मुख्य पृष्ठ > सामयिक > बीबीसी हिंदी > बीबीसी समाचार
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
अमिताभ से कोई विवाद नहीं-शत्रुघ्न
BBCBBC
शत्रुघ्न सिन्हा का बोलना ही चर्चा बन जाता है। वे खुद भी मानते हैं कि वे तो समाजसेवा करने राजनीति में आए थे, लेकिन विवाद उनका पीछा ही नही छोड़ते। मोहन सहगल की फिल्म 'साजन' से बतौर खलनायक अपने अभिनय की यात्रा शुरू करने वाले अभिनेता और अब राजनीति से जुड़े शत्रु ने राजनीति से थोड़ी दूरी बना ली है।

अब फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने टीवी पर भी नई शुरुआत की है। स्टार वन के लोकप्रिय शो द ग्रेट लाफ्टर चैलेंज में वे न केवल इस बार शेखर सुमन की जगह जज की भूमिका में हैं।

पिछले दिनों आईफा अवार्ड और क्रिकेट पर उनकी टिप्पणी ने काफी सुर्ख़ियाँ बटोरी थीं और अमिताभ बच्चन ने भी उनका जवाब दिया। उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश:-

क्या टीवी पर शुरुआत करने का फैसला सही है और वो भी एक कॉमेडी शो में?
मैं हमेशा से कॉमेडी करना चाहता था और मैंने इसके लिए नरम-गरम, दोस्त और हाल में अपने प्रोडक्शन की 'मेरा दिल लेके देखो' जैसे फिल्मों में काम किया। जहाँ तक टीवी के बात है तो जब हमारे सिनेमा के सबसे बड़े सितारे भी टीवी पर काम कर रहे हैं तो मैं क्यों नही कर सकता।

बड़े सितारे से आपका मतलब बिग बी से है तो आप उनसे हमेशा से ही जुड़े रहे हैं, उनकी फिल्मों से भी और उनके साथ नए-पुराने विवादों से भी?
नही, मेरा उनके साथ कोई विवाद नही। मैं उनका बहुत सम्मान करता हूँ। यह सही बात है कि वे मुझसे उम्र में बड़े और फिल्मों के मामले में छोटे हैं।

पर मुझे जो बात सही लगती है मैं केवल वही बात करता हूँ। मैंने कभी कोई ऐसी बात किसी के बारे में नहीं कही, जो किसी को चोट पहुँचाएँ। मैं आज भी किसी को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं मानता। सब अपना-अपना काम कर रहे हैं।

लेकिन पिछले दिनों मीडिया में बिग बी और क्रिकेट पर आपका जो बयान आया, वो चौंकाने वाला है?
  मेरी बेटी सोनाक्षी के लिए कई प्रस्ताव हैं पर मैं चाहता हूँ कि उसकी शुरुआत दीपिका पादुकोण की तरह हो।      
नहीं, लोगों को ऐसा लगता हैं। मैं जब पटना से पूना अभिनय के लिए गया था तब भी लोग चौंके थे कि गाल पर निशान वाला आदमी कैसे हीरो बन सकता है पर मैंने किया और आज भी मैं ऐसी चुनौतियों से नहीं डरता।

आपको लगता है चुनौतियाँ आपके साथ हमेशा बनी रहती हैं चाहे फिल्म करियर हो या राजनीति?
शायद। चेहरे पर निशान के कारण मेरी शुरुआत बतौर खलनायक हुई और राजनीति में आने पर लोगों ने कहा फिल्मी लोग राजनीति में शौक के लिए आते हैं। मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि मैं लोगों की उम्मीदों पर खरा रहूँ।

आपने जब फिल्मों में मधुर भंडारकर की फिल्म 'आन' की तो आपने अक्षय कुमार के सहायक की तरह की भूमिका क्यों की? जबकि आप ही वे अभिनेता भी हैं जो सत्तर के दशक में अगर जंजीर और दीवार जैसी फिल्में नहीं छोड़ते तो बिग बी कभी इतने बड़े स्टार नहीं बनते?
मैं ऐसा नहीं मानता। हर आदमी अपनी किस्मत और मेहनत से बड़ा स्टार बनता है। आप यह भी तो कह सकते हैं कि अगर मैं कालीचरण और विश्वनाथ जैसी फिल्में नहीं करता तो सुभाष घई इतने बड़े निर्देशक नहीं बनते।

पर आप यह तो मानेंगे कि आप ही इंडस्ट्री के पहले एंग्री यंगमैन हैं और उस वक्त सुपर स्टार की दौड़ में आप, विनोद खन्ना और बिग बी ही थे पर बाजी उनके हाथ लगी। आपके साथ ऐसा क्यों होता है?
यह तो सब ऊपरवाले का खेल है। मैं बहुत सकारात्मक सोच वाला इनसान हूँ। मैं कभी नकारात्मक रूप से नहीं सोचता। बच्चन साहब के बेटे की शादी में मेरे मिठाई लौटाने और इस बार आईफा अवार्ड को लेकर मैंने जो कुछ कहा उसे लोगों ने तोड़-मरोड़कर पेश किया।

क्रिकेट पर मैंने चीयर गर्ल्स को लेकर सिर्फ उनके पहनावे पर बात की थी पर उसे मेरे क्रिकेट के विरोध से जोड़कर देखा गया। जोधा अकबर के समय मैं और बिग एक साथ एक ही समारोह में थे। मेरी उनकी मुलाकात तेजीजी के निधन के बाद नहीं हुई थी। यह सामान्य-सी बात है कि जब दो लोग मिलते हैं तो अच्छा लगता है।

आपने अपने करियर में जो फिल्में की उनमें खलनायक से नायक बनना कितना चुनौती भरा था?
यह संयोग है कि मेरी शुरुआत खलनायकी से हुई, लेकिन उसके बाद मैंने आदमी सड़क का, खान दोस्त, दोस्त, दो ठग, ब्लैकमेल, नौकर, क्रांति, शरारा, शान, काला पत्थर, गाय और गौरी, कश्मकश और खुदगर्ज जैसी जो फिल्में की उनमें आज तक लोगों को मेरा काम और संवाद याद है।

बतौर खलनायक आपकी कौन-सी फिल्मों के चरित्रों को आप बेहतर मानते हैं?
निश्चित रूप से मेरे अपने का छैनू, खिलौना का बिहारी, चेतना का रमेश और ब्लैकमेल का जीवन- ऐसे किरदार थे, जो खुद मुझे भी परेशान करते थे। लोग उनके पर्दे पर आने पर तालियाँ तो बजाते थे पर गलियाँ भी देते थे।

यह सही है कि आपको शोले का गब्बर और जय वाला रोल करने का प्रस्ताव दिया गया था?
ये बीती बातें हैं। ऐसी बहुत-सी फिल्में और भूमिकाएँ हैं जो किसी के लिए लिखी गईं और किसी और ने की, लेकिन बाद में वे यादगार बन गईं।

परिवार को लेकर क्या सोचते हैं? आपकी और आपकी पत्नी पूनम की फिल्मों में वापसी हुई है और आपके बेटे और बेटी भी अब बड़े हो गए हैं?
हाँ, मुझे खुशी होती है। हालाँकि मेरी वापसी तो राकेश रोशन की खुदगर्ज से ही हो गई थी। पूनम जब मिस इंडिया बनी थीं तो उन्होंने कोमल नाम से मेरे, जितेंद्र और जॉय मुखर्जी के साथ कुछ फिल्मों में काम किया था। फिर वो घर में व्यस्त हो गईं।

अब जोधा-अकबर में उनका काम देखकर खुशी हुई। मेरे दोनों बेटे लव और कुश में से कुश राज कँवर की फिल्म से शुरुआत कर रहे हैं और लव निर्देशन करना चाहते हैं। मेरी बेटी सोनाक्षी के लिए कई प्रस्ताव हैं पर मैं चाहता हूँ कि उसकी शुरुआत दीपिका पादुकोण की तरह हो।

आज के बदले हुए भारतीय सिनेमा के बारे में क्या सोचते हैं?
जहाँ से हमने शुरू किया था वहाँ तब कुछ ही फिल्में और फिल्मकार थे जो दुनिया भर में जाने जाते थे। लेकिन अब भारतीय सिनेमा दुनिया भर का सबसे बड़ा ऐसा सिनेमा भी है, जो अपने कंटेंट, संगीत और प्रगति के आधार पर सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाले सिनेमा के रूप में जाना जाता है।

अंत में एक बड़ा सवाल। आप अपने शो में जिन सिद्धूजी के साथ जज हैं, उनके बारे बारे में कहा जाता है कि उनके अधिक बोलने के कारण शेखर सुमन ने शो छोड़ दिया?
हम दोनों एक ही पार्टी के हैं अगर वे ज्यादा बोलेंगे तो मैं अपने अंदाज में उन्हें खामोश कर दूँगा।
और भी
चिली में बूढ़े लोगों को मुफ्त वियाग्रा
डटकर खाओ और दुबले रहो!
दस साल बाद लुप्त हो जाएँगे गिद्ध
खिल उठे मेरा भी चमन...
...तो ज्यादा रुपए कमा रहा होता
'मैं खुद को वेश्या नहीं समझती'