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एक चौथाई अमेरिकी लड़कियों को यौनरोग!
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एक अध्ययन से संकेत मिले हैं कि अमेरिका में हर चार में से एक लड़की यौनरोग से पीड़ित है। अमेरिका के 'सेंटर्स फॉर हिसीज कंट्रोल' (सीडीसी) के इस अध्ययन में कहा गया है कि यौनजनित रोगों से पीड़ित अश्वेत युवतियाँ की संख्या इससे भी अधिक है।

इस अध्ययन में देश भर से 14 से 19 साल की 838 लड़कियों की जाँच का विश्लेषण किया गया है। इसमें गर्भाशय के कैंसर के लिए जिम्मेदार वायरस 'एचपीवी' के मामले सबसे अधिक पाए गए। इसके बाद क्लैमिडिया, ट्राइकोमोनियासिस और हर्पीस रोगों के मामले मिले हैं।

सीडीसी का कहना है कि यह अपने तरह का पहला अध्ययन है और इसमें कहा गया है कि यौनजनित रोगों का शिकार नवयुवतियाँ अधिक होती हैं।

अध्ययन में पाया गया कि लगभग आधी अफ्रीकन-अमेरिकी लड़कियाँ कम से कम एक यौनजनित रोग से पीड़ित हैं जबकि श्वेत और मैक्सिकन-अमेरिकी लड़कियों में इसका प्रतिशत 20 के करीब पाया गया। अध्ययन में पाया गया है कि लगभग 18 प्रतिशत लड़कियाँ एचपीवी का शिकार हैं।

गंभीर मामला : सीडीसी के डेविड फेंटन का कहना है कि यह एक गंभीर मसला है क्योंकि इन रोगों की वजह से लड़कियों में बाँझपन और गर्भाशय के कैंसर की समस्या हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यौन संबंध बनाने वाली लड़कियों की नियमित जाँच, टीके और बचाव के दूसरे उपाय हमारी सबसे बड़ी स्वास्थ्य प्राथमिकता है।

सीडीसी ने कहा है कि क्लैमिडिया के लिए यौन-सक्रिय 25 वर्ष से कम आयु की सभी युवतियों की नियमित जाँच होनी चाहिए जबकि एचपीवी से बचाव के लिए 11-12 वर्ष की आयु में लड़कियों को टीके लगवाए जाने चाहिए और बाद में एक बूस्टर टीका भी लगवाना चाहिए।

सीडीसी के यौनरोग विभाग के प्रमुख जॉन डगलस का कहना है कि लड़कियाँ इन रोगों की जाँच नहीं करवाती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनको कोई खतरा ही नहीं है।

विश्लेषकों का कहना है कि डॉक्टर भी अक्सर इन रोगों की जाँच नहीं करते क्योंकि इसके नतीजे अभिभावकों को बताने होंगे और इससे मरीज की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।
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