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पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख जेब में हो माया, कैसे होगा यह संभव?

हमारे ऋषि-मुनि कह गए हैं, 'पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख में हो माया।' यदि काया अर्थात शरीर रोगी है तो आप कैसे कमाएंगे। यदि पहले से ही अपार धन है तो वह किसी काम का नहीं। धन से कोई नहीं मिटता है। शरीर और सेहतमंद है तभी तो आप जीवन का आनंद ले सकेंगे। घुमना-फिरना, हंसी-मजाक, पूजा-प्रार्थना, मनोरंजन आदि सभी कार्य अच्छी वाला व्यक्ति ही कर सकता है। अत: इसे समझना जरूरी है।
 
निरोगी काया : यदि आप स्वस्थ हैं तो ही आपका जीवन है। अस्वस्थ काया में जीवन नहीं होता। व्यक्ति 4 कारणों से अस्वस्थ होता है: पहला मौसम-वातावरण से, दूसरा खाने-पीने से, तीसरा चिंता-क्रोध से और चौथा अनिद्रा से। मौसम और वातावरण आपके वश में नहीं, लेकिन घर और वस्त्र हों ऐसे कि वे आपको बचा लें। घर को आप वस्तु अनुसार बनाएं। हवा और सूर्य का प्रकाश भीतर किस दिशा से आना चाहिए, यह तय होना चाहिए ताकि वह आपकी बॉडी पर सकारात्मक प्रभाव डाले।
 
खाना-पीना आपके हाथ में है अत: उत्तम भोजन और उत्तम जल जरूरी है। हर तरह के नशे से दूर रहने की बात भी आप जानते ही होंगे। आहार के साथ उपवास भी जरूरी है। उपवास के लिए विशेष दिन और माह नियुक्त हैं। चिंता और क्रोध करने की भी आदत हो जाती है शराब पीने की तरह। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि नशा करके व्यक्ति चिंता में तो हो ही जाता है और वह चिड़चिड़ा भी हो जाता है। ये दोनों ही आदतें आपके शरीर को जल्द से जल्द बूढ़ा बना देंगी और साथ ही आप अपने परिवार को भी खो देंगे।
 
अब जहां तक चौथे कारण का सवाल है, ऐसे में कहना होगा कि उपरोक्त तीन है तो चौथा हो ही जाएगा। उत्तम नींद संजीवनी दवा के समान होती है। मानसिक द्वंद्व, चिंता, दुख, शोक, अनावश्यक बहस, अनावश्यक विचार आदि सभी से श्वासों की गति अनियंत्रित हो जाती है जिसके चलते नींद उड़ जाती है। इससे मुक्ति का सरल उपाय है प्राणायाम और ध्यान। हालांकि आप और कुछ भी कर सकते हैं।
 
आपने दुनियाभर की किताबें पढ़ी होंगी या घर में रखी होंगी, लेकिन क्या आपके घर में ऐसी किताबें हैं, जो आपको सेहतमंद और चिंत्तामुक्त बने रहने के उपाय बताती हों? जीवनभर आपने स्कूल और कॉलेज में जो पढ़ा है और कठिन मेहनत करके जो कमाया है, वह अस्पताल में जाकर सब व्यर्थ सिद्ध हो जाने वाला है।
 
आपको घर में रखना चाहिए घरेलू नुस्खों की कई किताबें, आयुर्वेद और योग से संबंधित किताबें, सीडी आदि। इसके अलावा सबसे जरूरी वे किताबें है जिनके माध्यम से आपको आपके शरीर और दवाओं का ज्ञान होता हो। आपके शरीर के भीतर के अंग कौन-कौन-से हैं और वे किस तरह कार्य करते हैं और उन्हें कौन-से भोजन और व्यायाम की जरूरत है, यह भी जानना जरूरी है। हालांकि आप फेसबुक पर चलने वाली व्यर्थ की बातें जानने में ज्यादा उत्सुक रहते होंगे?
 
चाहें तो योग करें, पैदल चलें, तैराकी करें या कसरत करें। 24 घंटे में से 1 घंटा शरीर को स्वस्थ रखने के लिए देना चाहिए। जिस शरीर में आपको 70-80 साल रहना है, निश्‍चित ही आप उसके लिए कुछ तो करेंगे। यदि यह नहीं कर पाएं तो कम से कम उसके भीतर कचरा तो मत डालिए।
 
अगले पन्ने पर कैसे हो जेब में माया..
 
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