- उमेश चतुर्वेदी क्या आप उम्मीद कर सकते हैं कि किसी मुल्क में पोर्न उद्योग को बचाने के लिए खुलेआम माँग उठे। सुनने में यह आश्चर्यजनक भले ही लग रहा हो,लेकिन अमेरिका में ऐसी माँग उठने लगी है। दरअसल एशियाई मुल्कों में सेक्स और इससे जुड़ा पोर्न उद्योग भले ही ढँके-छुपे चलता हो, लेकिन योरपीय और अमेरिकी समाज के लिए सेक्स और नैतिकता कोई दबी-छुपी बात नहीं है-लिहाजा यहाँ पोर्न साहित्य और सेक्स से जुड़ी चीजों के व्यापार ने भी बाकायदा एक उद्योग की शक्ल अख्तियार कर ली है।यही वजह है कि अब इस उद्योग को बचाने के लिए अमेरिका में माँग भी उठने लगी है। | | पोर्न उद्योग का तर्क है कि जब इतना भारी भरकम पैकेज बैंकिंग, बीमा और ऑटोमोबाइल उद्योग को देने के लिए मंजूर किया जा सकता है तो उसे बचाने के लिए पैकेज क्यों नहीं दिया जा सकता है। वैसे भी अमेरिका में पोर्न उद्योग कोई छोटा-मोटा उद्योग नहीं है |
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अमेरिका की मशहूर पोर्न मैग्जीन 'हसलर' के मालिक लैरी फ्लिंट और टीवी पर प्रसारित किए जाने वाले मशहूर पोर्न कार्यक्रम 'गर्ल्स गॉन वाइल्ड' के प्रोड्यूसर जो फ्रांसिस पिछले महीने एक साथ प्रेस के सम्मुख अवतरित हुए। उन्होंने अमेरिकी सरकार से माँग की कि अमेरिका के पोर्न उद्योग को मंदी से बचाने के लिए पाँच अरब डॉलर की सहायता दी जानी चाहिए।वैश्विक मंदी का सामना कर रहा अमेरिकी समाज इन दिनों तरह-तरह की चिंताओं से परेशान है। मंदी ने आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अमेरिकी समाज के सामने ढेरों चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। इनके बीच एक और परेशानी से अमेरिकी समाज दो-चार हो रहा है। जाहिर तौर पर ये चिंताएँ बेहद निजी और पारिवारिक हैं।चूँकि अमेरिकी समाज बेहद खुला है, लिहाजा ये निजी चिंताएँ भी इन दिनों मीडिया में चर्चा और बहस का विषय बनी हुई हैं। ऐसी ही चिंताओं में से एक है अमेरिकी लोगों की सेक्स लाइफ की समस्या। मंदी का अमेरिकी लोगों की सेक्स लाइफ पर क्या असर पड़ रहा है, इसे लेकर भी इन दिनों वहाँ अध्ययनों और निष्क र्षों की बाढ़ आई हुई है। अमेरिकी मीडिया इन दिनों ऐसे अध्ययन रिपोर्टों से भरा पड़ा है।ऐसा नहीं है कि सबको यही चिंता सता रही हो कि मंदी के चलते अमेरिकी लोगों की सेक्स लाइफ कम हो रही है या होगी। अभी हाल ही में एक अध्ययन रिपोर्ट अमेरिकी अखबारों में छपी। इसे भारत के भी कुछ बड़े अखबारों ने प्रकाशित किया। अमेरिका के कुछ जाने-माने नेतृत्वशास्त्रियों ने वर्ष 2009 को 'सेक्स वर्ष' घोषित किया है। उनका मानना है कि मंदी के चलते जीवन में आई नीरसता से बचने के लिए अमेरिकी लोग इस साल अपने बेडरूम का सहारा लेंगे।अगर ऐसा ही रहता है तो अमेरिकी लोगों को कम से कम अपने इस बेहद निजी मसले पर चिंतित होने और सरकार को भी परेशान होने की कोई वजह नहीं होनी चाहिए थी। लैरी फ्लिंट और जो फ्रांसिस की माँग के बाद अमेरिकी सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि इस माँग से सरकार परेशान जरूर है।अमेरिका में यूँ तो मंदी की छाया पिछले साल जुलाई में ही दिखने लगी थी। लेकिन सितंबर में जब लीमैन ब्रदर्स ने खुद को दिवालिया घोषित किया तो मंदी की ये मार सतह पर आ गई। इसके साथ ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था के डाँवाडोल होने की खबरें तेज हो गईं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की तर्ज पर विकसित हो रही दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाएँ भी इस मंदी की मार से बच नहीं सकी। भारत के शेयर बाजार, प्रॉपर्टी और ऑटोमोबाइल उद्योग की भी हालत छुपी नहीं है। इस पर काफी कुछ लिखा और पढ़ा जा रहा है।चुनावी साल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने अक्टूबर में 700 अरब डॉलर के पैकेज का ऐलान किया था। इसे तीन अक्टूबर को सीनेट की मंजूरी भी मिल गई। चुनाव हो गए, नए राष्ट्रपति ने कार्यभार भी संभाल लिया। पैकेज का ऐलान हुए चार महीने होने जा रहे हैं लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी तक पटरी पर लौटती नहीं दिख रही है।वैसे अमेरिका में मंदी का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग, बीमा और ऑटोमोबाइल उद्योग | | लैरी फ्लिंट ने जो तर्क दिया, वह भी गजब का है। उन्होंने कहा कि मंदी के दौर में जिस तरह ऑटोमोबाइल की खरीद-बिक्री कम हो गई है, कुछ वैसे ही आम अमेरिकियों की यौनेच्छा भी कम हो गई है |
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पर पड़ा है और 700 अरब डॉलर का ये पैकेज भी इन्हीं उद्योगों के लिए घोषित किया गया है। इसके बावजूद ऑटोमोबाइल उद्योग खुद के लिए अलग से 25 अरब डॉलर के पैकेज की माँग भी कर रहा है। इसके लिए पिछले साल सीनेट की समिति के सामने ऑटोमोबाइल उद्योग के प्रतिनिधियों ने माँग पत्र पेश भी किया। जॉर्ज बुश जाते-जाते 350 अरब डॉलर का पैकेज देना चाहते थे। हालाँकि सीनेट ने इसे मंजूर नहीं किया और जॉर्ज बुश का ये सपना अधूरा ही रह गया।बहरहाल पोर्न उद्योग का तर्क है कि जब इतना भारी भरकम पैकेज बैंकिंग, बीमा और ऑटोमोबाइल उद्योग को देने के लिए मंजूर किया जा सकता है तो उसे बचाने के लिए पैकेज क्यों नहीं दिया जा सकता है। वैसे भी अमेरिका में पोर्न उद्योग कोई छोटा-मोटा उद्योग नहीं है। इसका सालाना टर्नओवर करीब 13 अरब डॉलर है। इससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। भारतीय उपमहाद्वीप और अरब देशों में भले ही यह तर्क अटपटा लगे।लेकिन अमेरिकी पोर्न उद्योग का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य को बचाए रखने के लिए इस उद्योग को भी बचाना जरूरी है। लैरी फ्लिंट ने जो तर्क दिया, वह भी गजब का है। उन्होंने कहा कि मंदी के दौर में जिस तरह ऑटोमोबाइल की खरीद-बिक्री कम हो गई है, कुछ वैसे ही आम अमेरिकियों की यौनेच्छा भी कम हो गई है। फ्लिंट का कहना है कि भले ही मोटर गाड़ियाँ न खरीदी जाएँ, लेकिन इस बीमारी को बढ़ने नहीं दिया जा सकता।जिस तरह नए आर्थिक मॉडल ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को जमीन देखने के लिए मजबूर किया है, कुछ वैसी ही हालत वहाँ के पोर्न उद्योग के लिए भी है। खबरें तो ऐसी भी आ रही हैं कि आम अमेरिकी इसे लेकर नाक-भौं सिकोड़ रहा है। दरअसल नए आर्थिक और सामाजिक मॉडल में अमेरिका ने नई व्यवस्था गढ़ी है, उसी के कुचक्र में वह फँसता नजर आ रहा है। पोर्न उद्योग की माँग और उसका खुलकर ऐसा तर्क देना भी इसी का प्रतीक है।जॉर्ज डब्ल्यू. बुश तो बचाने का कोई उपाय तो नहीं कर गए, लेकिन अब पोर्न उद्योग की निगाहें नए राष्ट्रपति बराक ओबामा पर टिक गई हैं। उसे उम्मीद है कि ओबामा उसकी माँग का जरूर ख्याल रखेंगे। दूसरी तरफ राजनीति और समाजशास्त्रियों का मानना है ओबामा के लिए इस माँग पर विचार करना भी मुश्किल होगा, माँग पूरी करना तो दूर की बात है। ओबामा के संकोच की वजह भी हैं। वे परंपरावादी माने जाते हैं और निजी तथा सामाजिक जीवन में नैतिकता के पक्षधर रहे हैं। उनके अपने आग्रह ही नहीं, अमेरिकी समाज में खासा प्रभाव रखने वाले चर्च का दबाव भी उन्हें अतिरिक्त रूप से कुछ करने से रोकेगा।( लेखक टेलीविजन पत्रकार हैं) |