सलीम रिजवी (न्यूयॉर्क से) न्यूयॉर्क में इन दिनों एक विशेष सांस्कृतिक महोत्सव चल रहा है जिसमें भारत और मुस्लिम देशों के सौ से ज्यादा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। भारत की ओर से भी एक दल पहुँचा हुआ है और हिंदी अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी इस दल में शामिल हैं।इस महोत्सव का मकसद अमेरिका के लोगों में मुस्लिम कला और संस्कृति के जरिए मुसलमानों और इस्लाम के बारे में जानकारी बढ़ाना है। भारत और पाकिस्तान के अलावा विश्व के 23 देशों के बहुत से कलाकार और विद्वान इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं। यह महोत्सव ऐसे समय हो रहा है कि जब पिछले हफ्ते ही अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विश्व भर के मुसलमानों को संबोधित करते हुए अमेरिका और मुसलमानों के बीच एक नए दौर की शुरुआत करने का आह्वान किया है। नाटक, फिल्में, संगीत : इस महोत्सव में कला के साथ-साथ मुस्लिम और गैर-मुस्लिम विद्वान भी विचारों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। पूरे न्यूयॉर्क शहर में अनेक स्थानों पर इस महोत्सव से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दस दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में शहर के विभिन्न हिस्सों में कहीं नाटक और फिल्में तो कहीं अरब देशों का संगीत, सूफी और शास्त्रीय संगीत, कव्वाली और बहुचर्चित डेबका नृत्य भी आयोजित किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है।भारत से इस महोत्सव में शामिल होने के लिए हिंदी फिल्मों के अभिनेता नसीरूद्दीन शाह भी आए हुए हैं। वे एक उर्दू-हिंदी नाटक दास्तानगोई और अमीर हमजा में मुख्य किरदार निभा रहे हैं। इस नाटक को महमूद फारूकी ने लिखा है और इसमें दिल्ली की दास्तानगोई कला को उजागर करने की कोशिश की गई है। साझा प्रस्तुति : नसीरुद्दीन शाह कहते हैं, 'इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए हम चाहते हैं कि अमेरिका में रहने वाले विभिन्न देशों के लोग जो भारत, पाकिस्तान के अलावा इंडोनिशिया और अन्य मुस्लिम देशों से यहाँ आकर रह रहे हैं, उन्हें उनकी संस्कृति की याद दिलाई जाए। हमें उम्मीद है कि हम इसमें कामयाब होंगे क्योंकि हम बड़े जोर शोर से यह कोशिश कर रहे हैं।' यह महोत्सव न्यूयॉर्क स्थित एशिया सोसायटी, ब्रुक्लिन म्यूजिक एकेडेमी और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ डायलॉग की साझा प्रस्तुति है।अमेरिका में इस तरह के महोत्सव के आयोजन का कारण बताते हुए एशिया सोसायटी की अध्यक्ष विशाखा देसाई कहती हैं, 'आजकल जो सबसे बड़ा मसला है वह है पश्चिम और मुस्लिम समाज के बीच तनाव और एक दूसरे के बारे में कम जानकारी। बहुत से गैर-मुस्लिम अमेरिकी लोगों में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े धर्म इस्लाम के बारे में या तो सीमित या गलत जानकारी है।' इस महोत्सव में अफगानिस्तान, मोरोक्को, ट्यूनिशिया, फ्रांस, ब्रिटेन, सेनेगाल और ईरान जैसे विभिन्न देशों के कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। पाकिस्तान की शिल्पकार महविश चिश्ती भी इस महोत्सव में अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं। मेले का भी आयोजन : महोत्सव में एक मेले का भी आयोजन किया गया है जिसमें दुनिया भर के विभिन्न देशों की अलग-अलग संस्कृतियों की भी झलक मिलती है। मेले में करीब 150 दुकानों में तरह-तरह के कपड़ों और आभूषणों के अलावा कला की वस्तुओं और खाने-पीने की चीजो को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय मे सामाजिक विषयों की एक अध्यापिका अनालीसा बुटिच्ची भी अपनी दोस्त जकिया के साथ मेले का आनंद ले रही थीं। उन्होंने कहा, 'ऐसे मेले तो एक हफ़्ता नहीं बल्कि कहीं ज्यादा लंबे समय के लिए लगाए जाने चाहिए जिससे लोगों में मुसलमानों के प्रति जानकारी बढ़े।' विश्व भर के कई देशों से अनेक विद्वान भी इस महोत्सव में चलने वाली बहस में हिस्सा लेने आए हुए हैं। बहस का मुद्दा है-इस्लाम और पश्चिम के बीच संबंध कैसे सुधारे जाएँ? कला और विचारों के जरिए कैसे यह संबंध सुधारे जा सकते हैं इस पर भी बहस हो रही है। |