यदि आपको लगता है कि आपका बच्चा मोटा है और उसकी बॉडी लैंग्वेज भी भद्दी होती जा रही है तो बस, बच्चे का टीवी देखना छु़ड़वा दीजिए। यदि बच्चे ने टीवी देखना आधा भी कम किया तो उसकी सेहत ठीक हो जाएगी और मोटापा कम होता जाएगा।
ऐसा कहना है आर्काइव्स ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड एडोलसेंट मेडिसिन पत्रिका का, जिसने अपने मार्च माह के संस्करण में कहा है कि टीवी देखना और मोटापे में गहरा संबंध है। दरअसल कारण यह है कि टीवी देखना और फास्ट फूड खाने के बीच एक क़ड़ी है और फास्ट फूड से चर्बी और मोटापा तेजी से बढ़ता है।
स्कूल जाने वाले और स्कूल जाने से पहले वाले बच्चों को यदि कार्टून फिल्म देखने का शौक है तो निश्चित तौर पर बिस्तर पर ही बैठकर कुछ भी खाएगा। यहाँ तक कि वह टीवी देखते हुए विज्ञापन भी छो़ड़ना पसंद नहीं करेगा।
टीवी देखने के घंटे गिने : बफेलो की यूनिवर्सिटी के लियोनार्ड एच. एपस्टीन का कहना है कि 4 से 7 साल के बच्चों का जब बॉडी मास इंडेक्स परखा गया तो इसमें से एक-तिहाई से ज्यादा का वजन अपनी आयु से कहीं से ज्यादा था। इसमें उन बच्चों को शामिल किया गया, जो नियमित रूप से टीवी देखते हैं या कम्प्यूटर पर गेम खेलते हैं। ये हर सप्ताह 14 घंटे तक कम्प्यूटर गेम खेलते हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे को यह बताएँ कि वह कितने घंटे टीवी देख रहा है और उसका प्रतिफल क्या है।
अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि 36 बच्चे कभी-कभी टीवी देखते हैं। सप्ताह में कितनी देर देखना है यह भी तय है। अध्ययन करने वालों ने इन बच्चों के टीवी देखने का समय कम करा दिया। हर सप्ताह टीवी देखने में 10 प्रश की कमी करने से उनके टीवी देखना आधा कम हो गया।
ऐसे बनेगी बात : अध्ययन में पाया गया कि जो बच्चे बिना किसी रोक-टोक के खूब टीवी देखते हैं और हर सप्ताह करीब 5.2 घंटे कम्प्यूटर पर निकालते हैं, उनके टीवी देखने में हर सप्ताह 17.5 घंटे की कमी कर दी जाए तो बात बन सकती है और उनका वजन कम हो सकता है।
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