अंडर-17 विश्व कप : इंग्लैंड-स्पेन में होगी खिताबी जंग

कोलकाता| पुनः संशोधित शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017 (15:03 IST)
कोलकाता। यूरोप की 2 टीमें और के बीच शनिवार को यहां होने वाले फीफा अंडर-17 विश्व कप के फाइनल में बेहद दिलचस्प मुकाबला होने की संभावना है जिसमें इस जूनियर फुटबॉल टूर्नामेंट में एक नया विजेता भी सामने आएगा।
यह पहला अवसर है जबकि यूरोप की 2 टीमें फाइनल में एक-दूसरे से भिड़ेंगी। इस दौरान टूर्नामेंट में स्टेडियम में पहुंचने वाले दर्शकों की संख्या का नया रिकॉर्ड बनना भी तय है।

बेहद कड़े और रोमांचक फुटबॉल के 3 सप्ताह के बाद केवल इंग्लैंड और स्पेन ही अब खिताब की दौड़ में बचे हुए हैं और दोनों टीमें 66,000 दर्शकों की क्षमता वाले साल्टलेक स्टेडियम में अपना पहला खिताब जीतने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगी। टूर्नामेंट की 2 सबसे आक्रामक टीमें जब आमने-सामने होंगी तो परीक्षा रक्षापंक्ति की होगी। इंग्लैंड ने अब तक टूर्नामेंट में 18 और स्पेन ने 15 गोल किए हैं।
इंग्लैंड चौथी बार इस टूर्नामेंट में खेल रहा है लेकिन वह पहली बार फाइनल में पहुंचा है जबकि स्पेन इससे पहले 1991, 2003 और 2007 में उपविजेता रहा था। यह मई में क्रोएशिया में यूरोपीय अंडर-17 चैंपियनशिप मैच की पुनरावृत्ति होगी, जब स्पेन ने पेनल्टी शूटआउट में जीत दर्ज की थी। इंग्लैंड अब उसका बदला लेने की कोशिश करेगा।

इंग्लैंड अगर जीत दर्ज करता है तो यह उनकी जूनियर टीमों के लिए शानदार वर्ष होगा, क्योंकि उसकी अंडर-20 टीम ने साल के शुरू में कोरिया में अंडर-20 विश्व कप जीता था जबकि अंडर-19 टीम यूरोपीय चैंपियन थी।
फीफा ने सोई हुई शक्ति को जगाने के लिए दिसंबर 2013 में भारत को अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी सौंपी थी और यहां दर्शकों की संख्या के लिहाज से नया रिकॉर्ड बन गया। अब जबकि 2 मैच (तीसरे स्थान का प्लेऑफ और फाइनल) बचा हुआ है तब दर्शकों का नया रिकॉर्ड बनना तय है।

अब तक खेले गए 50 मैचों में 12,24,027 दर्शक मौजूद रहे और नया रिकॉर्ड बनाने के लिए इन 2 मैचों में केवल 6,949 दर्शकों की जरूरत पड़ेगी। पिछला रिकॉर्ड 1985 में चीन में खेले गए पहले टूर्नामेंट में बना था। तब 12,30,976 दर्शकों ने स्टेडियम में पहुंचकर मैच देखा था।
कोलकाता के दर्शकों का ब्राजील और माली के बीच तीसरे स्थान के मैच के लिए भी बड़ी संख्या में पहुंचने की उम्मीद है और ऐसे में इसके सर्वाधिक दर्शकों वाला फीफा अंडर-17 या अंडर-20 टूर्नामेंट बनना तय है। कोलंबिया में 2011 में खेले गए फीफा अंडर-20 विश्व कप टूर्नामेंट में रिकॉर्ड 13,09,929 दर्शक स्टेडियम में पहुंचे थे और यहां उसका रिकॉर्ड टूटने वाला है।

भारत में खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल का नया रिकॉर्ड भी बन सकता है। इसमें अब तक 50 मैचों में 170 गोल दागे जा चुके हैं और अब वह संयुक्त अरब अमीरात में 2013 में खेले गए टूर्नामेंट के 172 गोल के रिकॉर्ड से केवल 2 गोल पीछे है। अगले 2 मैचों में केवल 3 गोल से यह 2007 में 24 टीम के प्रारूप बनने के बाद सर्वश्रेष्ठ गोल औसत वाला टूर्नामेंट भी बन जाएगा। इससे पहले इसमें 16 टीमें भाग लेती थीं।
अगर फॉर्म की बात करें तो दोनों टीमों में बहुत कम अंतर है। इंग्लैंड थोड़ा मजबूत दावेदार के रूप में शुरुआत करेगा, क्योंकि उसने टूर्नामेंट से पूर्व खिताब के प्रबल दावेदार ब्राजील को हराकर फाइनल में जगह बनाई। उसने अपने 6 मैचों में से 1 को छोड़कर बाकी सभी मैच इसी स्टेडियम में खेले हैं।

इंग्लैंड टूर्नामेंट की एकमात्र अजेय टीम है जबकि स्पेन टूर्नामेंट में अपने शुरुआती मैच में ब्राजील से हार गया था। इंग्लैंड को केवल जापान के खिलाफ संघर्ष करना पड़ा था, जब उसकी टीम प्रीक्वार्टर फाइनल में नियमित समय में जीत दर्ज नहीं कर पाई थी और उसने पेनल्टी शूटआउट में जीत हासिल की थी।
स्पेन और इंग्लैंड अब तक अंडर-17 यूरोपीय चैंपियनशिप के फाइनल में 3 बार भिड़ चुके हैं। स्पेन की टीम ने 2007 में जीत दर्ज की थी जबकि इसके 3 साल बाद इंग्लैंड ने बदला चुकता कर दिया था। स्पेन ने इस साल मई में रोमांचक मुकाबले में फिर से अपने इस प्रतिद्वंद्वी को हराया था।

यूरोपीय फाइनल में इंग्लैंड ने खिताब लगभग अपने नाम कर दिया था लेकिन स्पेन ने इंजुरी टाइम में आखिरी मौके पर गोल करके स्कोर बराबर किया और फिर पेनल्टी शूटआउट में 4-1 से जीत दर्ज की। दोनों टीमें लंबे समय तक गेंद पर कब्जा रखने में माहिर हैं लेकिन अपनी टिक-टिका शैली के लिए मशहूर स्पेन ने निस्संदेह अधिक समय तक गेंद अपने पास रखी है और पूरे टूर्नामेंट में उसने ऐसा खेल दिखाया है।
इंग्लैंड के स्टार स्ट्राइकर रियान ब्रेवस्टर और स्पेन के कप्तान अबेल रूईज के बीच व्यक्तिगत मुकाबला भी देखने को मिलेगा। इन दोनों ने अपने एकल प्रयासों से अपनी टीमों को फाइनल में पहुंचाया। ब्रेवस्टर ने टूर्नामेंट में अपनी दूसरी हैट्रिक बनाकर ब्राजील को खिताब की दौड़ से बाहर किया जबकि माली के खिलाफ सेमीफाइनल में स्पेन की तरफ से रूईज ने 2 गोल दागे। ब्रेवस्टर ने टूर्नामेंट में अब तक 7 जबकि रूईज ने 6 गोल किए हैं और इन दोनों के बीच गोल्डन बूट पुरस्कार के लिए भी मुकाबला होगा।
उम्मीद है कि इंग्लैंड 4-2-3-1 के प्रारूप में खेलेगा जिसमें कर्टिस एंडरसन गोलकीपर की जिम्मेदारी निभाएंगे जबकि कप्तान जोएल लैटिबियुडियर, मार्क गुएही, जोनाथन पैंजो ओर स्टीवन सेसगनन रक्षापंक्ति में उनका साथ देंगे।

कोच स्टीव कूपर उम्मीद है कि टाशन ओकले बूथ और जॉर्ज मैकइचरन को सेंट्रल मिडफील्ड में रखेंगे जबकि कैलम हडसन ओडोई और फिलिप फोडेन दोनों छोर संभालेंगे। मोर्गन गिब्स व्हाइट के सेंटर फॉरवर्ड ब्रेवस्टर के पीछे रहने की संभावना है।
स्पेन के पास एफसी बार्सिलोना और रीयाल मैड्रिड की अकादमियों से जुड़े खिलाड़ी हैं। उन्होंने ब्राजील के खिलाफ 4-3-3 प्रारूप में शुरुआत की थी और फ्रांस के खिलाफ प्री क्वार्टर फाइनल तक वे इसी प्रारूप में खेले थे। कोच सैंटियागो डेनी ने हालांकि बाद में इंग्लैंड की तरह 4-2-3-1 का प्रारूप क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में अपनाया था।

जुआन मिरांडा, ह्यूगो गुलियामान, विक्टर चस्ट और माटेयु जौमी मोरे को कोच डेनी रक्षापंक्ति की जिम्मेदारी सौंपते रहे हैं जबकि सीजर गेलबर्ट, एंटोनियो ब्लांको और मोहम्मद मोकलिस मिडफील्ड संभालेंगे। वे सेंटर फॉरवर्ड रूईज और विंगर सर्जियो गोमेज और फेरान टोरेस की मदद करेंगे। (भाषा)

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