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बजट भारी पड़ा शेयर बाजार पर

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-कमल शर्मा
विख्‍यात निवेशक वारेन बफैट का कहना कि बाजार अल्‍प अवधि में वोटिंग मशीन जैसा और लंबी अवधि में वजन मशीन जैसा होता है, भारतीय शेयर बाजार ने आम बजट पर जिस तरह प्रतिक्रिया दी उससे बफैट के शब्‍द सार्थक जान पड़ते हैं। वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने इस साल बजट में जिस तरह शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स को बढ़ाया है, उससे वे हर निवेशक को लंबी अवधि के निवेशक के रूप में देखना चाहते हैं। इस संबंध में संभवत: बफैट ने उन्‍हें प्रभावित किया है।

वित्त वर्ष 2008-09 के आम बजट से यह तो आशा की जा सकती है कि अर्थव्‍यवस्‍था को आगे बढ़ने से रोका नहीं जा रहा है, लेकिन विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के पिछले डेढ़ महीने से चल रहे रवैये में कोई बदलाव शायद ही हो। वित्तमंत्री ने इस साल शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स को 10 से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। साथ ही सिक्‍युरिटीज ट्रांजेक्‍शन टैक्‍स पर आयकर रियायत को रद्द कर दिया है। पहले प्रावधान से निवेशक ज्‍यादा नाराज हैं और लंबी अवधि के निवेश के लिए तैयार हैं। असल में शेयर बाजार को वास्‍तवितक मजबूती लंबी अवधि का निवेश ही देता है।

शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स बढ़ाने से उन्‍हें सबसे ज्‍यादा दिक्‍कत है जो दैनिक कारोबार की उथल-पुथल में लगे हैं। सिक्‍युरिटीज ट्रांजेक्‍शन टैक्‍स पर आयकर रियायत रद्द होने का असर डे ट्रेडर पर होगा। डे ट्रेडर बाजार में लिक्विडिटी के लिए मुख्‍य सोर्स होते हैं। अब तक डे ट्रेडर अपनी आयकर जिम्‍मेदारी के विरुद्ध एसटीटी को एडजेस्‍ट करते थे। लेकिन अब यह सुविधा समाप्‍त होने से उनकी कर जवाबदारी बढ़ेगी और मार्जिन घटेगा।

यूबीएस के इक्विटी और रिसर्च प्रबंध निदेशक संदीप भाटिया का कहना है कि शार्ट टर्म कैपिटल गैन टैक्‍स का बढ़ना शार्ट टर्म के लिए नकारात्‍मक है लेकिन इससे लंबी अवधि के फंडामेंटल्‍स पर कोई असर पड़ने के आसार नहीं लगते।

शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स के असर की विभिन्‍न निवेशकों पर पड़ने वाले असर की बात करें तो विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के लिए इसमें कुछ नहीं है। विदेशी पोर्टफोलियो इनवेस्‍टमेंट पर टैक्‍स की संभावना थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बावजूद इसके बाजार में लिक्विडीटी नहीं है। सिक्‍युरिटीज ट्रांजेक्‍शन टैक्‍स से आयकर रियायत खत्‍म होने से प्रोपाइटरी ट्रेडिंग करने वाले ब्रोकरों पर असर होगा। एसटीटी को अब अन्‍य कटौती योग्‍य खर्च के रुप में गिना जाएगा।

यह बजट हाई नेटवर्थ इंडिविज्‍युअल यानी एचएनआई निवेशकों के लिए अच्‍छा नहीं है। ये निवेशक दूसरे निवेशकों की तुलना में अपने पोर्टफोलियों में खूब उथल-पुथल करते रहते हैं। इनकी कॉस्‍ट ऑफ लेवरेजिंग 18 से 20 फीसदी के बीच है। शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स में हुई बढ़ोतरी से एचएनआई निवेशक हर किसी पब्लिक ऑफर में पैसा नहीं लगाएँगे।

शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स की बढ़ोतरी आईपीओ पंटर्स के कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा। ऐसे पंटर्स हर पब्लिक ऑफर में जल्‍द पैसा कमाने के लिए निवेश करते हैं। लेकिन अब इनके कामकाज पर विपरीत असर होगा।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स के इस सप्‍ताह 18210 से 16705 और निफ्टी के 5392 से 4962 अंक के बीच घूमते रहने की संभावना है। शेयर बाजार के लिए एक नजर में नकारात्‍मक लगने वाला यह बजट मध्‍यम और लंबी अवधि में फायदेमंद साबित होगा और इस साल के आखिर तक बीएसई सेंसेक्‍स 25 हजार के स्‍तर को छू जाएगा।

अधिकतर शेयर ब्रोकरों की राय में इस बजट के हिसाब से मारुति सुजूकी, सिप्‍ला, रैनबक्‍सी, बजाज ऑटो, तमिलनाडु न्‍यूज प्रिंट, हिंदुस्‍तान लीवर, सेसा गोवा, एज्‍यूकॉम्‍प, जीएसके फार्मा, आईटीसी, मोंसैंटो, एवेटिंस फार्मा, भारत इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, भारती एयरटेल, ग्‍लैक्‍सो स्मिथक्लाइन, टेस्‍को, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई के शेयरों में निवेश करना चाहिए।

इस सप्‍ताह फैडरल मोगल गोयट्ज, ईसब इंडिया, नेस्‍ले, बॉश, ग्राइंडवैल नाटर्न, स्‍ट्राइड आर्कोलैब के नतीजों पर नजर रहेगी। जबकि रिलायंस एनर्जी की 5 मार्च को शेयर बॉयबैक के लिए होने वाली बैठक शेयर बाजार के लिए अहम होगी। शेयर बाजार में फ्रंटरनर की भूमिका में महिंद्रा एंड महिंद्रा, आईटीसी, जीएमआर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, एवेटिंस फार्मा रहेंगे। इसके अलावा हिताची होम, जैन इरिगेशन, जेएमसी प्रोजेक्‍ट्स, मधुकॉन प्रोजेक्‍ट, केईआई इंडस्‍ट्रीज, लॉयड इलेक्ट्रिक, कावेरी सीड महाराष्‍ट्र सीमलैस, मैग्‍नम वेंचर्स, अजंता फार्मा के शेयरों पर निवेशक ध्‍यान दे सकते हैं।

• य‍ह लेखक की निजी राय है। किसी भी प्रकार की जोखिम की जवाबदारी वेबदुनिया की नहीं होगी।

न सत्यम्‌, न शिवम्‌, न सुंदरम्‌
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