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एक पत्रिका से खुलती साहित्य की खिड़की
ब्लॉग चर्चा में इस बार शब्द सृजन
रवींद्र व्यास
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हम एक ऐसे समय में रह रहे हैं जब फैलते बाजारों में नित-नए रंगीन और चमकीले उत्पाद आ आकर लोगों को लुभा रहे हैं और लोग इनके मोहपाश में बँधकर अपने को धन्य समझ रहे हों तब नेट इसके मोह जाल से कैसे बच सकता है। आज नेट पर भी कई रंगीन और तमाम तरह के उत्पाद हैं और ऑनलाइन इनकी खरीदी की जा सकती है। और अब तो किताबें भी इतनी रंगीन और इतने तरह की हैं कि वे किताबों के विरोध में आई लगती हैं।

हमारे समय के एक महत्वपूर्ण कवि ने कहा कि बाजारों में घूमता हूँ निशब्द, डिब्बों में बंद हो रहा है पूरा देश, पूरा जीवन बिक्री के लिए, एक नई रंगीन किताब है जो मेरी कविता के, विरोध में आई है, जिसमें छपे सुंदर चेहरों को कोई कष्ट नहीं है। कहने की जरूरत नहीं कि नेट पर भी यही हाल है बल्कि ज्यादा बुरा हाल है कि वहाँ तमाम सुंदर चेहरे हैं जिन्हें कोई कष्ट नहीं है। बल्कि आनंद ही आनंद बल्कि सेक्स ही सेक्स है

निश्चित ही ऐसे समय में जब इंटरनेट पर अश्लीलता अपने चरम पर हो, तब कोई पत्रिका और वह भी साहित्यिक पत्रिका निकाले, यह किसी भी आश्चर्य मिश्रित सुख से कम नहीं है। साहित्यकार योगेंद्र कृष्ण का एक ब्लॉग है शब्दसृजन। यह हिंदी की साहित्यिक-सांस्कृतिक विमर्श की एक पत्रिका है। यहाँ कविताएँ हैं, संस्मरण हैं, समीक्षाएँ हैं, विवाद हैं और विश्व साहित्य की सुंदर झलकियाँ भी हैं। इस पत्रिका को पढ़ना अपने समय से रूबरू होना है।

इसकी सबसे ताजा पोस्ट में चेखव के नाटक ‘द सी ग’ को लेकर एक अभिनेत्री के संस्मरण हैं जिसमें इस नाटक के पहले प्रदर्शन की नाकामयाबी और कालांतर में अन्य प्रदर्शन की कामयाबी का आत्मीय जिक्र है।

इस ब्लॉग पर आलोचक ओम निश्चल का एक कॉलम है हाल-फिलहाल। इसी तरह हिंदी में आई नई किताबों की सारगर्भित समीक्षाएँ हैं। इसकी ताजा कड़ी में कृष्ण बलदेव वेद की डायरी ‘शमअ हर रंग मे’ की समीक्षा है। इस डायरी के कुछ अंश भी दिए गए हैं जिससे वेद साहब की कलम के कमाल की मारू झलक मिलती है।

इसमें वेद साहब ने अपने समकालीन रचनाकारों से अपनी अचूक नजर से बेहद ही बिंदास-बेहिचक ढंग से देखा-परखा और लिखा है। इसमें उन्होंने निर्मल वर्मा से लेकर अशोक वाजपेयी और त्रिलोचन से लेकर शमशेर तक को बेहद ही अनौपचारिक ढंग से याद किया है। ओम निश्चल के शब्दों में इस डायरी में अपने समकालीनों की सोहबतों की बेहतरीन गवाहियाँ दर्ज हैं।
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