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यीशु सबके लिए आए थे
- केपी पोथ
क्रिसमस एक महान पर्व है, जिसको विश्व के सभी लोग मनाते हैं। पूरे विश्व में लगभग डेढ़ सौ करोड़ ईसाई लोग हैं। ईसाइयों के अतिरिक्त अन्य धर्मों के लोग भी इसे मनाते हैं। क्रिसमस एक सरल पर्व है। ईसा मसीह का जन्म गोशाला में बेथलहम नामक गाँव में एक अद्भुत रीति से हुआ।

पवित्र बाइबल के अनुसार पवित्र आत्मा के द्वारा माता मरियम गर्भवती हुईं। ईसा मसीह का अवतार केवल एक समूह या समुदाय के लिए नहीं हुआ, वरन्‌ संपूर्ण जगत के लिए हुआ है।

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यीशु के जन्म के पश्चात कई ज्योतिषी यरुशलम में आकर पूछने लगे कि यहूदियों का राजा जिसका जन्म हुआ है, कहाँ है? क्योंकि हमने पूर्व में उसका तारा देखा है और उसको प्रणाम करने आए हैं और मुँह के बल गिरकर उसे प्रणाम करने और अपना-अपना थैला खोलकर उसको सोना और लोबान, गंधरस और भेंट चढ़ाई। (मति अध्याय-1, वाक्य नं. 11)।

विद्वानों का मत है कि तीन ज्योतिषियों में से एक भारतीय था। पवित्र बाइबल के अनुसार ईश्वर त्रीत्व में उपस्थित है। (ट्रीनीटी= थ्री एक ईश्वर) पिता, पुत्र, पवित्र आत्मा। मानव जाति का पाप से उद्धार करने के लिए पिता ईश्वर ने पुत्र को दुनिया में भेजा है।

संत यूहन्ना ने इस सत्य कथन को इस प्रकार लिखा है- आदि में वचन था, और परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था यही आदि में परमेश्वर के साथ था। सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है उसमें से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।

वह जगत में था और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ और जगत ने उसे नहीं पहचाना, वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। उसने उन्हें परमेश्वर के संतान होने का अधिकार दिया। (यूहन्ना रचित सुसमाचार, पहला अध्याय)।

यीशु मसीह साढ़े तैतीस वर्ष तक जीवित रहे। उन्होंने बारह शिष्यों को चुना ताकि वे उनके साथ रहें और उनकी इच्छाओं के अनुसार कार्य करें। बारह शिष्यों में से एक (जूदा एसक्रियात) ने यीशु को धोखा दिया और यहूदी दुश्मनों के हाथों में सौंपा।

दुश्मनों ने प्रभु यीशु को मारा, उसके ऊपर थूका और आखिर में उन्हें क्रूस पर चढ़ा दिया। क्रूस पर चढ़ाकर मार डालना उन दिनों की मृत्युदंड प्रणाली थी। क्रूस पर मार डालने के बाद कब्रिस्तान में रखा।
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