इस किताब के अलावा उदयप्रकाश की खासियतों का जिक्र करते हुए समीक्षक ने उनकी साक्षात्कार की किताब उनकी अपनी बात की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। इसके अलावा कुँवर नारायण की किताब वाजश्रवा के बहाने, लीलाधर जगूड़ी के काव्य संग्रह खबर के मुँह पर विज्ञापन से ढँका है, अशोक वाजपेयी का काव्य संग्रह दुख चिट्ठीरसा है पर अच्छी समीक्षाएँ हैं। यहाँ इन कवियों की कुछ चुनिंदा कविताएँ भी पढ़ी जा सकती हैं।
इसके अलावा हिंदी के ख्यात कवि असद जैदी की कविताओं को लेकर हुए विवाद और उनके काव्य संग्रह ‘सामान की तलाश’ पर भी टिप्पणी पढ़ी जा सकती है। गीताश्री की किताब स्त्री आकांक्षा के मानचित्र पर भी समीक्षा है।
योगेंद्र कृष्ण के विश्व साहित्य से कुछ अनुवाद भी उल्लेखनीय हैं जैसे रूस के दो महान लेखकों तुर्गनेव और टॉल्सटॉय के बीच हुए विवाद पर टॉल्सटॉय के बेटे इल्या का लेख बहुत अच्छा है और तत्कालीन समय के दो महान लेखकों के अंतरमन और विवादों की एक साफ सुथरी झलक देता है। इसके अलावा एक तस्वीर भी है जो खास है। कुछ कहती है यह तस्वीर में इराक के कवि अहमद अब्देल सारा बगदाद की एक सड़क पर कविता पाठ कर रहे हैं। यह जगह एक कार बम विस्फोट में बर्बाद हो गई थी जहाँ किताबों की दुकानें थी बौद्धिकों का अड्डा।
योगेंद्रजी की एक टिप्पणी है ब्लॉगरों के लिए कुछ विचारणीय बिंदु जिसमें आग्रह किया गया है कि भाषा की शुद्धता बरकरार रखी जाए और एक दूसरे के दोस्ताना कमेंट से आगे निकलने की कोशिश भी।
यहाँ कुछ युवा कवियों की अच्छी कविताएँ भी पढ़ी जा सकती हैं। इनमें यतीद्र मिश्र और निरंजन श्रोत्रिय की कविताएँ दृष्टव्य हैं। पत्रों के बहाने कॉलम के तहत निर्मल वर्मा और योगेंद्र कृष्ण के पत्र पठनीय हैं। इसके अलावा सरोद रानी पर अशोक चक्रधर की एक आत्मीय टिप्पणी भी है। इस ब्लॉग पर साहित्य समाचार भी पढ़े जा सकते हैं।
शब्दसृजन का पता है- http://shabdsrijan.blogspot.com/
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