सिंहस्थ महापर्व : बस चलते जाइए यहां कोई डर नहीं है

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-श्रीति राशिनकर
 
सिंहस्थ न केवल मध्यप्रदेश बल्कि संपूर्ण भारत तथा विदेशों में बसे लोगों के लिए भी धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह एक ऐसा आकर्षण बन गया है, जो बच्चों, युवाओं और वृद्धों को अपनी ओर खींच रहा है। उज्जैन की ओर जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा यही है कि बस एक बार इस भूमि को स्पर्श करें, शिप्रा जल का अर्घ्य करें और पवित्र हो जाए।




यहां आने वाला हर व्यक्ति यही सोचकर आता है कि देश के कोने-कोने में बसने वाले साधु-संतों को समीप से देखने का अवसर तो मिलेगा। भला सांसारिक व्यक्ति संतों से मिलने, उन्हें सुनने का समय कहां निकाल पाते हैं। इस भूमि पर चलने वाला व्यक्ति विचार नहीं करता कि उसे अभी कितना चलना और चलने के बाद आने वाली थकान तो शिप्रा के शीतल जल में पैरों को रखने से क्षण में दूर हो जाती है।

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> यहां पर न तपनभरी दोपहरी की चिंता है, न ही रात के अंधेरे की, क्योंकि यहां की सारी व्यवस्थाएं रात में भी दिन का आभास देती हैं। यहां कोई डर नहीं है कि आप अकेले हैं, कहीं खो जाएंगे। वरन् अकेले दिखेंगे तो दो-चार सहानुभूति के स्वर आपको दिलासा देते सुनाई दे जाएंगे। बस चलते जाइए, एक ऐसा अनुशासन नजर आएगा, तो किसी बाहरी तंत्र का न होकर स्वयं का होगा जिसमें आप महसूस करेंगे प्रेम, अपनत्व, संस्कृति और संस्कारों का आदान-प्रदान और सहेजकर रखेंगे इन्हीं बीजों को पुन: अगले 12 वषों तक!


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