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सभी की एक ही रट...जीवन का अंत!
21 दिसंबर, 2012 दुनिया का आखिरी दिन!
-अरविन्द दुब

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‘दुनिया का अंत नजदीक है...अमुक रोज धरती का विनाश हो जाएगा...’ इस तरह की बातों पर आजकल कम ही विश्वास किया जाता है। माया सभ्यता के एक कैलेंडर में भी सदियों पहले यह बात कही गई थी। गौर करने लायक बात यह है कि आज इस धारणा से वैज्ञानिक भी इनकार नहीं कर रहे हैं। 21 दिसंबर, 2012 का दिन तय किया जा रहा है, जब पृथ्वी से जीव-मात्र का नामो-निशाँ मिट जाएगा। इस तरह की धारणाओं को बकवास करार देने वाली 21वीं सदी की पीढ़ी भी इसे मान रही है। हाल ही में एक कम्युनिटी फोरम पर 15.95 फीसदी लोगों ने इस पर हामी भरी है। असल में माया कैलेंडरों में दुनिया का आरंभ 11 अगस्त 3114 बी.सी. माना गया है और इसका अंत 21 दिसंबर 2012 को होना तय बताया गया है। इस धारणा के पीछे यूँ तो बहुत से तर्क दिए जाते हैं, पर इसके सात प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं --

1. माया कैलेंडरः साफतौर पर इस कल्पना ने सबसे पहले माया सभ्यता में ही जन्म लिया था। माया सभ्यता अपनी सटीक खगोल विद्या के लिए मशहूर रही है और उनके बनाए कई कैलेंडर इतने सटीक निकले कि आज के सुपर कम्प्यूटर भी इनकी गणनाओं में 0.06 तक का ही फर्क निकाल सके। असल में माया कैलेंडरों के ऐसे आकलन सही साबित हुए हैं, जिनकी गणना हजारों सालों पहले की गई थी। यही कारण है कि इस भविष्यवाणी को भी हलके से नहीं लिया जा रहा है।

2. सूर्य का प्रकोपः सूर्य पर नजर रख रहे दुनियाभर के सौरमंडल विशेषज्ञ मान रहे हैं कि धरती पर सूर्य की किरणों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि सूर्य का ऊर्जा उत्सर्जन एक चक्र के तहत कार्य कर रहा है। इस चक्र में होने वाले परिवर्तन का सीधा असर पृथ्वी पर पड़ेगा। हाल के दिनों में पृथ्वी पर सूर्य की विकिरणों का नकारात्मक प्रभाव बढ़ा है। आने वाले दिनों में यह चरम पर होगा और पृथ्वी का नाश हो जाएगा।

3. परमाणु विखंडनः यूरोप के वैज्ञानिक 27 किलोमीटर लंबी एक सुरंग बना रहे हैं, जहाँ परमाणु विखंडन किया जाएगा। यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा एक्सिलेटर (त्वरक) लगाया जा रहा है। कुछ लोग इसके बुरे परिणाम देख रहे हैं। उनका मानना है कि 2012 में जैसे ही इस यंत्र पर पहला गंभीर प्रयोग किया जाएगा, वैसे ही धरती का अंत भी हो जाएगा।

4. धर्मग्रंथों के हवाले से: माया सभ्यता और फिर वैज्ञानिकों की आशंकाओं पर बाइबल ने भी मुहर लगाई है। इस धार्मिक ग्रंथ में लिखा गया है कि 2012 में अच्छी और बुरी आत्माओं की लड़ाई होगी। यही धरती के विनाश का कारण बनेगा। एक बड़े उल्का पिंड के धरती से टकराने और जीवन का विनाश होने की भविष्यवाणी भी बाइबल में की गई है।

इसी प्रकार चीनी धार्मिक किताब चिंग - ‘चाइनिज बुक ऑफ चेंजेस’ में भी यही बताया गया है। कुछ हिंदू ग्रंथों में वर्णित ‘प्रलय’ की अवधारणा से भी इस धारणा को बल मिलता है।

5. महा ज्वालामुखीः अमेरिका के यलोस्टोन नेशनल पार्क में दुनिया के सबसे बड़े ज्वालामुखी के फटने की आशंका व्यक्त की जा रही है। भू-गर्भ विशेषज्ञों का मानना है कि यह ज्वालामुखी हर 650,000 सालों में फटता है और यह विनाशकारी घटनाक्रम शीघ्र ही दोहराया जाने वाला है। इस ज्वालामुखी के फटने पर बड़ी मात्रा में राख पृथ्वी के वायुमंडल में फैल जाती है। इससे सूर्य की रोशनी रुक जाती है और तापमान बहुत कम हो जाता है। यह स्थिति सालों तक बनी रह सकती है। ऐसा हुआ तो पूरी धरती पर जीवन खतरे में पड़ जाएगा।

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6. भौतिक भी कह रहाः कैलिफोर्निया के बर्कले विश्वविद्यालय के भौतिकशास्त्रियों का गणित भी कह रहा है कि दुनिया खत्म होने के कगार पर पहुँच चुकी है। उनके मुताबिक, वह समय जल्द ही आने वाला है, जब धरती पर कोई बड़ी आपदा कहर बरपाएगी। लंबे समय से यह प्रकोप टल रहा है, लेकिन वह विनाशकारी समय जल्द ही आने वाला है। सन् 2012 में विध्वंस होगा, उन्हें इस बात के 99 फीसदी अवसर नजर आ रहे हैं।

7. चुंबकीय क्षेत्र का कमालः पृथ्वी के चारों तरफ चुंबकीय क्षेत्र है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव प्रत्येक 750,000 सालों में अपनी स्थिति बदलते हैं। ऐसा हुआ तो भी जीवन खतरे में है। अध्ययन में पाया गया है कि ध्रुव हर साल 20 से 30 किलोमीटर के हिसाब से अपनी स्थिति बदल रहे हैं। कहा जा रहा है कि चुंबकीय प्रभाव खत्म होने पर हम 100 सालों में अदृश्य हो जाएँगे।

क्या है सचाई: असल में ऐसी बातें सालों से कही जाती रही हैं। मानव सभ्यता के आरम्भ से यह माना जा रहा है कि इस दुनिया का विनाश तय है। प्राचीनकाल में होने वाले सूर्य व चन्द्र ग्रहणों तक से घबराकर लोग ऐसी कल्पनाएँ करने लगते थे। विश्व विनाश की कल्पना मात्र से घबराकर बड़ी तादाद में कई संप्रदाय के लोगों ने सामूहिक आत्महत्याएँ तक कर लीं, लेकिन कभी कुछ नहीं हुआ। यह केवल जानकारी मात्र है, जिसकी चर्चा वैज्ञानिक जगत के साथ ही दुनियाभर पर नजर रखने वाले जानकारों के बीच हो रही है।
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