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कबाड़खाने के कबाड़ के बारे में कुछ बातें
ब्‍लॉग-चर्चा में आज अशोक पांडे और साथियों का कबाड़खाना
WD
तो थोड़ा और आगे बढ़ते ही निकानोर पार्रा की एक तस्‍वीर के साथ उनकी कविता आ जाती है :

मेरी प्रेमिका मेरे चार अवगुणों के कारण मुझे कभी माफ नहीं करेगी :
मैं बूढ़ा हू
मैं गरीब हू
कम्यूनिस्ट हू
और साहित्य का राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुका हू

शुरू के तीन अवगुणों की वजह स
मेरा परिवार मुझे कभी माफ नहीं कर सकेग
चौथे की वजह से तो हर्गिज़ नही

अमेरिका की प्रसिद्ध कवियत्री हाना कान की कविता भी तमाम कबाड़ के बीच पड़ी दिख जाएगी :
मेरे दादाज
जूते और वोद्क
दाढ़ी और बाइबि
भीषण सर्दिया
स्लेजगाड़ी और अस्तब

WD
मेरी दाद
नहीं था उसके पा
अपनी बेटी के लिए दहे
सो भेज दिया उस
पानियों से भरे समुन्दर के पा

मेरी मा
दस घंटे काम करती थ
आधे डॉलर के लि
हाड़ तोड़ देने वाली उस दुकान मे
मेरी माँ को मिला एक विद्वा

मेरे पित
वे जीवित रहे किताबों,
शब्दों और कला पर,
लेकिन ज़रा भी दिल नहीं थ
मकान मालिक के पास

मै
मैं कुछ हिस्सा उनसे बनी हू
कुछ हिस्से में दूने हैं व
हालाँकि तंग बहुत किय
अपनी माँ को मैंने

ये तो सिर्फ एक बानगी है कबाड़खाने की। ये सभी अनुवाद अशोक पांडे ने किए हैं। कबाड़ अगर ऐसा हो तो कौन नहीं, चाहेगा कि इस कबाड़ के बीच ही गुजर जाए तमाम उम्र।
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