बाजार के इस आकर्षण का नतीजा यह होगा कि पैसे के लालची खिलाड़ियों के संन्यास लेने की घटनाएँ बढ़ जाएँगी (बढ़ भी रही हैं)। इससे क्रिकेट खेल को नुकसान होगा। ज्ञातव्य है कि आईपीएल में जो लोग क्रिकेट देखने आएँगे, वे उच्च स्तरीय खेल देखना चाहेंगे।
एक मनोवैज्ञानिक पहलू यह भी है कि दर्शक खिलाड़ियों को देश के लिए ही खेलते देखने के आदी हैं और खिलाड़ी भी देश की प्रतिष्ठा के लिए सब कुछ झोंक देते हैं। अतः आईपीएल की सफलता इस बात पर बहुत निर्भर करेगी कि खेल पर यह मनोवैज्ञानिक पहलू कितना हावी होता है। स्वयं कप्तान रिकी पोंटिंग ने हाल ही में कहा है कि आईपीएल में जिस तरह धनवर्षा की जा रही है, उससे भविष्य में गंभीर परिणाम निकल सकते हैं।
खेल और खिलाड़ियों की दुर्गति क्या होगी, इसका आकलन सहज में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि आकलन भविष्य ही करेगा। खिलाड़ी धन के लिए खेलेंगे, खेल के लिए नहीं। इससे सबसे ज्यादा नुकसान रणजी ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी अथवा इन जैसी राष्ट्रीय स्पर्धाओं को होगा, क्योंकि नीलामी में लिए गए 30 खिलाड़ी इनमें खेलने के लिए इच्छुक नहीं होंगे।
इंग्लैंड इथवा योरपीयन लीग फुटबॉल स्पर्धाओं, अमेरिका की नेशनल बास्केटबॉल लीग, मेजर बेसबॉल लीग में खेलने वाले खिलाड़ियों और गोल्फरों को अनाप-शनाप राशि मिलती है। इसका प्रमाण इंग्लिश फुटबॉलर डेविड बैकहम द्वारा एलए गैलेक्सी के साथ किया गया 25 करोड़ डॉलर का करार है, लेकिन भारत से इन लोगों की तुलना नहीं की जा सकती।
यक्ष प्रश्न यह है कि इससे क्रिकेट का असली पारंपरिक रूप जो एक सदी से भी अधिक से चला आ रहा है, खतरे में पड़ जाएगा। खिलाड़ियों की तकनीक एवं क्षमता भी प्रभावित होगी और वह वैसी नहीं रह पाएगी जैसी क्रिकेट की टेस्ट एवं एक दिवसीय विधा के लिए होनी चाहिए।
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