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जब पहली बार शाहरुख से मिली थीं जूही...
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वंदना, बीबीसी संवाददाता, लंदन, सोमवार, 5 मई 2008( 21:54 IST )
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यूँ तो किसी का स्वागत करने के कई तरीके होते हैं, लेकिन कोई आपका स्वागत प्यारी-सी मुस्कराहट से करे तो बात ही दूसरी होती है। और ये मुस्कराहट अगर जूही चावला जैसी अभिनेत्री की हो तो कहना ही क्या। अपनी चुलबुली, हमेशा मुस्कराती रहने वाली फिल्मी छवि के बिलकुल करीब हैं जूही।
हाल ही में जूही चावला लंदन में बीबीसी स्टूडियो आईं और विशेष बातचीत की। बातचीत के दौरान एक बार भी मुस्कान उनके चेहरे से गायब नहीं हुई। नई फिल्म भूतनाथ, 'राजू बन गया जेंटलमैन' के सैट पर शाहरुख से पहली मुलाकात, आमिर खान से दोस्ती और आईपीएल, हर सवाल के जवाब बेबाकी से दिया जूही चावला ने और अपना गाना भी सुनाया।
पेश है बातचीत के मुख्य अंश :-
लोग कहते हैं कि जूही से कभी भी मिलिए, कहीं भी मिलिए सुबह-शाम, दिन-रात आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कराहट बनी रहती है। कैसे बनाए रखती हैं इस मुस्कुराहट को। कभी गुस्सा नहीं आता आपको? पहले तो शुक्रिया मुझे बीबीसी पर बुलाने के लिए। जब मैं लोगों के साथ होती हूँ तो जरूर बहुत हँसमुख लगती हूँ, लेकिन आप प्लीज ये सवाल मेरे पति जय से करिए। वो आपको असल तस्वीर बता देंगे कि जब मैं घर पर होती हूँ या उनके साथ होती हूँ तो कैसे बात करती हूँ। जय से पूछेंगी तो काफी अलग तस्वीर मिलेगी आपको।
आप, आपके पति जय और शाहरुख मिलकर आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स का काम देख रहे हैं। कैसे मैनेज कर रहे हैं आप लोग? मैं तो मैनेज बहुत कम कर रही हूँ। ज्यादातर मैनेजमेंट तो शाहरुख का रहा है, एडमिनिस्ट्रेशन में थोड़ी बहुत मदद मेरे पति जय करते हैं। प्रायोजकों को जुटाना, मार्केटिंग, लोगो का डिजाइन, प्रोमो बनाना- शाहरुख ने दिन रात इसमें मेहनत की है।
आईपीएल शुरू होने से पहले किसी को भी ये नहीं पता था कि लोगों की प्रतिक्रिया क्या होगी। आईपीएल सबके लिए एक नया तजुर्बा है- खेल के लिए, लोगों के लिए और निवेशकों के लिए। अब तक तो सब अच्छा ही है।
शाहरुख से आपकी दोस्ती पुरानी है। 1992 में आपने राजू बन गया जेंटलमैन में उनके साथ पहली बार काम किया था। उनका शुरुआती दौर था, जबकि आप स्टार बन चुकी थीं। दोस्ती के इस सफर को कैसे देखती हैं। किस तरह बदले हैं वो इस दौरान?
| | अब 20 साल गुजर गए हैं। सब कुछ एक सपना-सा लगता है। उतार-चढ़ाव, हिट-फ्लॉप, रोना-धोना सब कुछ हुआ इस बीस साल में। कभी-कभी लगता था कि पता नहीं यहाँ रहूँगी या नहीं। एक साल बाद क्या होने वाला है नहीं पता था |
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बहुत पुराना सफर याद दिला दिया आपने। तब शाहरुख नए-नए थे, मैंने भी चार-पाँच फिल्में ही की थीं। मैं तो अपने आपको कोई स्टार नहीं समझती थी, शाहरुख शायद समझते हों।
ये मेरा पसंदीदा किस्सा है- जब राजू बन गया जेंटलमैन शुरू हुई तो निर्माता ने बताया कि फिल्म में नया लड़का है शाहरुख, बिलकुल आमिर खान जैसे हैं। मैंने उनका सीरियल फौजी नहीं देखा था। सोचा आमिर खान जैसे हैं तो अच्छे ही होंगे-गुड लुकिंग।
जब पहली बार सेट पर गई तो देखा कि दुबले-पतले से, आईब्रोज तक काले-काले बाल वाले हीरो हैं। मन में सोचा ये कौन है। लेकिन जब फिल्म शुरू हो गई तो पता चला कि वे कितने अच्छे कलाकार हैं। लगा ही नहीं कि किसी नए अभिनेता के साथ काम कर रही हूँ।
रिहर्सल करते थे, बहुत ऊर्जावान थे जैसे आज भी हैं, तब तो इससे भी दोगुनी ऊर्जा थी। कई वर्षों तक तो वे यूनिट का ही खाना खाते थे, उनके साथ। बाद में भी वे कभी स्टार की तरह पेश नहीं आते थे भले ही उनकी फिल्में सुपर-डुपर हिट हो गई थीं। शायद यही उनकी महानता है।
भूतनाथ आपकी नई फिल्म है। फिल्म में एक तरफ अमिताभ बच्चन हैं, जो इंडस्ट्री के वरिष्ठ कलाकारों में से एक हैं और दूसरी तरफ़ नन्हे से अमन सिद्दीकी जो आपके बेटे बने हैं- काफी कॉन्ट्रास्ट है। दोनों के साथ करने में मजा आया? जब निर्देशक विवेक शर्मा ने मुझे बताया कि फिल्म में भूत का रोल अमितजी करने वाले हैं तो मैं तो उछल ही पड़ी। ये तो सोने पर सुहागा था। फिल्म देखकर आपको लगेगा कि उनसे बेहतर भूत का रोल कोई कर ही नहीं सकता था।
पहली बार मैंने फिल्म 'एक रिश्ता' में अमिताभ बच्चनजी के साथ काम किया था। तब मैं बहुत डरी हुई थी। उनके साथ खड़े होकर कुछ बोलना था- मतलब अंदर से प्रार्थना करना शुरू कर देती थी कि शॉट के अंदर कहीं कोई गलती न हो वरना अमितजी सोचेंगे कि इसे इतना भी नहीं आता।
भूतनाथ में उनके साथ बहुत मजा आया। बहुत अदब से पेश आते हैं वो। दूसरी तरफ ये आठ साल का बच्चा है अमन। सेट पर क्रिकेट खेलता रहता था, कुछ भी करता रहता था, फिल्म की लाइन वो घर से याद करके आता था। मैं उससे पूछती थी कि भइया सुबह तुम स्कूल चले जाते हो, दोपहर को सेट पर आते, काम करते हो, फिर दस बजे वापस जाते हो...थकते नहीं। स्कूल का काम कैसे करते हो? तो बोलता है कि क्लास में फर्स्ट आता हूँ। मैं तो चक्कर में पड़ गई।
सेट्स पर आम तौर पर उसे पता रहता था कि क्या करना है। आता था, शॉट देता था और निकल जाता था। मुझे भी थोड़ा वक्त लगता है काम समझने में लेकिन ये बच्चा सब कर लेता था, तो काफी रोचक रहा उसके साथ काम करना।
भूतनाथ की शूटिंग कई महीनों तक चली। इस दौरान कहीं आप भी भूत-वूत से डरने तो नहीं लगी? जब रोशनी हो और आसपास लोग हों तो ये सब बातें झूठ ही लगती हैं, लेकिन आप अकेले हों, सन्नाटा हो और लाइट गुल हो जाए तो छोटी-सी आवाज भी आपको डरा देती है। अगर रात को मैं घर पर अकेली हूँ, तो मुझे कभी-कभी डर लगता है...मैं तो लाइट-वाइट ऑन करके ही सोती हूँ।
अपनी एक्टिंग से तो आपने बेशुमार फैन्स बनाए हैं, अब लगता है आप अपनी आवाज से नए फैन्स बनाने जा रही हैं। भूतनाथ में आपने गाना भी गाया है। वो अनुभव कैसा रहा, स्टूडियो में माइक्रोफोन के पीछे? मैं गाना सीख रही हूँ, लेकिन क्लास में और बात होती है- बस गुरुजी होते हैं या एक दो जन और होते हैं। जब सीखना शुरू किया था तो मुझे लगा था कि बस छह महीने में सिंगर बन जाऊँगी। अरे साढ़े चार साल हो गए हैं...सुर क्या होता है, कहाँ गलत गा रही हूँ ये अब जाकर समझ में आने लगा है।
एक दिन निर्देशक विवेक शर्मा ने कहा कि तुम बड़ा गाना-वाना गाती हो चलो जरा फिल्म में खुद के लिए गाओ। मैं भी काफी उत्साहित हो गई। मैं गई स्टूडियो में लेकिन वहाँ का माहौल अलग ही होता है। जैसे आपका स्टूडियो है- स्टूडियो निर्देशक आप लोगों को निर्देश देते रहते हैं। वैसे ही रिकॉर्डिंग के वक्त भी म्यूजिक डाइरेक्टर कान में कुछ-कुछ बोल रहे थे।
आप अकेले ठंडे स्टूडियो में खड़े होकर गाना गाने की कोशिश कर रहे होते हैं। मुझे वो समय याद आया जब पहले-पहले एक्टिंग करने आई थी। घर में आइने के सामने तो खूब एक्टिंग कर सकते हैं, लेकिन जब कैमरे के सामने खड़े होते हैं तो दिमाग़ से सब उड़ जाता है। पहली बार गाने का अनुभव भी वैसा ही था।
भूतनाथ के निर्देशक विवेक ने बातचीत में बताया कि अमिताभजी ने काफी जोर डाला था कि आपसे गाना गवाया जाए। आपने फिल्म में उनके साथ गाना गाया है? गाना गाने के बाद मेरे मन में यही बात आई थी कि मैं और अच्छा कर सकती थी। पहली बार कोई काम करो तो ऐसा ही लगता है। लेकिन हाँ, ये जरूर है कि कई सारी अभिनेत्रियाँ कह सकती हैं कि उन्होंने अमितजी के साथ एक्टिंग की है लेकिन शायद ये नहीं कह सकतीं कि अमिताभ ने गाना गाया और मैंने साथ में गाया। वैसे ये गाना हमने अलग-अलग रिकॉर्ड करवाया था। उनकी रिकॉर्डिंग पहले हो गई थी।
आपने पहले आमिर खान का जिक्र किया था। 'कयामत से कयामत तक' आप दोनों की सुपरहिट फिल्म थी। उसके बाद भी कई हिट फिल्में आईं। आपकी जोड़ी को बहुत पसंद किया गया, लेकिन अचानक आपकी एक साथ फिल्में आना बंद हो गईं? आखिरी बार हम लोगों ने 'इश्क' में काम किया था। उसी दौरान दोनों के बीच छोटी-सी अनबन हो गई। दोनों ने झगड़ा कर लिया- मैंने ही कर लिया और वो भी रूठ गए। किसी भी ने आगे हाथ नहीं बढ़ाया। उसके बाद से आमिर ने शायद दो साल में एक फिल्म ही की होगी और मैं उन भूमिकाओं में फिट नहीं होती थी।
खैर, अब दोनों के बीच सुलह-सफाई हो गई है, हम फोन पर बात भी करते हैं। मैंने कई बार सुना है कि जब आमिर से कोई पूछता है कि बेहतरीन अभिनेत्रियाँ कौन-सी हैं तो वे मेरा नाम जरूर लेते हैं। मुझे बहुत अच्छा लगता है। मुझे यकीन है कि अगर मौका आएगा तो हम साथ में कोई फिल्म जरूर करेंगे।
1988 में आई थी कयामत से कमायत तक। मतलब करीब 20 साल से आप बनीं हुई है फिल्म इंडस्ट्री में। जब शुरुआत की थी तो कभी सोचा था कि 20 साल बाद भी आप काम करती रहेंगी, लोग आपको पहचानेंगे? बिलकुल नहीं। 20 दिन का ठिकाना नहीं था। अब 20 साल गुजर गए हैं। सब कुछ एक सपना-सा लगता है। उतार-चढ़ाव, हिट-फ्लॉप, रोना-धोना सब कुछ हुआ इस बीस साल में। कभी-कभी लगता था कि पता नहीं यहाँ रहूँगी या नहीं। एक साल बाद क्या होने वाला है नहीं पता था।
कहीं न कहीं ये भी लगता था कि लड़की हूँ- शादी भी करनी है, सैटल होना है पर काम न निकले हाथ से। असुरक्षा की भावना भी होती थी। बाहर से लोगों को सब कुछ अच्छा ही लगता है, लेकिन इतना आसान भी नहीं होता।
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