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सेना, साजिश, संन्यास और सियासत सब सवालिया..!
-आचार्य अरुण कानपुर
मालेगाँव विस्फोट में सेना के अपफसरों की संलिप्तता से पूरा देश सकते में है। बम कांड की जाँच में सबसे पहले महाराष्ट्र एटीएस ने यह खुलासा कर सबको चौंका दिया कि इसमें हिंदूवादी संगठन शामिल हैं।

यही नहीं इस विस्फोट कांड को अंजाम दिया सैन्य अधिकारियों के प्रशिक्षित लोगों ने। साध्वी प्रज्ञासिंह ठाकुर सहित तीन लोगों को तो एटीएस डंके की चोट पर मध्यप्रदेश से ले गई। बाद में स्वयंभू शंकराचार्य दयानंद पांडेय को कानपुर के रावतपुर क्षेत्रा से धरदबोचा। अब उनके लैपटाप और लगभग दर्जनभर से अध्कि मोबाइल फोन से हासिल जानकारियों से एटीएस ने जो सनसनीखेज खुलासे किए हैं, वे और भी बेहद चौंकने वाले ही हैं। मसलन, एटीएस ने कहा कि तथाकथित स्वामी अमृतानंद ही मालेगाँव, नांदेड और अन्य विस्फोटों का मास्टर माइंड है।

दूसरी तरफ एटीएस ने यह भी बात उजागर की नार्को टेस्ट के बाद कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित ने स्वीकार कर लिया है कि कथित स्वामी अमृतानंद ने उनसे विस्फोटक उपलब्ध कराने को कहा था और वह विस्फोटक उन्हें मुस्लिम चरमपंथी संगठनों से हासिल थे।

यही नहीं तय यह भी हुआ था कि अब तक देशभर में विभिन्न क्षेत्रों में किए गए विस्फोटों में शामिल सिमी के ठिकानों, अल्पसंख्यक समुदाय की इबादतगाहों और हज हाउस को नेस्तनामूद किया जाएगा। इतना सब कुछ एटीएस के खुलासे के बाद विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत हरिगिरि ने हिन्दू आंतकवाद के नाम पर साधु-संतों को अपमानित करने की तीखी आलोचना की।

अमृतानंद तथा साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के समर्थन में राष्ट्रीय जनजागरण अभियान चलाने की घोषणा के साथ ही इलाहाबाद में एटीएस के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन भी किया गया। संघ ने भी इन दोनों ही संतों की गिरफ्तारी पर अपनी ओर से विरोध दर्ज कराते हुए स्वयं सेवकों का दिल्ली में मार्च पास्ट कराया।

इसी बीच भाजपा की नेता सुषमा स्वराज ने इंदौर में कहा कि यह सियासी साजिश है, जो हिंदू संगठनों और साधु-संतों के साथ की जा रही है। वह सत्ता परिवर्तन के बाद बेनकाब हो जाएगी। इसके पहले शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे तो साध्वी प्रज्ञासिंह ठाकुर के समर्थन में पहले से ही खुलकर सामने आ गए थे। उन्होंने इस संदर्भ में महाराष्ट्र सरकार पर हिन्दू संगठनों और साधु-संतों को हिन्दू आतंकवाद के प्रताड़ित और बदनाम करने के लिए एटीएस का नाजायज इस्तेमाल करने के कई आरोप भी लगाए थे।

बहराल, भारत की सेना के गौरवशाली इतिहास में उसके ही अपने जिम्मेदार अफसरों और साध्वी की मालेगाँव विस्फोट कांड में संलिप्तता ने जनमानस में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे पहले यह कि वीर सावरकर ने अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ जो 'अभिनव भारत' नामक हिंदू संगठन बनाया था और बाद वे खुद हिंदू महासभा में शामिल हो गए थे।

गौरतलब बात यहाँ यह है कि हिंदू महासभा इस देश में शीर्ष स्थान पर कभी नहीं आ सका और समूचे देश के जनमानस के मन-मस्तिष्क में हासिए पर ये ही रहा। इसी संगठन की साध्वी प्रज्ञासिंह ठाकुर की मोटरसाइकिल का मालेगाँव विस्फोट कांड में इस्तेमाल किया जाना भी तमाम संशय को जन्म देता है।

हालाँकि वे यह स्पष्ट कर चुकीं हैं कि वह मोटरसाइकिल उन्होंने ने बेच दी थी, लेकिन किसको और क्यों? यह उनके साथ कोई साजिश थी, जिससे वे नावाकिफ रहीं या फर एटीएस ने जो उन पर इतने संगीन आरोप लगाएँ हैं, उसमें कोई रंचमत्रा भी सत्यता है?

भारतीय संन्यास की अवधरणा में यह पहला ऐसा मामला उभकर सामने आया, जिसमें एक साध्वी और कथित स्वयंभू शंकराचार्य को आतंकवादी वारदात में आरोपी बनाया गया है। जहाँ तक सैन्य अधिकारियों के मालेगाँव, जयपुर और नांदेड विस्फोट में शामिल होने का आरोप भी किसी के गले के नीचे नहीं उतरता है। तथाकथित जम्मू की शारदा पीठ के शंकराचार्य अमृतानंद, जो दर्शनशास्त्र, राजनीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र में परास्नातक हैं।

वे भारतीय वायु सेना के सैनिक भी रहे हैं। वे कैसे इस तरह के समाज को बाँटने वाले कृत्य में शामिल हो सकते हैं? मुंबई एटीएस अब इन स्वामी अमृतानंद के ठिकानों, सियासी, प्रशासनिक और अन्य रसूखों की तलाश जम्मू, जालंधर, लुधियाना, फरीदाबाद, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश के कानपुर, आगरा, वाराणसी व गोरखपुर इत्यादि-इत्यादि स्थानों पर कर रही है।

कुल मिलाकर इस विभिन्न संस्कृतियों, सभ्यताओं, बोलियों और उपबोलियों वाले देश में हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई और इसके पहले सिख संगठनों का आंतकवादी वारदातों में शामिल होने के बाद अब हमें यह सोचने पर विवश करता है कि जन, गण, मन, अधिनायक की अवधारणा की साझा संस्कृति वाले इस देश का अगर भूत और वर्तमान इस तरह से सवालिया है तो भविष्य क्या होगा?
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