हाई होप्‍स शेयर बाजार के लिए खतरनाक

कमल शर्मा| Last Updated: बुधवार, 9 जुलाई 2014 (18:19 IST)
भारतीय इस समय उम्‍मीदों का इंतजार कर रहा है जो उसे मौजूदा सरकार दे सकती है। देश अब की ओर बढ़ रहा है एवं मौजूदा यूपीए सरकार सोमवार 16 फरवरी को अंत‍रिम पेश करने जा रही है। इस बजट में उद्योगों और समाज के हर वर्ग के लिए अनेक लाभों की घोषणा होने के पूरे आसार हैं क्‍योंकि कांग्रेस वोट बटोरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहिए।

अमेरिका, यूरोप, एशियाई शेयर बाजार मंदी की लपेट में आकर रिवर्स गीयर में चल रहे हैं। ब्रिटेन और स्‍पेन की हालत बेहद पतली हो चुकी है। आर्सेलर मित्तल, क्रेडिट सुइस, प्‍यूगोट, सुजूकी सहित ढेरों कंपनियाँ अरबों डॉलर के घाटे में आ गई हैं। क्रूड के दम पर पेट्रो डॉलर कमा रहे ओपेक देशों की भी हालत खराब हो रही है। क्रूड के दाम जमीन पर आ जाने से इन देशों की हेकड़ी और शान शौकत ढीली पड़ गई है।

मंदी के इस राक्षस को रोकने के लिए अमेर‍िका में कई राहत पैकेज आ चुके हैं और अब बराक ओबामा ने 789 अरब डॉलर का पैकेज जारी किया है लेकिन नतीजे अच्‍छे नहीं हैं।

भारत में भी अंतरिम बजट के साथ तीसरा राहत पैकेज आ सकता है। औद्योगिक उत्‍पादन दर दो फीसदी नकारात्‍मक, महँगाई दर घटकर 4.39 फीसदी, कर्ज ब्‍याज दरों में कमी के बावजूद औद्योगिक, होम और पर्सनल कर्ज की माँग का ढीली पड़ना, विदेशी कंपनियों के साथ अब देसी कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की संख्‍या में कमी करना, वेतन कटौती, रिटेल से लेकर मॉल तक 60 फीसदी डिस्‍काउंट पर वस्‍तुओं की बिक्री के लटकते बैनर और सकल घरेलू विकास दर के 7.1 फीसदी रहने का अनुमान हमारे लिए आने वाले कठिन दिनों का संकेत है।

  केवल अंतरिम बजट और कुछ सरकारी घोषणाओं के आधार पर शार्ट टर्म तेजी खड़ी की जा रही है ताकि कुछ बड़े संस्‍थागत निवेशक बहती गंगा में हाथ धोकर बाहर निकल जाएँ।      
केवल अंतरिम बजट और कुछ सरकारी घोषणाओं के आधार पर शार्ट टर्म तेजी खड़ी की जा रही है ताकि कुछ बड़े संस्‍थागत निवेशक बहती गंगा में हाथ धोकर बाहर निकल जाएँ। शेयर बाजार में पिछले दिनों अनेक शेयरों में एक दिन में 60 से 100 फीसदी की तेजी लाई गई, जो आम निवेशक को लालची बना सकती है लेकिन निवेशकों को सावधान रहने की जरुरत है क्‍योंकि मंदी का दौर खत्‍म नहीं हुआ है बल्कि आगे मंदी बढ़ने की पूरी-पूरी आशंका है।

  इतिहास में जाएँ तो पता चलता है कि 20 दिसंबर 1989 को जापानी शेयर बाजार का इंडेक्‍स निक्‍केई 38957 के उच्‍च स्‍तर पर था लेकिन आज निक्‍केई 8106 चल रहा है। यानी दो दशक में यह 80 फीसदी गिर चुका है।      
इतिहास में जाएँ तो पता चलता है कि 20 दिसंबर 1989 को जापानी शेयर बाजार का इंडेक्‍स निक्‍केई 38957 के उच्‍च स्‍तर पर था लेकिन आज निक्‍केई 8106 चल रहा है। यानी दो दशक में यह 80 फीसदी गिर चुका है। इससे पहले समान स्‍तर पर यह 1983 में पहुँचा था। जापानी शेयर बाजार के इस संघर्ष से यह आसानी से जाना जा सकता है शेयर बाजार में बढ़त की जो उम्‍मीदें पली हुई हैं वे जरुरी नहीं है कि फलीभूत हो और वह भी अल्‍प समय में। असल में बीयर मार्केट में हाई होप्‍स खड़ी कर बड़ी गिरावट लाई जाती है और यहीं हमारे शेयर बाजार में हो रहा है।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 16 फरवरी से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में 9976 अंक तक जा सकता है। यदि यह 9296 अंक के स्‍तर को तोड़ता है तो यह 8956 अंक तक जा सकता है। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 3056 अंक तक जा सकता है। यदि यह 2846 अंक के स्‍तर को तोड़ता है तो यह 736 तक जा सकता है।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स का अगले सप्‍ताह सपोर्ट स्‍तर 9562, 9401 और 9300 हैं। इसका साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 9724, 9796 और 10192 है। सेंसेक्‍स की परीक्षा 9300 स्‍तर पर होगी और यह नहीं टूटना चाहिए अन्‍यथा बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

जिन निवेशकों ने लांग पोजीशन ले रखी हैं वे 9300 के स्‍टॉप लॉस को ध्‍यान में रखें। सेंसेक्‍स के बढ़कर 10192-10354 आने पर बिकवाली करें। स्‍टॉप लॉस 10945 रखें या इसके बढ़कर 10192 से ऊपर जाने का इंतजार करें। जब यह 10192 के नीचे बंद हो तब 10192 के ऊपर के स्‍तर या 10945 जो भी उच्‍च हो, को स्‍टॉप लॉस मानते हुए बिकवाली करें।

सूरत कमर्शियल कॉर्पोरेशन के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि 16 फरवरी को पेश हो रहे अंतरिम बजट पर सभी की नजर रहेगी हालाँकि, यह लेखानुदान है, फिर भी आम चुनाव को सामने देखते हुए इससे बड़ी उम्‍मीदें हैं, जिससे बाजार तेजी के साथ खुलने की आस है।

इस सप्‍ताह सेंसेक्‍स का बैलेंस अंक 9562 है जबकि पिछले सप्‍ताह सेंसेक्‍स 9634 पर बंद हुआ है जो आरंभिक तौर पर शेयर बाजार में सुधार बने रहने का संकेत देता है। अगले सप्‍ताह सेंसेक्‍स ऊपर में 9725 और नीचे में 9017 रह सकता है।

अरिहंत कैपिटल के हैड टैक्निकल इक्विटी रिसर्च राजेश पालविया का कहना है कि निवेशक लंबी अवधि के लिए पॉवर, मेटल और ऑयल एंड गैस सैक्‍टर के शेयरों में निवेश कर सकते हैं लेकिन बैं‍किंग शेयरों से दूरी रखनी चाहिए। बैंकों ने अभी अपने एनपीए शो नहीं किए हैं और जब आगे चलकर ये आँकड़े सामने आएँगे तो भयानक स्थिति हो सकती है।

इस सप्‍ताह निवेशक क्रिसिल, आईडीएफसी, कंसोलिडेटेड कंसट्रक्‍शन कंसोर्टियम, गुजरात अल्‍कलीज, आरसीएफ, बैंक ऑफ इंडिया, जे एंड के बैंक, एल्‍गी रबर कंपनी, एनटीपीसी, एलएंडटी, सेल, रिलायंस कम्‍युकिनेशन और रिलायंस इंफ्रा पर ध्‍यान दे सकते हैं।

* यह लेखक की निजी राय है। किसी भी प्रकार की जोखिम की जवाबदारी वेबदुनिया की नहीं होगी।