- बीएस भंडारी
लगभग यह तय हो चुका है कि अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बनने का गौरव डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी और इलिनॉय राज्य के वर्तमान सीनेटर बराक ओबामा को मिलेगा। उनके प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी जॉन मेकेन को उनसे लगभग पन्द्रह प्रतिशत कम मत मिलेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस में पहली बार किसी अश्वेत राष्ट्रपति को रहने का मौका मिलेगा।
हालाँकि डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में हिलेरी क्लिंटन का भारी दबदबा रहा, मगर कुछ मतों की कमी के कारण 7 जून को उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और अब 27 जून से वे ओबामा के साथ चुनाव प्रचार शुरू करेंगी। यदि हिलेरी क्लिंटन के समर्थकों में से आधे भी ओबामा के पक्ष में मत देते हैं तो ओबामा की जीत सुनिश्चित है।
इसीलिए लोगों का अनुमान है कि जॉन मेकेन को 36 प्रतिशत और ओबामा को 57 प्रतिशत मत मिल सकते हैं। जॉन मेकेन और उनके समर्थक तरह-तरह के मुद्दे उठा रहे हैं और वर्तमान रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ऐसी परिस्थितियाँ खड़ी कर रहे हैं कि ओबामा को चाहने वाले उनको मत देने में संकोच करें।
उदाहरण के लिए भले ही राष्ट्रपति जॉर्ज बुश इराक युद्ध को लेकर लोगों की नाराजी झेल रहे हों और ज्यादातर लोग उन्हें नाकामयाब मानते हों, मगर संसद से वे इराक में सैनिक व्यवस्था के लिए दो सौ अरब डॉलर की रकम पास करा चुके हैं। इसे मिलाकर इराक युद्ध पर अमेरिका का खर्चा 650 अरब डॉलर की सीमा पार कर जाएगा। इराक युद्ध में अब तक 4,102 अमेरिकी मारे जा चुके हैं। इराक से अमेरिकी सेना वापस बुलाने का कार्यक्रम ढीला होता जा रहा है।
इराक और अमेरिका की सरकारों के बीच हुआ पिछला करार अगले माह समयातीत हो जाएगा। दोनों देशों के बीच नए करार की बातचीत चल रही है और उम्मीद है कि जुलाई के अंत में नया करार हो जाएगा। इसके मुताबिक अमेरिका इराक में पचास से अधिक सैनिक केंद्र रख सकेगा और आवश्यक होने पर लोगों की तलाशी और दंडात्मक कार्रवाई में सक्षम रहेगा। डर है कि पुराने जमाने के ब्रिटिश-इराक समझौते की तरह इराक पर ब्रिटेन के बजाय अमेरिका का कब्जा न हो जाए।
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