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40 हजार मौलवियों को दोबारा प्रशिक्षण
मगदी अब्देल हादी, बीबीसी के अरब मामलों के विशेषज्ञ
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सऊदी अरब में उग्र इस्लाम का प्रभाव घटाने के लिए 40 हजार मौलवियों को फिर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। उग्र इस्लाम के प्रचार-प्रसार के मुकाबले मौलवियों को दोबारा प्रशिक्षित कर उतारने की इस योजना का की जानकारी प्रभावशाली सऊदी अखबार 'अल-शर्क अल-ऑसात' ने दी है।

यह योजना उस व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसे सऊदी अरब के शाह ने वहाँ के समाज में सहनशीलता और उदारता को बढ़ावा देने के लिए कुछ साल पहले शुरू किया था। अखबार का कहना है कि मोलवियों को प्रशिक्षण देने का काम धार्मिक मामलों का मंत्रालय और 'न्यू सेंटर फॉर नेशनल डॉयलॉग' मिलकर देखेंगे।

सऊदी अरब की सरकार ने इस्लामी परंपरा की उदार व्याख्या के प्रचार-प्रसार के लिए पाँच साल पहले इस केंद्र की शुरुआत की थी। वहाँ समाज में यह बात अब शिद्दत से महसूस की जा रही है कि उग्र इस्लाम का मुकाबला करने के लिए सिर्फ सुरक्षा उपाय काफ़ी नहीं हैं।

आशंकाएँ : सउदी अरब के मौलवियों पर लंबे समय से वहाँ के नौजवानों को अंतरराष्ट्रीय जेहाद में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने और गैर-मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगता रहा है। पिछले कुछ सालों के दौरान करीब एक हजार मौलवियों को ऐसे ही आरोपों के कारण उनके पदों से हटाया जा चुका है।

सऊदी अरब के शाही घराने पर धार्मिक पाठ्यपुस्तकों में बदलाव करने और उग्र इस्लाम का प्रचार करने वाले मौलवियों पर लगाम लगाने का दबाव बढ़ गया है। लेकिन आलोचकों को संदेह है कि इस तरह की पहल का बहुत दिन तक असर रहेगा क्योंकि सउदी अरब में कट्टर दकियानूसी धार्मिक संस्थानों का समाज पर बहुत ज्यदा प्रभाव है।

पिछले सप्ताह ही एक प्रमुख मौलवी ने उन दो उदार लेखकों का सिर धड़ से अलग करने का आदेश जारी किया था, जिन्होंने इस अवधारणा पर सवाल उठाए थे कि मुसलमान धर्म परिवर्तन नहीं कर सकते।
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