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भारत के लिए फायदे का सौदा
बृजेश मिश्र
भारत को एनएसजी से परमाणु व्यापार को मंजूरी मिलना देश के लिए बड़ी उपलब्धि है। यदि अमेरिकी कांग्रेस में 123 समझौते का मसौदा पास हो जाता है तो फायदे का दोहरा रास्ता खुल जाएगा।

देश को अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए 45 देशों से नई तकनीक और संसाधन मिलेंगे तो दूसरी ओर भारत और अमेरिका के रिश्ते और बेहतर होंगे। जाहिर है इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक लाभ होगा।

देश की अर्थव्यवस्था, कृषि और ऊर्जा के क्षेत्र में विकास और उन्नति के नए रास्ते भी खुलेंगे। देश में परमाणु समझौते का जो लोग विरोध कर रहे हैं, मैं उनके बारे में कुछ कहना नहीं चाहता।

मैं समझता हूँ परमाणु समझौते को लेकर देश में दो नजरिए हैं। एक वर्ग विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे भारत के लिए परमाणु परीक्षण का रास्ता बंद हो जाएगा। मैं इस समझौते के उन सकारात्मक पहलुओं को देख रहा हूँ जो भारत के लिए फायदेमंद है।

मैं यह स्पष्ट करना चाहूँगा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के समय जब पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया था, तब सरकार ने यह फैसला किया था कि भारत परमाणु परीक्षण पर अपनी तरफ से एकतरफा रोक लगाए रखेगा। इस नीति पर देश आज भी कायम है। मैं समझता हूँ भारत अब और परमाणु परीक्षण करने वाला नहीं है।

हाँ, यदि किसी और देश (मैं किसी का नाम लेना नहीं चाहता) ने परमाणु परीक्षण किया तो हालात बदल सकते हैं और भारत परीक्षण कर सकता है। इसलिए मेरा मत है कि भारत अमेरिकी परमाणु समझौते के कारण केवल परीक्षण नहीं कर पाएगा, सिर्फ इस तथ्य को उठाना गलत है। 123 करार और उसके बाद इसे एनएसजी की बैठक में मिली मंजूरी से भारत के कुछ पड़ोसी देशों का परेशान होना स्वाभाविक है।

इस छूट के बाद न केवल अमेरिका बल्कि रूस, फ्रांस और अन्य आपूर्तिकर्ता देशों के साथ भारत परमाणु रिएक्टर सौदा कर सकता है।
(लेखक अटलबिहारी वाजपेयी शासनकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। एटमी करार की तैयारी में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।)
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