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दूसरी पारी बंगाली फिल्मों से
लगभग 12 साल पहले सुभाष घई की फिल्म परदेस से फिल्मी सफर की शुरुआत करने वालीं महिमा चौधरी शादी और मातृत्व का सुख उठाने के बाद अब फिल्मों में अपनी दूसरी पारी शुरू करने के लिए तैयार हैं। बंगाल में जन्मीं महिमा इस बार बंगाली फिल्म से ही शुरुआत करना चाहती है

BBC
पहली फिल्म में ही अभिनय का लोहा मनवाने वालीं महिमा ने बीते दो वर्षों से किसी फिल्म में काम नहीं किया है। वे मानती हैं कि फिलहाल उनके पास ज्यादा फिल्में नहीं हैं। उन्हें कुछ प्रस्ताव जरूर मिले हैं, लेकिन अब तक उन्होंने कुछ तय नहीं किया है। वे कहती हैं कि इन दो वर्षों में उन्होंने मातृत्व का सुख उठाया है। बेटी की परवरिश के लिए फिल्मों से दूर रहने के बाद अब वे धीरे-धीरे सक्रिय हो रही हैं। हाल में एक कार्यक्रम के सिलसिले में कोलकाता में उनसे विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई-

बीते दो साल से आप फिल्मों में नजर ही नहीं आईं। इस दौरान अभिनय की कमी नहीं खली?
इस दौरान शादी की। फिर बेटी हुई। बेटी की परवरिश खुद करने के मोह ने मुझे फिल्मों से दूर रखा। मैं असली जीवन में माँ की भूमिका का आनंद उठा रही हूँ। इससे बड़ा सुख कुछ और नहीं हो सकता। मेरी बेटी सिर्फ शाहरुख और धोनी को पहचानती है। किसी पंजाबी को देखते ही वह सिंह इज किंग गाने लगती है।

क्या आपने 'परदेस' जैसी हिट फिल्म के साथ फिल्मी सफर की शुरुआत की कल्पना की थी?
नहीं। सुभाष घई जैसे निर्देशक के साथ पहली फिल्म करना सचमुच किस्मत की बात है। घई साहब ने तीन हजार से ज्यादा आवेदकों में से उस फिल्म के लिए मुझे चुना था। तब तक मैं मॉडलिंग कर रही थी। उस फिल्म में गंगा की भूमिका में मेरे अभिनय की काफी सराहना हुई। मुझे उसके लिए अगले साल कई अवॉर्ड भी मिले।

आपको कैसी भूमिकाएँ पसंद हैं?
मैं खासतौर पर ऐसी भूमिकाएँ पसंद करती हूँ, जिसमें अपनी अभिनय की प्रतिभा दिखाने का मौका मिले। मुझे सहायक भूमिकाओं से भी परहेज नहीं है, इसलिए मैंने ‘दिल क्या करे’ और ‘धड़कन’ जैसी फिल्मों में काम किया। उनमें मेरे अभिनय की काफी सराहना हुई। यह अलग बात है कि इन फिल्मों को परदेस जैसी कामयाबी नहीं मिली।

आपने दो दर्जन से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है। अब पीछे मुड़कर देखने पर कहीं कोई कमी नजर आती है?
मुझे मौका मिले तो मैं उन तमाम भूमिकाओं को दोबारा निभाना चाहूँगी। इसकी वजह यह है कि मुझे पता है कि उनमें और बेहतरी की गुंजाइश है। मैंने हमेशा अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करने की भरसक कोशिश की है।

आपकी पसंदीदा अभिनेत्री?
जूही चावला। मौका मिले तो मैं उनके साथ काम करना चाहूँगी।

अब आगे की योजना क्या है?
मैं बंगाली फिल्मों में काम करना चाहती हूँ। दार्जीलिंग में पली-बढ़ी होने की वजह से बंगाली भाषा मेरे लिए कोई समस्या नहीं है। कहानी और पटकथा ठीक मिले तो सबसे पहले बंगाली फिल्म से ही दोबारा शुरुआत करना चाहती हूँ। कुछ प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन अभी कुछ तय नहीं हुआ है। हाँ, बंगाली फिल्म में काम करना तय है।
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