कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझसे बेहतर कहने वाले वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझको याद करे, क्यूँ कोई मुझको याद करे मसरूफ़ ज़माना मेरे लिए क्यों वक्त अपना बरबाद करे इसे वे सुनाते भी हैं।
फिर एक अन्य पोस्ट में वे नीरज के लिखे गीत हम-तुम कुछ और बँधेंगे की सुंदर व्याख्या करते हैं और उसकी खूबी से परिचित कराते हैं। इस गीत के बोलों पर जरा ध्यान दें-
वो मेरा होगा, वो सपना तेरा होगा मिलजुल के माँगा, वो तेरा-मेरा होगा जब-जब वो मुस्कुराएगा अपना सवेरा होगा थोड़ा हमारा, थोड़ा तुम्हारा, आएगा फिर से बचपन हमारा
आगे की कुछ लाइनें देखें- हम और बँधेंगे, हम तुम कुछ और बँधेंगे आएगा कोई बीच तो हम तुम और बँधेंगे थोड़ा हमारा, थोड़ा तुम्हारा, आएगा फिर से बचपन हमारा
तेरे मेरे सपने फिल्म के इस गीत के बहाने वे अपने न भूलने वाले गीतों पर बेहतर टिप्पणी करते हैं।
और अंत में वे जो हमारा अपना है टिप्पणी में भारतीय फिल्मों की खासियत को बताते हैं कि इसमें कहानी कहने का जो रागात्मक तरीका है वह भारतीय फिल्मों को दुनिया की तमाम फिल्मों से जुदा करता है और उसे एक विशिष्टता देता है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि दिनेश श्रीनेत के इस ब्लॉग की यह खासियत कही जा सकती है कि वे चाहे फिल्म हो, कोई गीत हो, कोई गायक या गायिका या फिल्म से जुड़ी कोई याद, वे उसे रागात्मकता और सादगी से अभिव्यक्त करने की कोशिश करते हैं। इस ब्लॉग को पढ़ा जाना चाहिए।
इसका यूआरएल है - http://www.indianbioscope.blogspot.com/ |