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जरूरत जड़ें नष्ट करने की
-मेजर जनरल अफसर करीम

हाल ही में राजधानी दिल्ली पर हुए आतंकवादी हमलों ने इस सचाई पर फिर से मुहर लगाई है कि साम्प्रदायिकता और आतंकवाद आपस में एक-दूसरे से गहरे में जुड़े हुए हैं। इसीलिए अब यह माँग शिद्दत के साथ उठने लगी है कि आतंकवाद से निपटने के लिए सख्त कानून का होना और उस पर ईमानदारी से अमल तो जरूरी है ही साम्प्रदायिकता से निपटने के लिए भी तकरीबन उसी तरह का सख्त कानून होना चाहिए।

आतंकी वारदातों से निपटने के लिए सबसे पहले हमें साम्प्रदायिकता और इससे उपजने वाले माहौल की गहराई से पड़ताल करनी पड़ेगी। साथ ही इस बात को समझकर स्वीकार करने की जरूरत है कि जिस तेजी के साथ साम्प्रदायिकता बढ़ती है उसी गति से आतंकवादी पैदा होते हैं। सच तो यह है कि आतंकवाद को बढ़ाने में साम्प्रदायिकता खाद-पानी का काम करती है।

इसीलिए आतंकवाद की समस्या के लिए सबसे पहले साम्प्रदायिकता को जिम्मेदार मानना जरूरी हो जाता है। जाहिर है अगर किसी समस्या की असल वजह पर प्रहार किया जाए तो उसे विकराल होने से रोका जा सकता है। असल वजह जानकर ईमानदारी से किए गए ठोस उपाय ज्यादा सार्र्थक साबित हो सकते हैं।

साम्प्रदायिकता और आतंकवाद के परस्पर संबंध और पिछले दिनों हुए आतंकवादी हमलों के मद्देनजर, इन दोनों मामलों पर सख्त कानून बनाए जाने की दरकार फिर साबित हुई है। हालाँकि इस तरह की माँग पहले भी उठती रही है, लेकिन आज तक इस मसले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। ऐसा नहीं कि हमारे पास कानून नहीं है। कानून तो हैं लेकिन वे अब तक इस समस्या से निजात दिलाने या फिर किसी भी हद तक काबू पाने में नाकाफी साबित हुए हैं।

बेशक, इसीलिए सख्त कानून की माँग लगातार जोर पकड़ रही है। अब जनता की तरफ से भी सख्त कानून बनाए जाने को लेकर दबाव बढ़ने लगा है। सख्त कानून की आवश्यकता इसलिए है ताकि सही वक्त पर पुलिस सख्त कार्रवाई कर सके। दिल्ली में आतंकी हमलों के बाद जािमया नगर में पुलिस ने जो एनकाउंटर किया और दो आतंकवादियों को मार गिराया उससे पुलिस कार्रवाई और इससे जुड़ी संवेदनशीलता को समझा जा सकता है।

दरअसल, हर जगह अलग-अलग तरीके और मौके के हिसाब से कार्रवाई करनी पड़ती है। इस मामले में इलाके की संरचना भी बेहद मायने रखती है। मान लीजिए कार्रवाई होती भी है और वहाँ गुस्साए लोगों का हुजूम है, तो ऑपरेशन में दिक्कत होती है। दूसरे, भीड़ में हरेक को तो पकड़ा नहीं जा सकता। यह व्यावहारिक दृिष्ट से भी संभव नहीं है, लेकिन अगर कानून सख्त होंगे तो पुलिस को कई मोर्चों पर मदद मिलेगी।
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