा था कि तुम्हें विकेट पर टिके रहना है और मैंने वही काम किया।
सहवाग ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ गत वर्ष घरेलू सिरीज में उन्हें टीम से हटाए जाने ने उन्हें ज्यादा जोरदार ढँग से वापसी करने के लिए प्रेरणा दी। यह पूछे जाने पर कि क्या वह कल ब्रायन लारा का 400 रन का विश्व रिकॉर्ड तोड़ने की कोशिश करेंगे? उन्होंने कहा कि यदि वह लंच तक खेल जाते हैं तो उन्हें विश्वास है कि वह लारा का रिकॉर्ड तोड़ देंगे।
एक सवाल के जवाब में सहवाग ने कहा कि यदि भारत 150 रन की बढ़त हासिल कर लेता है तो उसके मैच जीतने के अवसर बढ़ जाएँगे। सहवाग ने ब्रेक के दौरान उन्हें लगातार प्रेरित करने के लिए अपने सभी टीम सहयोगियों खासकर युवराज सिंह, इरफान पठान और पीयूष चावला का धन्यवाद किया।
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