रंजीता कोथल के ख्वाबों को पंख लग गए हैं। 21 साल की रंजीता एयर अरबिया में लगभग एक लाख रुपए महीना कमा रही हैं। जबलपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले उसके पिता के लिए भी ये बड़ी बात है कि उनकी बेटी इतने कम वक्त में इतना कमा रही है, जबकि वह बीए पास भी नहीं है।
रंजीता की तरह ही मध्यप्रदेश के दूरदराज इलाकों से आईं 30 अन्य लड़कियों के लिए भी आसमान में उड़ान भरना अब बहुत मुश्किल नहीं है जबकि जमीन पर उनके लिए ऊँची जाति वालों की बराबरी करना एक कठिन सपना रहा है। ये सभी लड़कियाँ एयर होस्टेस की ट्रेनिंग ले रही हैं। इस ट्रेनिंग के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सहायता राशि मुहैया कराई है।
17 साल की सोनम मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई से ताल्लुक रखती है। उनके किसान पिता को इस काम के बारे में जरा-सी भी जानकारी नहीं थी। अखबार में सरकार की इस योजना के बारे में पढ़ने के बाद वे इसके बारे में पता लगाने सीधे भोपाल आ गए।
पिछड़े वर्ग की मनीषा करयाम कहती है, 'पहले तो मेरे माता-पिता इसके खिलाफ थे, पर अब वे खुश हैं।' यह पूछे जाने पर कि आखिर ऐसी क्या बात थी जिसने उनकी सोच में ये बदलाव लाया। वे कहती है, 'अब मैं अच्छी अँगरेजी बोलती हूँ, इससे वे खुश हैं।'
मध्यप्रदेश के विमानन विभाग में उपसचिव एसएस कुमरे बताते हैं कि प्रदेश सरकार हर लड़की के लिए एक लाख रुपए दे रही है। हम चाहते हैं कि आदिवासी और पिछ़ड़े वर्ग की लड़कियाँ मुख्यधारा में आएँ। बारहवीं पास करने के बाद बहुत सी लड़कियों के पास कोई काम नहीं है और उन्हें इसके बारे में बहुत कम जानकारी है।
सामाजिक दायित्व : मध्यप्रदेश सरकार के साथ काम कर रही एयर होस्टेस की ट्रेनिंग देने वाली संस्था फ्रेंकफिन के संचालक अरुण गुप्ता कहते हैं कि हमने सामाजिक दायित्व और एक चुनौती के तौर पर इस काम को करने के लिए प्रदेश सरकार से करार किया है।
इन लड़कियों को ट्रेनिंग देने वाली रितु सिंह कहती हैं कि इन लड़कियों को दूसरी लड़कियों के साथ मिलने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं आई है। वे मानती हैं, 'कुछ दिक्कतें हैं जैसे अँगरेजी और सामान्य ज्ञान की। लेकिन ये सब वे चीजें हैं जो सिखाई जा सकती हैं।'
ईशा भी अब कतर एयरवेज में नौकरी कर रही है और वह आठ लाख रुपए सालाना कमा रही है। मंडला की आदिवासी सुप्रिया धुर्वे कहती हैं कि उनका आत्मविश्वास इसी बात से बढ़ जाता है कि वे एयर होस्टेस की ट्रेनिंग प्राप्त कर रही हैं।
वे कहती हैं, 'मैंने हिन्दी माध्यम से पढ़ाई की है और मुझे इस बात का नहीं पता कि एयर होस्टेस को क्या-क्या करना होता है। आज मैंने लोगों को ड्रिंक्स देने के बारे में सीखा है।'
लेकिन क्या यहाँ ट्रेनिंग ले रहीं सभी लड़कियों को नौकरी मिल रही है? अरुण गुप्ता कहते हैं, 'इस क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं। ये जरूरी नहीं है कि हर किसी को एयर होस्टेस की नौकरी ही मिले पर हाँ होटल या ग्राउंड स्टाफ के तौर पर भी इन्हें नौकरी मिल रही है।'
प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से आने वाली इन लड़कियों को अब हर चीज मिल रही है, जिसके ख्वाब इन्होंने देखे होंगे, मतलब ग्लैमर, शोहरत और पैसा।
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