अनिल कुंबले को खिलाड़ियों के बीच स्वस्थ शाब्दिक जंग से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन भारत के टेस्ट कप्तान ने कहा कि मैदान पर जो भी हो वह मैदान तक ही सीमित रहे।
भारत के विवादास्पद ऑस्ट्रेलियाई दौरे के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के कप्तानों और पूर्णकालिक सदस्य देशों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को पत्र लिखकर उनसे छींटाकशी से दूर रहने अपील की थी। हालाँकि दक्षिण अफ्रीका के मार्क बाउचर सहित कई खिलाड़ियों का मानना है कि छींटाकशी को खत्म नहीं किया जा सकता।
भारत के दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट से पूर्व बाउचर के बयान पर टिप्पणी करते हुए कुंबले ने भी इस मुद्दे पर लगभग यही रुख अपनाया।
उन्होंने कहा कि जहाँ तक बाउचर की टिप्पणी का सवाल है यह बात सभी जानते हैं। मैदान पर स्वस्थ संघर्ष हमेशा अच्छा होता है। सभी लोग यह समझते हैं कि मैदान पर जो भी हो उसे मैदान तक ही सीमित रहना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया में विवादों से भरी टेस्ट श्रृंखला में टीम की कप्तानी करने वाले कुंबले ने कहा हम सब इतने परिपक्व हैं कि इस बात को समझ सकें। हम इस श्रृंखला में और भविष्य की श्रृंखलाओं में भी इस बात को सुनिश्चित करेंगे।
कुंबले ने हालाँकि इस मुद्दे पर आईसीसी का कोई पत्र मिलने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा- हमें कोई पत्र नहीं मिला। हम सभी इतने क्षमतावान और जिम्मेदार हैं कि समझ सकें कि हमारी सीमा कहाँ तक है। मुझे पूरा भरोसा है कि क्रिकेट सही तरीके से खेला जाएगा।
अधिक खिलाड़ियों के अपनी सीमा से बाहर होने के संदर्भ में कुंबले ने कहा- नहीं मुझे ऐसा नहीं लगता। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए मैच रैफरी है। मौके की गहमागहमी के साथ ऐसा (छींटाकशी) हो जाता लेकिन हमें इस पर आईसीसी के नियमों के मुताबिक चलना होगा। पहले टेस्ट में सात बल्लेबाज उतारेंगे-कुंबले
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