भारत में एक लेबर कोर्ट ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को आदेश दिया है कि वह एक अमेरिकी पत्रकार को 50 लाख रुपए का मुआवजा दे।
लेबर कोर्ट ने कहा कि पत्रकार लॉरिंडा कीज के ऊपर भारतीय श्रम कानून लागू होते हैं क्योंकि एपी का दफ्तर भारत में स्थित है, जिसमें लॉरिंडा काम करती थीं। लॉरिंडा को 2004 में नौकरी से निकाल दिया गया था, लॉरिंडा का कहना था कि उन्हें अकारण नौकरी से हटाया गया, 2005 में वे श्रम अदालत की शरण में गईं।
जानकारों का कहना है कि इसे फैसले को कानून के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है क्योंकि इससे विदेशी कंपनियों में काम करने वाले लोगों के मामलों पर सीधा असर पड़ेगा।
लॉरिंडा का कहना था कि उन्हें बिना कारण नौकरी से निकाल दिया गया, कहा गया कि उनका पद ख़त्म किया जा रहा है लेकिन बाद में उसी पद का विज्ञापन प्रकाशित करके किसी और को नौकरी पर रख लिया गया।
समाचार एजेंसी की दलील थी कि एपी एक अमेरिकी कंपनी है, इसलिए उस पर अमेरिकी कानून ही लागू होते हैं इसलिए उसके फैसले को भारत में कानूनी चुनौती नहीं दी जा सकती।
एपी का कहना है कि लॉरिंडा को नौकरी से हटाने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी और उन्हें उनके अनुबंध की शर्तों के हिसाब से हटाया गया था।
अपने फ़ैसले में सहायक श्रम आयुक्त एवी प्रेमनाथ ने लॉरिंडा को 35 लाख रुपए का मुआवजा देने का फैसला सुनाया है और एपी को आदेश दिया कि वह 12.5 प्रतिशत सालाना की दर से इस पर ब्याज भी दे।
लॉरिंडा कीज के वकील ने इस फैसले को क्रांतिकारी बताया है, और कहा है कि इसका असर विदेशी कंपनियों और उनके कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ेगा।
लॉरिंडा 28 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और तीस देशों से समाचार एजेंसी के लिए रिपोर्टिंग कर चुकी हैं।
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