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ऊर्जा का नया समीकरण
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‘किसी वस्‍तु का जड़त्‍व उसकी ऊर्जा पर निर्भर करता है’ आइंस्टीन ने यह सूत्र 1905 में प्रस्‍तुत किया था और ऊर्जा, द्रव्‍यमान और गति के आपसी संबंध की व्‍याख्‍या की थी।

आज लगभग एक शताब्‍दी बाद दुनिया में अनेक परिवर्तन हो गए हैं। समाज और विज्ञान के विविध क्षेत्रों में बदलाव की बयार दिख रही है। आइंस्टीन का यह प्रसिद्ध सूत्र आज किन क्षेत्रों में लागू हो रहा है और उसके क्‍या परिणाम मिल रहे हैं? नतीजों को इस सूत्र के संदर्भ में देखने की कोशिश की है अंकित श्रीवास्‍तव ने...

ऊर्जा का समीकर
किसी वस्‍तु की ऊर्जा, उसके द्रव्‍य (मास, m) और गति (स्‍पीड, c) पर निर्भर करती है। द्रव्‍य के बढ़ने और गति के स्‍थिर रहने से ऊर्जा (एनर्जी, E) में वृद्धि होती है। आइंस्‍टीन का यह समीकरण मात्र विज्ञान के स्‍थूल जगत पर ही प्रभाव नहीं डालता है, बल्‍कि इसका संबंध रोजमर्रा के जीवन पर भी पड़ता है। E=mc2, उस हर जगह है, जहाँ जोश की गति है और संगठित रहने का द्रव्‍य है। इस प्रसिद्ध सूत्र के लिए 1922 में आइंस्‍टीन को भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्‍ठित नोबेल पुरस्‍कार दिया गया था।

समय-समय पर इस सूत्र की व्‍याख्‍या होती रही है और इसके अनेक अर्थ भी खोजे जाते रहे हैं। ये बदलाव आपको भी कहीं सूचना क्रांति के क्षेत्र में नजर आ सकते हैं तो कहीं नारी सशक्‍तीकरण की दिशा में दिख सकते हैं। यह भारतीय टीम के ऑस्‍ट्रेलिया को शिकस्‍त देने में है तो सूचना क्रांति में भी है। परिवहन के संसाधनों में हुई तरक्‍की में है तो महिलाओं में संचरित हुए आत्‍मविश्‍वास में भी है।
  ‘किसी वस्‍तु का जड़त्‍व उसकी ऊर्जा पर निर्भर करता है।’ आइंस्टीन ने यह सूत्र 1905 में प्रस्‍तुत किया था और ऊर्जा, द्रव्‍यमान और गति के आपसी संबंध की व्‍याख्‍या की थी। आज लगभग एक शताब्‍दी बाद दुनिया में अनेक परिवर्तन हो गए हैं।      


टीम इंडिया की जीत (ऑस्‍ट्रेलिया को शिकस्‍त)
टीम इंडिया क्रिकेट में नया जोश है, नया जूनून है, नया जज्‍बा है। तभी तो भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम ने कुआलालंपुर में हुए फाइनल मुकाबले में दक्षिण अफ्रीकको पटखनी देकर विश्‍व विजेता का खिताब हासिल किया। उधर, भारतीय क्रिकेट टीम ने ट्वेंटी-20 में भी विश्‍व कप जीतकर अपनी बादशाहत दिखाई है और अब भारत ने ऑस्‍ट्रेलिया को हराकर कॉमनवेल्‍थ बैंक सीरीज़ पर कब्‍जा कर लिया है। क्‍या रहा है इस जीत का आइंस्टीन फार्मूला। इसमें नए खिलाड़ियों के सम्‍मिलित प्रयास से उनके मास में वृद्धि हुई।

एक खिलाड़ी और 11 का फर्क सामने आया और धोनी के जोश की गति के सामने ऑस्‍ट्रेलिया की पहाड़ समझे जाने वाली टीम ताश के पत्ते की तरह साफ हो गई। भारत ने कॉमन वेल्‍थ ट्रॉफी पर अपना कब्‍जा जमा लिया। आरपी सिंह और हरभजनसिंह की गेंदबाजी और सचिन की बल्‍लेबाजी यानी गति का वर्ग बखूबी तैयार हुआ तो इसमें अन्‍य खिलाड़ियों ने फिल्‍डिंग में सम्‍मिलित योगदान देकर m में वृद्धि की। नतीजा ऊर्जा में इतनी वृद्धि हुई कि पोटिंग को भी मानना पड़ा कि उनकी टीम जोश और ऊर्जा से भरी टीम इंडिया के सामने कमजोर पड़ी।

आर्थिक समीकर
भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्‍स के 20000 का आँकड़ा छू लेना चमत्‍कार नहीं था। ये कई तरक्कियों और विकास का सम्‍मिलित प्रभाव है। आधारभूत संरचनाओं का विकास मेट्रो और मिनी मेट्रो तक दिखने लगे हैं। नए प्रोजेक्‍ट और निवेश में वृद्धि होने से अवसरों में वृद्धि हुई है, जो समीकरण में m है। इसके साथ ही विकास दर में वृद्धि और नई तकनीकी और योग्‍य, शिक्षित और कर्मयोगी मानव संसाधन में वृद्धि c का काम कर रही है। इन सबके सम्मिलित प्रभाव से भी आर्थिक पटल पर E का विस्‍तार हुआ और समीकरण अपने उच्‍च स्‍तर को छू पाया।

महिला सशक्‍तीकर
आज की नारी की छवि आज से आधे दशक पहले की नारी की छवि से बिलकुल अलग है। महिलाओं ने अपनी ऊर्जा और उससे होने वाले फायदे को समझा है। आज अपवादों का छोड़ दें तो वह नारी स्‍वतंत्रता का परचम बुलंद करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। महिलाओं ने लाखों स्‍वयं सहायता समूह बनाए हैं और खुद को संगठित किया है, अपने अधिकारों के लिए घर की चौखट से निकलकर आगे आई हैं, ये महिलाएँ आज पंचायतों में प्रतिनिधित्‍व कर रही हैं, तो कहीं सरकारी विद्यालयों में शिक्षक बनकर बच्‍चों को दिशा दे रही हैं, इन्‍हें अब तक समाज में वर्जित माने जाने वाले क्षेत्रों में पुरुषों के एकाधिकार को तोड़ने में भी हिचक नहीं है। यह आर्थिक स्‍वतंत्रता की प्रतीक है।
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