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चीटियाँ भी धोखेबाज और स्वार्थी होती हैं
चींटियाँ भी हम इंसानों की तरह स्वार्थी, भ्रष्ट और धोखेबाज होती हैं। जी हाँ, ये बिल्कुल सच है। एक नई रिसर्च में ये बात खुलकर सामने आई है।

BBC
आज तक हम चींटियों के बारे में सिर्फ ये जानते आए हैं कि चींटियाँ एक-साथ मिल-जुलकर काम करती हैं और ये अपने आपको पूरे समाज के हित के लिए कुर्बान कर देती हैं।

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में छपी रिसर्च के मुताबिक चींटियों के स्वार्थी और भ्रष्ट होने के पीछे की वजह राजवंश या शाही वंश जिम्मेदार है।

वैज्ञानिकों ने पत्तियाँ कुतरने वाली चींटियों की पाँच कॉलोनियों पर डीएनए फिंगर प्रिंटिंग की मदद से एक अध्ययन किया।

वैज्ञानिकों का कहना है कि नर चींटी अपने शाही 'जीन' को अपनी आने वाली नस्ल को दे देता है ताकि उनमें से कुछ चींटियाँ अंडे देने वाली रानी चींटी बन सके। इस तरह से वो काम करने वाली चींटियों से अलग होगी और उसका काम ‍िसर्फ अंडे देना होगा।

वैज्ञानिकों के अनुसार चींटियों का कौन सा अंडा या 'लार्वा' रानी चींटी बनेगा ये इस बात पर निर्भर करता है कि उसका पिता कौन है।

क्या हैं कारण ?
इस रिपोर्ट के आने के पहले तक वैज्ञानिक चींटियों के समाज को लोकतंत्र और सामाजिक सहयोग का एक आदर्श मॉडल मानते आए थे।

इससे पहले वैज्ञानिकों का सोचना था कि रानी चींटी को तैयार करने के लिए चींटियाँ अंडों को कुछ खास तरह का भोजन देती होंगी।

लेकिन इस नई खोज से ये बात साबित होती है कि चींटियों में भी इस तरह से रानी चींटियों को बाकी चींटियों से ज्यादा रुतबा हासिल हो जाता है।

लीड्स विश्वविद्यालय से जुड़े इस रिसर्च के प्रमुख डॉक्टर बिल ह्यूज्स का कहना है, 'चींटियों में एकता नजर आने की वजह उनकी समतावादी प्रणाली है। लेकिन हमें शोध से पता चला है कि कुछ नर चींटियाँ इसमें धोखा करती हैं। ये सब कुछ उनमें शाही वंश के होने की वजह से होता है।'

इन कॉलोनियों पर किए गए शोध में वैज्ञानिकों को एक हैरान कर देने वाली बात भी पता चली है। वैज्ञानिकों के अनुसार हर कॉलोनी में ये शाही वंश बहुत कम देखा गया है और इसकी वजह ये है कि ये नर चींटी बड़ी चालाकी से अपने शुक्राणुओं को अलग-अलग कॉलोनियों में फैला देता है।

जिससे कॉलोनियों में पल रही इस शाही चींटी का पता ही नहीं चल पाता। इस तरह से ये शाही नर चींटी भी आगे अपने वंश को इसी तरह आगे बढ़ाता रहता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि, बहुत सारी रानी चींटियाँ हो जाने पर चींटियों के पूरे समुदाय में असंतुलन पैदा हो जाएगा। इससे काम करने वाली चींटियाँ भ्रम में पड़ जाएँगी कि वो किसके लिए काम कर रही हैं।

चींटियों और मधुमक्खियों पर शोध कर रहे डॉक्टर ह्यूज्स का कहना है, 'सरसरी तौर पर देखने से तो चींटियों के समाज में एक सामजिक सहयोग ही दिखाई देता है। लेकिन यदि आप काफी गौर से देखें तो पता चलेगा कि इनमें भी लड़ाई और धोखेबाज़ी होती रहती है। बिल्कुल हम इंसानों के समाज की तरह।'

डॉक्टर ह्यूज कहते हैं, 'पहले हम चींटियों के समुदाय को एक आदर्श समाज मानते थे। लेकिन हमारे शोध से साबित हो गया है कि चींटियों में भी भ्रष्टाचार फैला हुआ है, जिसकी वजह शाही वंश का होना है।'
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