सभ्यजनों के खेल कहे जाने वाले क्रिकेट में नस्लभेद शुरू से ही परेशानी रहा है। मैदान पर बुरे बर्ताव के लिए तो ऑस्ट्रेलियाई टीम बदनाम है साथ ही नस्लभेदी टिप्पणी करने के कारण क्रिकेट इतिहास में प्रतिबंधित होने वाला पहला क्रिकेटर भी ऑस्ट्रेलियाई था।
ऑस्ट्रेलिया के डैरेन लीमेन को पाँच एक दिवसीय मैचों के लिए प्रतिबंधित किया गया था। तब उन्होंने 2002-03 की क्रिकेट श्रृंखला के दौरान श्रीलंकाई टीम पर टिप्पणी की थी।
विपक्षी टीम पर गलत आरोप लगाने में भी ऑस्ट्रेलियाई टीम पारंगत है। क्रिकेट में खेल भावना को बढ़ावा देने की वकालत करने वाले एडम गिलक्रिस्ट का दामन भी साफ नहीं है।
गिलक्रिस्ट ने पाकिस्तानी विकेटकीपर रशीद लतीफ पर 2003 के विश्व कप के दौरान नस्लभेदी टिप्पणी का आरोप लगाया था। लेकिन बाद में लतीफ को सबूतों के आभाव में छोड़ दिया गया था।
कुछ इसी तरह इस बार भारतीय ऑफ स्पिनर हरभजनसिंह पर आरोप लगाए गए और उन्हें तीन टेस्ट मैचों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया।
बकनर यानी स्लो डेथ बकनर को उनके मिलने वाले स्लो डेथ के नाम से जानते हैं। वे वर्ल्ड कप फिफा में रेफरी थे। 1988 के बाद वे फुयबॉल से सेवानिवृत्त हो गए, क्योंकि फिफा ने आयु सीमा घटाकर 45 कर दी थी।
इसके बाद ही उन्होंने क्रिकेट की अंपायरिंग शुरू की। पहली बार उन्होंने एंटीगुआ में 18 मार्च 1989 को भारत वेस्ट इंडीज के बीच अंपायरिंग की थी। विवाद उनके साथ शुरू से ही लगे रहे।
भारत की टीम जब 2003-04 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी, तब भी उन्होंने कई फैसले गलत दिए थे। 2006 में उन्होंने टीवी कंपनियों को इस बात के लिए कोसा कि वे अंपायर की छवि गलत तरीके से पेश करती हैं।
एक बार जब उन्हें पुरस्कृत किया गया था तो उन्होंने यह भी माना था कि उन्होंने एक बार सचिन को गलत आउट दे दिया था।
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