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डटकर खाओ और दुबले रहो!
ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने वजन कम करने की एक ऐसी तकनीक खोज निकाली है जिससे खाने-पीने में कटौती करने की जरूरत नहीं होगी।

शोधकर्ताओं का कहना है कि चूहों पर किए गए प्रयोग में उन्होंने पाया कि मोटापे के लिए जिम्मेदार कोशिकाओं में फेरबदल करके मेटाबॉलिज्म यानी चयापचय को तेज किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि एक विशेष एंजाइम को हटा देने या निष्क्रिय से चूहे ने उतना ही खाना खाया जितना दूसरे चूहों ने खाया लेकिन उसके वजन में अपेक्षाकृत कम ब़ढ़ोतरी हुई। उम्मीद की जा रही है कि इस पद्घति से वजन कम करने की दवा विकसित करने में सहायता मिलेगी और इससे मधुमेह यानी डायबिटीज से निपटने में भी सहयोग मिलेगा।

शोध : वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन चूहों में एंजाइम को हटाया गया उनका वजन दूसरे चूहों से 20 प्रतिशत कम था और उनके शरीर में मोटापे के तत्व 60 प्रतिशत तक कम थे। मेटाबॉलिज्म तेज होने के कारण उनमें डायबिटीज होने की आशंका भी कम हो गई क्योंकि उनके शारीरिक तंत्र ने शरीर में मौजूद शर्करा को ज्यादा तेजी से विघटित कर लिया।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह एंजाइम मनुष्यों में भी पाया जाता है और इसको निष्क्रिय करके उच्च रक्तचाप से भी निपटा जाता है। उनका दावा है कि इस शोध के आधार पर वजन कम करने की दवा विकसित की जा सकेगी लेकिन सवाल यह है कि जो प्रयोग चूहों पर किए गए हैं क्या वे मनुष्यों पर भी कारगर होंगे?

इस मुद्दे पर 'वेट कंसर्न' संस्था के मेडिकल निदेशक डॉक्टर इयान कैंपबेल का कहना है कि यह शोध दिलचस्प तो है लेकिन इसका प्रयोग अभी सिर्फ चूहों पर किया गया है। उनका कहना है कि एंजाइम को निष्क्रिय करके या उसका विन्यास बदलकर उच्च रक्तचाप से तो निपटा जा सकता है लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि इस दवा की खुराक ब़ढ़ाकर मनुष्यों का वजन कम किया जा सकता है।

हालाँकि यह दवा सुरक्षित है लेकिन इसका एक नुकसान यह हो सकता है कि गुर्दा यानी किडनी खराब होने लगे। डॉक्टर कैंपबेल का कहना है- 'लगता नहीं कि यह संभव होगा कि कोई ज्यादा खाए और फिर भी उसका वजन न बढ़े।' उनका कहना है- 'जो सबूत उपलब्ध हैं उससे साफ है कि अच्छे भोजन और नियमित व्यायाम का कोई विकल्प नहीं है चाहे आप वजन कम करने की दवा लें या न लें।'
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