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लोगों के लिए है वापसी-स्मृति
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करीब दो महीने पहले एकता कपूर के साथ उनके लोकप्रिय शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में न लौटने का दावा करने वाली स्मृति ईरानी अचानक न केवल अपने पुराने शो में लौटीं बल्कि तुलसी के लिबास में वे उदयपुर के मशहूर श्रीनाथजी के दर्शन करने भी एकता के साथ ही पहुँची।

उनकी इस यात्रा में हम भी शामिल थे। दर्शन के बाद उनसे होने वाली बातचीत में उन्हें खँगालने की कोशिश करने पर उन्होंने अपने जीवन, करियर, नई योजनाओं और अपने और एकता के बीच के विवादों के बारे में बहुत ही डिप्लोमेटिक जवाब दिए-

आपने हमसे कहा था कि आपके 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' की तुलसी की भूमिका में वापस लौटने का सवाल ही नहीं उठता, फिर अचानक वापसी..., क्या एकता से सुलह हो गई?
मैं लोगों के लिए लौटी हूँ। एकता के साथ मेरी कभी लड़ाई नहीं हुई थी। मैं अपने प्रोडक्शन में व्यस्त थी इसलिए 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' छोड़ दिया था। अब फुरसत मिली तो वापस आ गई।

फ़ुरसत और वह भी तब जब आप अपने कई शो और फिल्म निर्माण में भी लगी हैं। तो इस गठबंधन की क्या जरूरत है, क्या पैसे के लिए?
नहीं, ईश्वर ने मुझे पैसा और प्रसिद्धि खूब दी है। आप कह सकते हैं कि कई बार दोस्ती में जो गलतफहमियाँ हो जाती हैं वे अब नहीं हैं। यह मेरी वापसी का एकदम सही समय है।

सही मानें, चुनाव आ रहे हैं और आपने अपनी वापसी राजस्थान के उदयपुर से की। क्या यह चुनावों को ध्यान में रखकर की गई वापसी है?
नहीं, मैं अपने ही घर में सेंध नहीं लगा सकती। उदयपुर में किरण माहेश्वरीजी पहले से ही हैं। मैं उदयपुर में केवल श्रीनाथजी के लिए पहुँची। यदि ऐसी बात होती तो मैं गुजरात जाती। तुलसी गुजराती महिला है। इस मामले में मैं निर्णय की स्थिति में नहीं हूँ।

लेकिन यह तो कहा जा सकता है कि आपकी वापसी एकता की घटती लोकप्रियता और शो की गिरी टीआरपी से जुड़ी है और आपकी वापसी शो को बचाने का अंतिम रास्ता है?
एकता और मैं दोस्त हैं और दोस्ती के लिए कुछ भी किया जा सकता है। मैं जानती हूँ कि एकता ने मेरे लिए क्या किया है।

लेकिन आप यदि एकता के साथ काम कर रही हैं तो आपके शो के अक्षर 'क' से क्यों शुरू नहीं होते?
बालाजी मेरे परिवार का हिस्सा है इसलिए जब मेरी उनके साथ काम करने की योजना बनी तभी एकता ने कहा था कि स्मृति ये शो तुम्हारे हैं तुम इन्हें जैसे चाहे बनाओ। लेकिन यह एक स्तर तक का करार था उसके बाद हमने अलग-अलग काम किया।

आपके सभी शो में मुख्य किरदारों में तुलसी की ही छाया दिखाई देती है?
वे सब समाज के ऐसे किरदार हैं जो भारतीय समाज में स्त्री के साहस और उसकी अस्मिता को दिखाते हैं। तुलसी, वसुधा, उमा और शारदा सब हमारे रिश्तों में नए विस्तारों के प्रतीक हैं। उनकी मुहिम आसान नहीं।

आपके शो इसीलिए कहानी कम और किसी मुहिम का हिस्सा ज्यादा लगते हैं?
अगर ऐसा है तो ये उन शो की सफलता है। मैं हैरान हूँ कि तुलसी आज साठ साल की उम्र में भी नायिका है।

पहले ऐसा नहीं था। मैंने जब अपना शो 'कुछ दिल से' किया तब मैं छह माह की गर्भवती थी। तब मुझे लगता था कि एक गर्भवती महिला किसी शो की एंकर कैसे हो सकती है पर मैंने कर लिया।

आप एक चैनल के शो में अपनी प्रतिद्बंद्बी मानी जाने वाली बहू पार्वती यानी साक्षी तँवर के साथ एंकर भी हैं, ये कैसे किया?
साक्षी मुझसे बेहतर अभिनेत्री और एंकर हैं। (हँसती हैं)

आप तुलसी को जब स्क्रीन पर देखती हैं तो कैसा लगता है?
मैं उसे खुद कम देख पाई। उस समय मैं बारह से चौदह घंटे काम करती थी। बच्चों और घर के साथ काम में व्यस्त रहती थी इसकी अहमियत मुझे पहले ही दिन समझ में आ गई थी।

बीजेपी और राजनीति की आपके लिए कितनी अहमियत है?
इसका जवाब आसान है। मेरे नानाजी जनसंघ से जुड़े थे। मेरी माँ भी इसका हिस्सा हैं और मेरे पिता की विचारधारा भी यही है। यह मेरे परिवार का हिस्सा है। मैंने पाँच साल पहले संगठन में उपाध्यक्ष की कमान संभाली थी और अब भी वहाँ हूँ। बाकी भूमिका पार्टी तय करेगी।

और थियेटर की भूमिका?
वह मैंने बहुत ज्यादा नहीं किया लेकिन अपनी कंपनी ‘उर्ग्या’ के साथ कुछ समय पहले मैंने गुजराती नाटक ‘मणि बेन डॉट कॉम’ और एक कॉमेडी नाटक किया था।

फिल्मों और भारतीय सिनेमा के बारे में क्या सोचती हैं?
मैं अपनी फिल्म बनाने के बारे में तो सोचती हूँ पर भारतीय सिनेमा के बारे में बात करने के लिए मैं बहुत छोटी हूँ।

आपके शो 'सखुबाई' को लेकर चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि वह मराठी के नाटक 'गंगू बाई नॉन मैट्रिक' की नकल है और इसीलिए रेणुका शहाणे ने आपका यह शो करने के लिए मना कर दिया?
ऐसा कुछ नहीं है, जब कुछ होगा तो बात करेंगे।

आप यदि स्मृति नहीं होतीं तो क्या होतीं, आख़िर आप अब आम महिला नहीं हैं?
नहीं जानती। आदमी कभी भी अपनी मर्जी से कुछ नहीं होता पर मैं इतना जानती हूँ कि फिर भी मैं स्मृति मल्होत्रा जरूर होती। (हँसती हैं)
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